राष्ट्रपति चुनाव: ममता पड़ी अलग-थलग

नई दिल्ली,15 जून. नससे. यूपीए ने वर्तमान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बनाने की घोषणा की। शुक्रवार की शाम हुई यूपीए की बैठक में सोनिया गांधी ने उनके नाम की घोषणा की।

मुखर्जी के नाम की घोषणा के बाद यूपीए के घटक दलों के नेताओं ने उन्हें बधाई दी। बैठक में मुखर्जी के नाम पर यूपीए के सभी घटक दलों ने सहमति जताई। समाजवादी पार्टी ने भी मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा की है। सपा के प्रमुख नेता राम गोपाल यादव ने इसकी घोषणा की। इसके अलावा बसपा की प्रमुख मायावती ने भी उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है। लेकिन ममता बनर्जी की पार्टी अभी भी उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ है और पार्टी ने कहा है कि वह मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करेगी। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से प्रणब मुखर्जी के औपचारिक तौर पर यूपीए के उम्मीदवार बनने पर आशंकाओं के बादल छाए हुए थे, लेकिन आज की घोषणा के बाद पूरा परिदृश्य साफ हो गया। कहा यह भी जा रहा है कि यूपीए इस घोषणा के बाद एनडीए के नेताओं से भी मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील करेगा। मुखर्जी के नाम की घोषणा के बाद उम्मीद की जा रही है कि वाम दल भी आज शाम की बैठक में उनकी उम्मीदवारी को समर्थन देने की घोषणा कर सकते हैं।

सपा ने लिया यू टर्न प्रणब मुखर्जी को देगी समर्थन

राष्ट्रपति पद को लेकर तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ी नजर आ रही समाजवादी पार्टी ने यू टर्न लेते हुए कहा है कि वह संप्रग उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को अपना समर्थन देगी. सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि पार्टी   राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में संप्रग की ओर से घोषित किए गए श्री मुखर्जी के नाम का समर्थन करेगी.

सपा महासचिव रामगोपाल

यादव ने श्री मुखर्जी को अग्रीम बधाई देते हुए कहा कि श्री मुखर्जी सदन के सबसे सर्वश्रेष्ठï नेता है जिनके नाम पर आसानी से सहमति बन सकती है.

इससे पहले गुरूवार रात से ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि सपा संप्रग उम्मीदवार का समर्थन कर सकती है. गौरतलब है कि गुरूवार देर रात और शुक्रवार को सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और सपा महासचिव रामगोपाल यादव तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल के साथ कांग्रेस नेताओं की वार्ता हुई थीै. जिसमें सपा द्वारा समर्थन दिए जाने के साफ संकेत मिले थे. श्री यादव के आगरा रवाना होने से पहले सपा महासचिव रामगोपाल यादव व श्री अग्रवाल ने उनसे मुलाकात की. पार्टी सूत्रों की माने तो गुरूवार को तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी व सपा सुप्रीमों श्री यादव के बीच हुई मुलाकात में श्री यादव ने उनसे जल्दबाजी नहीं करने और किसी भी नाम पर अंतिम निर्णय करने से पहले सपा के अन्य नेताओं की मंजूरी की बात कही थी. सपा के एक वरिष्ठï नेता ने बताया कि पार्टी में कई नेताओं की राय प्रणव मुखर्जी को लेकर सकारात्मक थी. नेताजी भी उनके नाम को लेकर सहमत थे. लेकिन कांग्रेस की ओर से बातचीत को बढ़ाने में की गई देरी का नतीजा है कि बीच में ऐसे हालात बन गए. सपा सांसद शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि सुश्री बनर्जी के साथ सपा के संबंधों पर इस फैसले से कोई असर नहीं पड़ेगा. दोनों दलों के बीच रिश्ते हमेशा की तरह मधुर रहेंगे.

अकेले निर्णय नहीं कर सकता-शरद

राजग की महत्वपूर्ण बैठक से पहले जद यू प्रमुख शरद यादव ने आज स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव के लिए किसी भी उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव नहीं देगी और कहा कि वह मुद्दे पर सामूहिक पसंद का समर्थन करेगी. जद यू से पहले भी इस तरह के संकेत मिले थे कि एपीजे अब्दुल कलाम के नाम को प्रस्तावित करने में पार्टी असामान्य महसूस कर रही है. बहरहाल उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के नाम का भाजपा जोरदार समर्थन करेगी तो क्या उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी या नहीं.

इस प्रश्र के बारे में उन्होंने कहा कि मैं अकेले निर्णय नहीं कर सकता. राजग के भीतर सामूहिक निर्णय हो चुका है कि जो भी स्थिति उभरेगी उसी परिप्रेक्ष्य में हम निर्णय करेंगे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कल कलाम के पटना पहुंचने पर उनकी आगवानी की थी जहां उन्हें दो समारोहों में हिस्सा लेना है.

हालात पर नजर है-आडवाणी

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए में लगभग डेढ घंटे मंथन के बाद  कोई निर्णय नहीं हो सका है. एनडीए ने देखो और इंतजार करो की नीति अपनाने का फैसला किया है. भाजपा सुप्रीमो लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि ये चुनाव असाधारण है. श्री आडवाणी ने 1969 के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि इस इस बार का चुनाव भी ऐसा ही ऐतिहासिक है. लेकिन अभी तक राष्टï्रपति के उम्मीदवारी के लिए कोई निर्णय नहीं किया गया है. श्री आडवाणी ने कहा कि बैठक में राष्टï्रपति चुनाव से जुड़े सभी मुददों पर बातचीत की गई है.

एक बार फिर हमलोग एनडीए के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करने के बाद एनडीए की बैठक होगी और उस समय के राजनीतिक हालात का जायजा लेते हुए निर्णय किया जाएगा. श्री आडवाणी ने कहा कि यूपीए के सहयोगी दल की ओर से ही कहा जाता है कि प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति बनाया जाए. इससे साफ हो जाता है कि सरकार में कितनी विश्ववसनीयता की कमी है. पंडित नेहरू से अभी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार को मैने देखा है लेकिन अभी तक इससे पूर्व की सरकारों में इतनी विश्वास की कमी मैंने कभी देखी नहीं है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक हालात पर हमलोग पैनी नजर रखे हुए है. नवीन पटनायक और जयललिता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा राष्टï्रपति बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि गैरकांग्रेसी दलों के साथ हमलोग बातचीत कर रहे है. यूपीए में किसी प्रकार की सर्वसहमति नहीं है. यदि सर्वसहमति हुई रहती तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

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