प्रदेश सरकार और केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

प्रदेश में इंदौर भी ड्रग ट्रायल के लिए रहा है सुर्खियों में

नई दिल्ली, 16 जुलाई. सुप्रीम कोर्ट ने देश में दवाओं के कथित अवैध क्लीनिकल परीक्षण को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सोमवार को कहा कि मनुष्यों के साथ गिनी पिग की तरह सलूक करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में इंदौर का नाम ड्रग ट्रायल के मामलों में समय-समय पर उछलता रहा है। न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा ने मध्यप्रदेश में और देश के अन्य भागों में बड़े पैमाने पर कथित अवैध दवा परीक्षण किए जाने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिकाओं पर जवाब न देने पर लिए केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की खिंचाई की। पीठ ने कहा 'सरकार की ओर से जिम्मेदारी की कोई तो भावना होनी चाहिए।' जवाब दाखिल करने के लिए सरकार और भारतीय चिकित्सा परिषद को आठ सप्ताह का समय और देते हुए पीठ ने कहा मनुष्यों के साथ गिनी पिग की तरह सलूक किया जा रहा है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पीठ डॉक्टरों के एक समूह और एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि बच्चों, आदिवासियों और दलितों सहित गरीब लोगों पर अवैध और अनैतिक तरीके से क्लीनिक परीक्षण किये जा रहे हैं और इन लोगों का, बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा तैयार दवाओं और टीकों के परीक्षण करने के लिए गिनी पिग की तरह उपयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से समाज तथा ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क के विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का आदेश देने का अनुरोध किया ताकि यह समिति भारत और विदेशों में क्लीनिक परीक्षणों से संबंधित वर्तमान कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करे और इस मुद्दे पर दिशानिर्देश तय करने की सिफारिश करे।

खाप पंचायतें अवैध

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग मामले में एक अहम सुनवाई के दौरान कहा कि खाप पंचायतें अवैध हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि डीएम को प्रेमी जोड़े को सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था करनी होगी. अक्सर झूठी शान के लिए खाप पंचायतें प्रेमी जोड़ों को सजा सुनाती रहती हैं. कुछ मामलों में तो प्रेमी जोड़ों व उनका साथ देने वाले परिजनों को गांव व बिरादरी से दूर कर दिया जाता है, कई मामलों में उनका कत्ल कर दिया जाता है. ऐसे कत्लों में प्रेमी जोड़ों के परिजन भी शामिल होते हैं. हाल ही में यूपी के बागपत जिले में खाप पंचायतों की दबंगई प्रशासन पर भारी पड़ती दिखाई दी थी.

मल-मूत्र सेवन के लिए किया मजबूर

लातेहार.  एक गांव की पंचायत ने वहां रहने वाले बुजुर्ग दंपति पर जादू-टोना करने का आरोप लगाते हुए उन्हें मल-मूत्र का सेवन करने पर मजबूर किया।65 साल के राबर्ट लाकरा और उनकी 60 वर्षीय पत्नी कोलेस्टीना को जून महीने में गायों, भैंसों और बकरियों की आकस्मिक मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया और आठ जुलाई को उन्हें जबरदस्ती पंचायत के समक्ष लाया गया। जब दंपति ने जादू-टोने के आरोप से इनकार किया तो उन्हें अपने मल-मूत्र का सेवन करने के लिए विवश किया गया। एसपी ने कहा, ''हमें घटना की जानकारी मिलने के बाद आज 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है।”

गुरुवार 12 जुलाई 2012 की शाम पुलिस ने ख़ाप के दो लोगों को गिरफ्तार किया तो ग्रामीणों ने दिल्ली-सहारनपुर रोड जाम कर दिया और गाडिय़ों पर पथराव करने लगे. गांववालों के पथराव में कई यात्रियों के साथ-साथ पुलिस का एक जवान भी घायल हो गया. गांववालों के दबाव के आगे घुटने टेकते हुए पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों को रिहा कर दिया. दो दिन पहले 26 बिरादरियों की पंचायत ने महिलाओं के खिलाफ तालिबानी फरमान सुनाया था. दिल्ली से महज 50 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित बागपत में मुस्लिमों की छत्तीस बिरादरियों के तथाकथित अलम्बरदारों ने फरमान जारी कर दिया कि उनके गांव की चालीस साल तक की कोई भी महिला बाजार नहीं जा पाएगी.

महिलाएं गांव में घूम तो पाएंगी लेकिन इसके लिए भी उनके सिर पर पल्लू होना जरूरी है. तालिबानी फरमान में महिलाओं के मोबाइल फोन और ईयर फोन के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी लगाई गई. पंचायत ने अपने तालिबानी फरमान को आगे बढ़ाते हुए प्रेम विवाह पर रोक लगाते हुए कहा कि पहले तो गांव में कोई भी प्रेम विवाह नहीं कर सकता. अगर कर लिया तो उसे गांव से निकाल दिया जाएगा, वह प्रेमी जोड़ा गांव में नहीं रह पाएगा जो अपनी पसंद से शादी करेगा. इन फरमानों को उल्लंघन करने पर पंचायत ने सजा की भी धमकी दे डाली. पंचायत के खौफ में महिलाएं इस फरमान को अपनी सुरक्षा की बात कहकर मानने की हामी भर रही हैं. बड़ी बात तो ये है कि दिल्ली के पास ही स्थित बागपत नागरिक उड्डयन मंत्री अजीत सिंह का संसदीय क्षेत्र भी है.

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