अपने फैसलों पर अटल है केंद्र

नई दिल्ली, 18 सितंबर. तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने यूपीए को 72 घंटों का अल्टिमेटम दिया था, जो खत्म हो गया है. अब सभी की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि ममता बनर्जी क्या फैसला लेंगी? केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी को ठेंगा दिखा दिया है और अपने स्टैंड में किसी भी परिवर्तन से इनकार कर दिया है. केंद्र सरकार ने अपने इरादों से यह जता दिया है कि ममता को जो करना है कर लें वह अपने इरादे बदलने वाली नहीं है.

ममता बनर्जी अपनी पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मीटिंग में हैं. सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बैठक में क्या फैसला करती हैं. इससे पहले सोमवार को कोलकाता में तृणमूल नेता और केंद्रीय मंत्री सुल्तान अहमद ने कहा था कि हमारे सामने तीन विकल्प हैं- यूपीए से अपने मंत्री हटा लें, सरकार से समर्थन वापस लें या हमारे मंत्री अपने ऑफिस को अटेंड न करें. आगे रणनीति पर आज संसदीय दल की बैठक में फैसला होगा.  लेकिन तृणमूल के सूत्रों का कहना है कि ममता का इरादा यूपीए से समर्थन वापस लेने का नहीं है. ज्यादा से ज्यादा पार्टी सरकार से अपने मंत्रियों को हटा सकती है. कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो इसकी संभावना भी बहुत कम है क्योंकि इस पर खुद तृणमूल नेताओं में आम सहमति नहीं है.
इस बीच ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि स्थिति बहुत बिगडऩे पर तृणमूल के मंत्री सरकार से बाहर आ सकते हैं. वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने निर्णय को वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया जबकि उनकी सहयोगी अंबिका सोनी ने भरोसा जताया कि तृणमूल ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे संप्रग की स्थिरता को खतरा पहुंचे. कांग्रेस ने भी कहा कि बातचीत चल रही है लेकिन इस बारे में उसने ज्यादा ब्यौरा नहीं दिया.

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की बैठक की पूर्व संध्या पर पार्टी नेता एवं केन्द्रीय मंत्री सुल्तान अहमद ने तीन विकल्प दिये हैं जिसमें संप्रग से समर्थन वापस लेना शामिल है. अहमद ने बताया कि संप्रग से मंत्री बाहर आ सकते हैं, सरकार से समर्थन वापस लिया जा सकता है या मंत्री अपने दफ्तरों में ही नहीं जाएं. वहीं, कांग्रेस ने सोमवार को एक ओर साफ कर दिया कि वह इन फैसलों पर पीछे नहीं हटने वाली है वहीं उसने संकेत भी दिया कि वह सहयोगियों के बीन सहमति बनाने में भी लगी हुई है. केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि सरकार डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले को वापस नहीं लेगी, वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार अपने सहयोगियों से वार्ता कर रही है और उम्मीद है कि दोनों पक्ष एक दूसरे की मजबूरियां समझेंगे. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी दल अपने-अपने सहयोगियों के साथ 20 सितम्बर को आहूत बंद की तैयारियों में लगे हुए हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के साथ पार्टी की रणनीति पर चर्चा की. चिदम्बरम ने संवाददाताओं से कहा कि पिछले सप्ताह के फैसले से सरकार के सामने अस्तित्व का कोई संकट नहीं है. उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोगियों को यह समझाने में सफल होंगे कि जो हमने किया है, वह अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अच्छा है.

गौर हो कि मनमोहन सिंह की सरकार ने पिछले सप्ताह बहुब्रांड खुदरा कारोबार में 51 फीसदी एफडीआई और घरेलू विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कम्पनियों की अधिकतम 49 फीसदी एफडीआई को इजाजत दे दी. सरकार ने डीजल मूल्य भी प्रतिलीटर पांच रुपये बढ़ा दिया. इसके अलावा साल में रियायती दर पर रसोई गैस की संख्या घटाकर छह कर दी.

