मध्यप्रदेश शासन ने शहरी गरीबों के लिये 60 हजार मकानों के निर्माण के लिये 388 करोड़ रुपयों की प्रत्याभूमि देने का निर्णय लिया है. इस दिशा में राज्य में लगातार उत्कृष्ट कार्य हो रहे हैं. गत वर्ष केन्द्र सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार को शहरी गरीबों के इस कार्य के लिए पारितोषिक भी दिया था. राज्य के 4 नगरों- भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नवीनीकरण मिशन के अंतर्गत इन शहरों की व्यवस्थाओं को नया रूप दिया जा रहा है. सड़कें चौड़ी की जा रही हैं. झुग्गियों के स्थान पर पक्के मकान बनाकर दिये जा रहे हैं.

राज्य शासन ने इन आवासों के लिये भूमि नि:शुल्क आवंटित की है. मूल्यों में हुई वृद्धि के कारण इन भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब शासकीय प्रत्याभूमि मिल जाने से ये बनकर तैयार हो जायेंगे. अभी ये तीन मंजिला बनाये जा रहे हैं. लेकिन शहरों में आवासहीन गरीब आबादी काफी अधिक है और जमीन कम होती जा रही है इसलिये यह जरूरी होगा कि इन मकानों को 8-10 मंजिला बना दिया जाए. अन्यथा जमीन के अभाव में इनका बहुत बड़ा भाग फिर भी आवासहीन रहेगा. इस नये आवासों की बस्ती में प्राथमिक, मिडिल और हायर सेकेन्डरी स्कूल तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था भी की जानी चाहिए.

राज्य में शहरी गरीबी के अलावा शहरी उच्च शिक्षा प्राप्त छात्रों के लिये उपयुक्त नौकरियों के अवसर जुटाये गये हैं. राज्य की वैज्ञानिक व सूचना क्रांति विकास में इन्फोसिस व टी.सी.एस. को इन्दौर के सुपर कोरीडोर में प्रत्येक को 100-100 एकड़ जमीन आवंटित की गई है. इनसे प्रत्येक एकड़ का 20 लाख रुपया लिया जाएगा और प्रति एकड़ के हिसाब से राज्य के 100 इंजीनियरों को नौकरी देनी होगी. इस व्यवस्था से 10 हजार इंजीनियरों को इन उच्च श्रेणी के दो संस्थान में नौकरी के साथ उच्च और आधुनिकतम ज्ञान अर्जित व अनुभव के अवसर मिल रहे हैं. राज्य के प्रौद्योगिकी के विकास में यह व्यवस्था राज्य को नया स्वरूप देने जा रही है. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने यह घोषणा भी की है कि हिन्दी भाषी प्रतिभायें सामने लाने के लिये अब मेडिकल, इंजीनियरिंग व सूचना तकनीकी क्षेत्रों में पढ़ाई भी हिन्दी में शुरु करायी जायेगी. इसके लिये हिन्दी में पाठ्यक्रम तैयार कराया जायेगा. गांव के प्रतिभाशाली बच्चे हिन्दी माध्यम से पढ़ाई के कारण आगे चलकर अंग्रेजी माध्यम के कारण उच्च शिक्षा में कठिनाई महसूस करते हैं और पिछड़ जाते हैं.

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