• उधर, उत्तर प्रदेश विधानसभा में माया ने दिया विपक्ष को चकमा

लखनऊ, 21 नवंबर. उत्तर प्रदेश के बंटवारे के प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट हुए विपक्ष के हंगामे के बीच माया सरकार ने बंटवारे का प्रस्ताव पास कर दिया। प्रस्ताव पेश होते ही मिनटों में ध्वनिमत से प्रस्ताव पास भी हो गया। इसके साथ ही विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई, हालांकि विपक्षी सदस्यों का हंगामा देर तक जारी रहा।

बहस कराने की मांग नामंजूर – सदन की कार्यवाही लगभग घंटे भर स्थगित रहने के बाद जब दोबारा शुरू हुई तो समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पर पहले बहस कराने की मांग की। सपा और भाजपा ने मायावती सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। विपक्षी दलों के शोर-शराबे के बीच पहले लेखानुदान मागों को पारित किया गया, उसके बाद सरकार ने प्रदेश के पुनर्गठन का प्रस्ताव पेश किया और उसे बिना बहस कराए पारित कर दिया।

विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित – विपक्ष के हंगामे को देखते हुए लगभग 10 मिनट के अंदर ही विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

विपक्षी सदस्यों का हंगामा – इसके पहले सुबह सदन की बैठक जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके कारण विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने विधानसभा की कार्यवाही अपराह्न 12.20 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी। पोस्टरों और बैनरों के साथ पहुंचे सपा विधायक विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही ‘मायावती सरकार को बर्खास्त करो’ के नारे लगाने लगे। हंगामे में भाजपा विधायकों ने भी साथ दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने मायावती सरकार को भ्रष्टाचारी व अल्पमत वाली सरकार करार देते हुए सरकार से इस्तीफे की मांग की थी। हंगामे के समय मुख्यमंत्री मायावती सदन में मौजूद नहीं थीं।

पुलिस ने भांजी लाठियां – विधानसभा भवन के बाहर भी बड़ी संख्या में सपाई प्रदर्शन कर रहे थे। उन्हें शांत करने के लिए पुलिस ने लाठियां चलाईं। विधानसभा के बाहर और भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विधानसभा के भीतर पीएसी की दो कंपनियां तैनात की गई थीं। सपा ने मायावती सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। सपा नेता आजम खान ने कहा, ‘लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है।

विपक्ष ने जताया विरोध – विपक्षी दल राज्य मंत्रिपरिषद् के 15 नवंबर को लिए गए निर्णय के अनुसार उप्र को पुनर्गठित कर चार राज्यों, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश व पश्चिम प्रदेश बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। लेकिन विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करने के कुछ ही देर बाद मुख्यमंत्री मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस किया और कहा कि राज्य बंटवारे के लिए वह 2007 में ही केंद्र सरकार से कह चुकी थीं। उनकी ओर से कुछ नहीं किए जाने पर मजबूरन अब प्रस्ताव पारित कराना पड़ा।

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