नई दिल्ली, 3 अप्रैल. विश्व बैंक ने भारत के राष्टीय राजमार्ग परियोजनाओं में बड़े स्तर पर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की शिकायत की है. वल्र्ड बैंक के इंस्टिट्यूशनल इंटेग्रिटी यूनिट ने एक मार्च 2012 को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय ठेकेदार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परामर्शदाताओं और अधिकारियों के फैसलों को अपने हितों के अनुरूप बदलने के लिए भारी रिश्वत देते हैं, यहां तक कि वे उपहार में सोने के सिक्के भी देते हैं.

वित्त मंत्रालय ने इस रिपोर्ट की एक कॉपी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी है. साथ ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को लिखे पत्र में वित्त मंत्रालय ने उपयुक्त जांच एजेंसी से पूरे मामले की पड़ताल कराकर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इंस्टिट्यूशनल इंटेग्रिटी यूनिट में दक्षिण एशिया क्षेत्र के टीम लीडर ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है, जिसमें भ्रष्टाचार के छह बिंदुओं को उजागर किया गया है. गौरतलब है कि विश्व बैंक लखनऊ मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना, द ग्रांड ट्रंक रोड सुधार परियोजना और तीसरे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को आर्थिक मदद दे रहा है और इन तीनों परियोजनाओं पर नजर बनाए हुए है.

लखनऊ मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना जून 2012 में पूरी होने वाली है और इसके लिए विश्व बैंक ने 62 करोड़ डॉलर दिए हैं.रिपोर्ट में प्रोग्रेसिव कंसट्रक्शन लिमिटेड (पीसीएल) और पीसीएल एमवीआर जेवी के ठेकेदारों के तौर-तरीकों पर सवाल उठाया गया है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीसीएल एक दशक से पूरे देश में राजमार्ग निर्माण के काम में लगी है. एक रोचक तथ्य ये भी है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में भी दो फिसड्डी ठेकेदारों के बारे में बताया गया था. वहीं नवंबर 2011 को जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि काम में सुधार को देखते हुए दोनों ठेकेदारों को फिसड्डी सूची से बाहर कर दिया गया है.

14 से 26 करोड़ की जालसाजी का आरोप पीसीएल ने विश्व बैंक की इस तरह की किसी भी रिपोर्ट में जानकारी न होने की बात कही है. उनका कहना है कि विश्व बैंक की जांच टीम समय-समय पर उनके साइट्स पर जाकर काम का निरीक्षण करती है. विश्व बैंक ने लखनऊ मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में 14 करोड़ 64 लाख से 26 करोड़ 44 लाख रूपये की जालसाजी की बात कही है. साथ ही बताया है कि ठेकेदारों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को रिश्वत के तौर पर एक करोड़ 15 लाख रूपये दिए हैं.

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