श्रीनगर, 27 सितंबर. राष्ट्रपति के रूप में कश्मीर की पहली यात्रा पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हिंसा से कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं निकला और घाव पर मरहम लगाने की प्रक्रिया को प्यार, सहानुभूति और संयम से आगे बढाने तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों का तेजी से समाधान निकालने की जरूरत है.

समाज में सहिष्णुता की अत्यधिक जरूरत पर जोर देते हुए प्रणब ने कहा कि शिकायतें हो सकती है और कई अहम विषयों से निपटने और तेजी से उनका समाधान निकाले जाने की जरूरत है. कश्मीर विश्वविद्यालय के 18वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रणब ने कहा, ‘ भारत सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक कश्मीरी इज्जत के जीवन गुजारे और उसे समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों.Ó गौरतलब है कि राष्ट्रपति बनने के बाद प्रणब मुखर्जी की यह पहली जम्मू कश्मीर यात्रा है. यहां छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेधावी और युवा लोगों के बीच आज वह इस अवसर का उपयोग समाज में संयम की अत्यावश्यक जरूरत को रेखांकित करने के लिए करना चाहेंगे.

जम्मू कश्मीर में हडताल, जनजीवन अस्त व्यस्त

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की कश्मीर की यात्रा के विरोध में हुर्रियत कांफ्रेंस से अलग हुए धडे की हडताल के कारण घाटी में जनजीवन अस्त व्यस्त रहा. राष्ट्रपति बनने के बाद श्री मुखर्जी की कश्मीर की यह पहली यात्रा है. उनकी कश्मीर यात्रा के विरोध में अलगाववादियों ने हडताल का आह्वान किया है जिसके कारण घाटी में दुकानें .शैक्षणिक संस्थाएं और व्यावसायिक संस्थान बंद रहे. इस दौरान सरकारी कार्यालयों. बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य संस्थानों में भी काम काज प्रभावित हुआ.

हडताल के कारण यातायात भी बाधित रहा. राष्ट्रपति की यात्रा और हडताल के मद्देनजर सडकों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और राज्य पुलिस के जवानों को तैनात किया गया. राज्य में पिछले एक सप्ताह में दूसरी बार हडताल का आह्वान किया गया है. इससे पहले अमेरिका में बनी इस्लाम विरोधी फिल्म द इन्नोसेंस आफ मुस्लिम्स के विरोध में भी गत शुक्रवार को भी हडताल की गई थी.

कश्मीर के लोगों ने अपना भविष्य खुद चुना है

न्यूयॉर्क.  कश्मीर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणियों को खारिज करते हुए भारत ने कहा है कि कश्मीर के लोगों ने लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार शांतिपूर्वक अपने भविष्य का फैसला किया है. विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. इस मुद्दे पर देश का रुख सभी को पता है.

जरदारी की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हमने पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयान में जम्मू-कश्मीर का संदर्भ देखा है. जम्मू कश्मीर के लोगों ने लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार अपने भविष्य को चुना है. यह क्रम जारी है. जरदारी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 67वें सत्र में कहा था कि कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की नाकामी का सुबूत है न की मजबूती का. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत इस मसले को हल करने की मांग की.

जरदारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार जम्मू कश्मीर के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपने भविष्य का फैसला करने के अधिकारों लिए हम उन्हें समर्थन देते रहेंगे. यह प्रस्ताव जनमत संग्रह की बात करता है. जरदारी ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों पर पाकिस्तान की विदेश नीति का एक सैद्धांतिक आधार रहा है. कश्मीर के मुद्दे को आपसी सहयोग से ही सुलझाया जा सकता है. गौरतलब है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर कश्मीर मुद्दे को बार-बार उठाया है. जबकि भारत लगातार कहता आया है कि यह उसका अंदरुनी मामला है. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भी कश्मीर मसला सुलझाने के लिए किसी बाहरी समाधान की संभावना से इन्कार कर चुके हैं.

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