मध्य प्रदेश में जवाहरलाल नेहरू शहरी पुर्निर्माण योजना के अंतर्गत महानगरों को नया रूप दिया जा रहा है. इसमें सबसे बड़ी बात यह हो रही है कि सड़कों को फोरलेन बनाया जा रहा है. वर्तमान बड़ी सड़कों के आसपास ही इन्हें बढ़ाया गया है. इसमें पूर्व की सड़क प्रणाली यथावत भी रही अन्यथा शहरों में भारी अधिग्रहण व तोड़ï फोड़ करनी पड़ती है, जिससे लागत बहुत बढ़ï जाती है. राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर इनमें विशेष रूचि ले रहे हैं. हाल ही में उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री श्री कमलनाथ से मिलकर विभिन्न नगरों की प्रस्तावित व जारी योजनाओं के लिये 4 अरब से ज्यादा की राशि जारी करने की मांग की और श्री कमलनाथ ने भी इसे शीघ्र जारी करवाने का वचन दिया है.

इसके तहत राजधानी भोपाल में पायलट कारीडोर परियोजना और इन्दौर में रिवर साइड कारीडोर योजनाएं बी.आर. टी.एस. के तहत पूरी की जानी हैं. शहरी नवीनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के नगरों में क्षमता वृद्धि के कार्यों के लिए विश्व-स्तरीय विशेषज्ञों की सेवायें भी उपलब्ध कराने के लिये श्री कमलनाथ से आग्रह किया है. पिछली 20वीं सदी के प्रारंभ में नगर निर्माण विशेषज्ञ लुटियन ने नई दिल्ली बनाई थी. इसके काफी समय बाद भारत में चंडीगढ़ को विधिवत तरीके से तैयार किया गया है अन्यथा देश के सभी बड़े-छोटे शहर स्वत: अपने आप बनते चले गये हैं. मुम्बई का निर्माण कुछ अद्भुत है. वह मूल रूप से कुर्ला तक थी. समुद्र को पाटते व पीछे ढकेलते (रिक्लेमेशन) हुए नरीमन प्वाइंट तक बढ़ा दी गई है.

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