इस युग में सभी जगह आबादी तो बढ़ रही है लेकिन जमीन उतनी ही रहेगी उसमें तो इजाफा हो नहीं सकता. मानव की बढ़ती आबादी व अन्य खेती, उद्योग, यातायात आदि के लिए जमीन की मांग बढ़ती ही जा रही है. जमीन पर सबसे ज्यादा दबाव है इसी कारण जंगल खत्म होते जा रहे हैं, उसके साथ-साथ वन्य प्राणियों का आवास खत्म कर मानव का आवास बढ़ता जा रहा है. यदि मानव आवास के लिए जंगल और खेत खत्म कर दिये तो मानव जाति ही नष्टï हो जायेगी. इसका निदान इसी में ढूंढा गया है कि मानव का आवास जमीन पर फैलाया (वर्टिकल) न जाए बल्कि उसे ऊपर (होरीजेंटल) उठाया जाए. अब सारे संसार में गगनचुम्बी इमारतें बन रही हैं. कई किलोमीटर ऊंची इमारतों के रिकार्ड बनते और टूटते जा रहे हैं.

ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार का यह फैसला कि राज्य में शहरों के जमीन पर फैलाव (वर्टिकल) पर जोर रहेगा, कुछ समय की मांग के विपरीत लगता है. दिल्ली में एन.डी.ए. शासन काल में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक शासकीय भवन की आधारशिला रखते हुए भी यह कहा था कि अब वह समय आ गया है जब हमें मकानों को जमीन फैलाने के स्थान पर आकाश की तरफ ऊंचा उठाना ही पड़ेगा. खेत और उद्योग तो गगनचुम्बी इमारतों में नहीं लगाये जा सकते, उन्हें तो धरातल ही चाहिए. इसलिए मानव को अपने हित में खाद्यान्न व औद्योगिक विकास के लिये जगह छोड़कर ऊपर उठना होगा. मध्यप्रदेश को अपनी नीति पर पुनर्विचार
करना चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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