लखनऊ, 3 जुलाई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक अजीबोगरीब फैसला किया है. अखिलेश का नया फैसला यह है कि अब राज्य के विधायक अपनी निधि में से 20 लाख रुपए तक की कार खरीद सकते हैं.

बता दें कि एक विधायक को 1 साल में 1 करोड़ रुपया मिलता है लेकिन 20 लाख की कार खरीदने का यह फैसला उसके 5 साल के कार्यकाल में एक बार ही लागू होगा. उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधायक है. अगर सभी विधायक अखिलेश के इस आदेश का पालन करते हैं तो 5 साल में कुल खर्चा 80 करोड़ 60 लाख रुपये आएगा. लेकिन अखिलेश के इस फैसले का विपक्षी बीएसपी ने विरोध किया है. सीएम अखिलेश ने यह बयान विधानसभा के अंदर दिया. कानून के मुताबिक कोई भी विधायक क्षेत्र के विकास के लिए दी वाली राशि का निजी इस्तेमाल नहीं कर सकते.

ऐसे में अखिलेश का यह फैसला हैरानी भरा नजर आता है. मालूम हो कि इससे पहले अखिलेश सरकार ने शुरुआती 100 दिन के भीतर ही राज्य में 7 बजे के बाद मॉल और 10 बजे के बाद बाजार बंद करने का आदेश दिया था. बताया गया कि ऐसा राज्य में बिजली की बचत के लिए किया गया लेकिन विरोध हुआ तो सरकार को कदम वापस खींचने पड़े. अब देखना यह है कि विधायक निधि से कार खरीदने की स्वीकृति देने का यह फैसला क्या सरकार फिर से वापस लेगी? सवाल यह भी है कि कर्ज के बोझ तले दबे यूपी के लिए यह कदम कितना सही है? कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने व्यक्तिगत रुप से खुद को इस फैसले का पक्षधर नहीं बताया. अखिलेश ने कांग्रेस पार्टी की राय बताने से तो किनारा किया लेकिन यह अवश्य कहा कि वो खुद कभी अपनी विधायक निधि से निजी इस्तेमाल के लिए गाड़ी नहीं खरीदेंगे.

विपक्षी विधायकों को नहीं भाया अखिलेश का बंपर गिफ्ट

यूपी के विधायकों को विधायक निधि से 20 लाख तक की गाड़ी खरीदने की छूट देकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुरे फंस गए हैं। वाहवाही लूटने के चक्कर में की गई इस घोषणा पर अखिलेश को लेने के देने पड़ गए हैं और लगभग सभी विपक्षी विधायक इस घोषणा के खिलाफ खड़े हो गए हैं।विधायक निधि से 20 लाख तक की गाड़ी खरीदने की इजाजत वाले सीएम अखिलेश की  घोषणा का बीजेपी और बीएसपी ने विरोध किया है। बीजेपी के यूपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सीएम की घोषणा को रद्द करने की मांग की है।

वाजपेयी ने मांग की है कि विधायकों को गाड़ी खरीदने पर वैट में छूट और ब्याज मुक्त होने जैसी सुविधा दी जाए न कि विधायक निधि का इस तरह से बेजा इस्तेमाल करने की छूट। वाजपेयी ने कहा कि सरकार का यह फैसला बिल्कुल गलत है। बीजेपी का कोई विधायक अपनी निधि से गाडी नहीं खरीदेगा। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी पार्टी बीएसपी ने भी इस फैसले का विरोध किया है। नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा है कि विकास निधि से गाड़ी खरीदने की अनुमति देना बिल्कुल उचित नहीं है। बीएसपी का कोई भी विधायक ऐसी गाड़ी नहीं खरीदेगा। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता और कैबनेट मंत्री आजम खान ने कहा है कि यह फैसला उन लोगों के लिए है जो गाड़ी खरीदने की स्थिति में नहीं है।

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