सहयोगियों को मना लेंगे: चिदंबरम
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने साफ कर दिया है कि सरकार हाल में लिए गए फैसलों से पीछे नहीं हटेगी. डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी और मल्टी-ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का फैसला बदला नहीं जाएगा. इन फैसलों पर सहयोगी दलों के विरोधी तेवर के बावजूद उन्होंने साफ कर दिया है कि सरकार पर किसी तरह का खतरा नहीं है. उन्होंने पूरी उम्मीद जताई है कि भले ही सरकार की सहयोगी पार्टियां इन फैसलों का विरोध कर रही हैं, लेकिन सरकार अपने सहयोगियों को मना लेगी. सरकार देश की आर्थिक रफ्तार बढ़ाने के लिए 30 अक्टूबर तक नीतिगत मोर्चे पर कई और कदम बढ़ाएगी.

वहीं, सरकारी खजाने को दुरुस्त करने का भी प्लान पेश करने की भी तैयारी है. गौरतलब है कि मनमोहन सिंह की सरकार ने पिछले हफ्ते मल्टी-ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआइ और घरेलू एयरलाइंस में विदेशी विमानन कंपनियों की अधिक से अधिक 49 फीसदी विदेशी निवेश को इजाजत दे दी. सरकार ने डीजल के दाम भी 5 रुपए बढ़ाए हैं.

ऐसे में देश की जनता पर महंगाई की मार बढ़ जाएगी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने सही फैसला लिया है. काफी लंबे समय से ही तेल कंपनियां नुकसान झेल रही थीं. इसलिए पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी थी. सरकार अपनी आमदनी बढ़ाएगी और वित्तीय घाटा कम करने के उपाय करेगी. उन्होंने कहा कि ऐसे कई तरीके हैं, जिससे खर्च कम किया जा सकता है और अर्थव्यवस्था को वापस पटरी में लाया जा सकता है.

मंदिरों, गुरुद्वारों को भी लेने होंगे महंगे एलपीजी सिलेंडर
सब्सिडी वाली रसोई गैस पर कैंची चलाने के सरकारी फैसले का असर देश के गुरुद्वारों, मंदिरों व अन्य धार्मिक संस्थानों को भी काफी प्रभावित करने वाला है. इनके अलावा लगभग दर्जन भर अन्य संस्थानों को सस्ती दर पर रसोई गैस की आपूर्ति बंद होने जा रही है.  इन सभी संस्थानों को अब सामान्य ग्राहकों की तरह ही हर वर्ष महज छह सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे.

खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 10 प्रतिशत से ऊपर पहुंची
सब्जियों की बढ़ती कीमतों से अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 10.03 प्रश पर पहुंच गई जो इससे पिछले महीने 9.86 प्रश पर थी. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के मुताबिक, अगस्त के दौरान सबसे अधिक मूल्यवृद्धि सब्जियों में रही, सब्जियों की कीमतें 20.79 प्रतिशत बढ़ीं.शहरी इलाकों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बढ़कर 10.19 प्रतिशत पर पहुंच गया.

जो जुलाई में 10.10 प्रतिशत था.

वहीं, ग्रामीण इलाकों में खुदरा मूल्य वृद्धि 9.90 प्रतिशत रही जो जुलाई में 9.76 प्रतिशत थी.
हालांकि, 13 सितंबर को डीजल की कीमतों में की गई वृद्धि का असर सितंबर के मुद्रास्फीति के आंकड़ों में देखने को मिलेगा. अगस्त के दौरान, खाद्य एवं पेय खंड के लिए थोक मूल्य सूचकांक 12.03 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कपड़ा, बिस्तर और फुटवियर की मुद्रास्फीति 10.71 प्रतिशत रही. व्यक्तिगत खंडों में तेल एवं वसा की कीमतों में 18.41 प्रतिशत, चीनी में 17.51 प्रतिशत और दालों व उत्पादों में 16.04 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

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