संकर बीटी कपास बीजों से देश में कपास का उत्पादन बढ़ा है और इससे किसानों को लाभ मिल रहा है। साथ ही इसके कारण देश नकदी फसल का शुद्ध निर्यातक हो सकता है। यह बात एक अध्ययन में कही गई।

नई दिल्ली. काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट [सीएसडी] और भारत कृषक समाज द्वारा कराए गए इस अध्ययन में कहा गया कि 2002-03 में बीटी कपास की शुरुआत के बाद से कपास का कुल उत्पादन 9.25 फीसदी बढ़ा है और किसानों की आय में 375 फीसदी का इजाफा हुआ है। बीटी कपास का विकास बीटी नामक एक बैक्टीरिया के सहयोग से किया जाता है, जो विषले पदार्थ का निर्माण करता है, जिसके कारण कीट पतंग इस पौधे से दूर रहते है। इस किस्म के कपास के इसी विषले पदार्थ पर विवाद है।

कुछ वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इससे होने वाले परागण के कारण स्थानीय कपास की किस्म प्रदूषित हो रही है। भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय जाखड़ ने कहा कि सच्चाई और भ्रम को अलग अलग करने के लिए अध्ययन कराया गया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक बन गया है। देश में कपास के खेतों में 90 फीसदी हिस्से पर बीटी कपास की खेती हो रही है।सीएसडी के निदेशक टी. हक ने कहा कि किसानों की बातचीत से उनकी जीविका में उल्लेखनीय प्रगति का पता चलता है। हक ने कहा कि भारत शुद्ध आयातक की जगह शुद्ध निर्यातक हो गया है।

ब्याज दर नहीं है विकास दर में गिरावट का कारण

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने शुक्रवार को कहा कि विकास दर कम रहने का प्रमुख कारण ऊंची ब्याज दर नहीं है।

उनका कहना है कि विकास व महंगाई में संतुलन स्थापित करना रिजर्व बैंक की एक प्रमुख चिंता रही है। महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है और रिजर्व बैंक महंगाई और विकास दोनों को ध्यान में रखकर ही नीतिगत दर तय करेगा। चक्रवर्ती ने एक सम्मेलन में कहा कि विकास दर कम रहने के कई और भी कारण हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि सिर्फ ब्याज दर के कारण ही विकास दर कम हो रही है। उन्होंने कहा कि विकास व महंगाई में संतुलन स्थापित करना रिजर्व बैंक की एक प्रमुख चिंता रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर है और रिजर्व बैंक महंगाई और विकास दोनों को ध्यान में रखकर ही नीतिगत दर तय करेगा। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च को समाप्त तिमाही में विकास दर 5.3 फीसदी रही, जो पिछले नौ साल में सबसे कम है। पूरे कारोबारी साल 2011-12 के लिए देश की विकास दर 6.5 फीसदी रही, जो 2008-09 की वैश्विक आर्थिक मंदी में भी दर्ज की गई. 6.7 फीसदी विकास दर से कम है। उन्होंने कहा कि यदि महंगाई दर कम होगी, तो निश्चित रूप से हम दर घटाएंगे।

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