इस साल 5 राज्यों की विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों मणीपुर के 28 जनवरी और पंजाब व उत्तराखंड में 30 जनवरी को निपट गये. बाकी बचे 2 राज्यों उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 7 चरणों में 4-8-11-15-19-23 व 28 फरवरी को इसी माह संपन्न होने जा रहे हैं. गोवा में 3 मार्च को चुनाव के बाद ही इन सभी राज्यों के मतदान की गणना व परिणामों की घोषणा होगी. इन सभी 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव 5 वर्ष पूर्व 2007 में हुए थे.

पंजाब में वर्ष 2007 में अकाली दल ने श्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में कांग्रेस की अमरिन्दर सिंह की सरकार को चुनाव से हराया था. उससे पूर्व के चुनाव में सरदार अमरिन्दर सिंह ने बादल की अकाली दल सरकार को उखाड़ा था. पंजाब में बादल व अमिरिन्दर सिंह के बीच सत्ता के दौर चल रहे है. इस बार के चुनावों में भी इन्हीं दोनों की टक्कर है. भाजपा भी कुछ संख्या में जीत कर अकालियों के साथ साझा सरकार चलाती है. अकाली भी एन.डी.ए. गठबंधन में शामिल है. चुनावों में व्यक्तिगत जोश खरोश भी निकला. अकाली उप मुख्यमंत्री श्री सुखवीर बादल ने कहा कि अमिरिन्दर दोपहर तक पटियाला पेग पीये पड़ा रहता है. अमिरिन्दर भी गरजे कि सत्ता में आया तो प्रकाश सिंह बादल को उल्टा टांग दूंगा. अब दोनों की हसरतें मतदान मशीनों में बंद है और पंजाब नतीजों के इंतजार में शांत बैठा है. गत चुनाव में 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में अकाली-48 और उनके सहयोगी भारतीय जनता पार्टी 19 और कांग्रेस 44 व स्वतंत्र 5 जीते थे. लेकिन दो साल बाद ही 2009 के लोकसभा चुनावों में कुल 13 सीटों में से कांग्रेस को सर्वाधिक 8, अकालियों को 4 और भाजपा को मात्र एक सीट मिली थी. इन दिनों सबसे जबरदस्त जंग उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी, श्री मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी, उमा भारती के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी, श्री राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और उसके इस चुनाव में सहयोगी श्री अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोकदल के बीच चुनावी द्वंद्व चल रहा है. गत 2007 के चुनाव में उत्तरप्रदेश में चली आ रही त्रिशंकु विधानसभाओं व साझा सरकारों के दौर में यही कहा जा रहा था कि फिर त्रिशंकु विधानसभा बनेगी.

लेकिन मायावती ने चमत्कार करते हुए 403 सीटों की विधानसभा में अकेले बहुल संख्या में 206 सीटें जीतकर साझा सरकारों के दौर को खत्म करते हुए भारी बहुमत की बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनाई जो इन चुनावों में फिर दावेदार है. इसमें समाजवादी पार्टी को 97, भाजपा को 51, राष्ट्रीय लोकदल को 10, निर्दलीय 10, कांग्रेस को सबसे कम नगण्य रूप में मात्र 2 सीटें मिली. लेकिन दो साल बाद 2009 के लोकसभा चुनावों में श्री राहुल गांधी ने भी चुनावी करिश्मा कर दिया. उन्होंने कुल 80 सीटों में से कांग्रेस को सत्तारूढ़ बसपा को मिली 20 सीटों से एक ज्यादा जीतकर कांग्रेस को 21 सीटों पर  जिताया. इस समय समाजवादी पार्टी को सबसे ज्यादा 23 सीटें मिली थी. चुनाव के ठीक पहले समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ संयुक्त मोर्चा से हटकर धोखा दे दिया था. तब भी श्री राहुल गांधी ने स्थिति सम्हाल ली थी. इसमें भाजपा को 10 और लोकदल को 5 सीटें मिली थी. इस बार उत्तरप्रदेश में कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ रही है. केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में अजीत सिंह कुछ सीटों पर कांग्रेस के साथ है. इस बार राहुल गांधी लोकसभा के चुनावों की तरह विधानसभा में भी चुनावी करिश्मा करने के लिये जी-जान से लगे हैं. मायावती अपनी सरकार को फिर लाना चाहती है. समाजवादी पार्टी को अपने दुश्मन हो गये श्री अमर सिंह के कारण परेशानी हो रही है. वे किसी तरह मुसलमानों के वोट पाकर कुछ सीटें निकालना चाहते है. उमा भारती ने मध्यप्रदेश में तो जरूर करिश्मा किया था कि कांग्रेस की 10 साला दिग्विजय सिंह को दो तिहाई बहुमत से हराया था. लेकिन पार्टी छोडऩे के बाद वे यहां पस्त हो गई है. पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश में पुनसर््थापित करना चाहा है. वे वहां चुनावों में स्वयं व पार्टी को स्थापित कर पाती हैं या नहीं. यह अभी अनुमानों में ही रहेगा. उत्तरप्रदेश में एक बड़ा ही अवांछनीय अनुमान यह भी लग रहा है कि इस बार वहां पार्टियों का आधार कम और जातियों का आधार ज्यादा बनाया गया है और विधानसभा उसी आधार पर बनी नजर आयेगी.

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