• 26/11 का मामला

वाशिंगटन, 28 अक्टूबर. मुंबई में 26 नवंबर को हुए हमलों के बाद तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कड़े शब्दों में जो कुछ कहा था उससे पाकिस्तान इतना अधिक घबरा गया था कि उसने चीन से लेकर अमेरिका तक को कह दिया कि भारत ने युद्ध का फैसला कर लिया है।

इसके बाद तत्कालीन विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने मुखर्जी से फोन पर बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं हो पाई तो कुछ समय के लिए वह भी परेशान हो गई थीं। व्हाइट हाउस के एक सहायक ने राइस से कहा था कि पाकिस्तानियों का कहना है कि भारतीयों ने चेतावनी दी है कि उन्होंने युद्ध का फैसला किया है।

राइस ने अपनी नवीनतम किताब नो हाई ऑनर्स में लिखा है कि पाकिस्तान की ओर से आ रही अफवाहों के फलस्वरूप तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने उनसे स्थिति को सामान्य करने के लिए इस्लामाबाद और नई दिल्ली का दौरा करने को कहा था। पाकिस्तान से मिले संदेश के बारे में जब व्हाइट हाउस के सहायक ने राइस को बताया तो राइस के मुंह से निकला क्या .. ? कुल 766 पृष्ठों की किताब में राइस ने लिखा है कि यह तो भारत ने मुझसे नहीं कहा।

दो दिन में भारतीयों से मेरी कई बार बातचीत हुई जिसमें उन्होंने तनाव कम करने की इच्छा जताई और यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि पाकिस्तान ऐसा कुछ करे जिससे पता चले कि वह आतंकियों की धरपकड़ की जिम्मेदारी स्वीकार करता है। राइस ने  ऑपरेशन्स सेंटर से मुखर्जी से फोन पर संपर्क करने को कहा लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद वह परेशान हो गईं और उन्होंने सोचा कि नई दिल्ली युद्ध की तैयारी कर रही है और इसीलिए मुखर्जी उनसे बात करने से बच रहे हैं। राइस ने लिखा है कि मैंने फिर फोन किया पर कोई जवाब नहीं मिला। अब तक खबर फैल चुकी थी और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनें घनघनाने लगी थीं। पाकिस्तानी सबसे संपर्क कर रहे थे  सऊदी अरब, अमीरात, चीन .. सबसे। अंतत: मुखर्जी ने फोन किया और मैंने उन्हें वह सब बताया जो मैंने सुना था।

मुखर्जी ने कहा क्या ..?  उन्होंने कहा कि मैं अपना निर्वाचन क्षेत्र में हूं,भारतीय चुनावों की तैयारी कर रहे थे और मुखर्जी संसद सदस्य थे तथा अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे थे। अगर मैं युद्ध शुरू करने वाला होता तो क्या मैं दिल्ली से बाहर रहता। उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई चारा नहीं है, लेकिन हम युद्ध करने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैं समझता हूं कि यह खतरनाक है। मुंबई हमलों के बाद नई दिल्ली की आपात यात्रा पर राइस ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री दोनों ने उनसे दो टूक शब्दों में कहा कि जनता के बढ़ते दबाव के बावजूद वह युद्ध के खिलाफ हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि पाकिस्तान कुछ करे। राइस के अनुसार, जब वह इस्लामाबाद गईं तो पूरी दुनिया को मालूम होने के बावजूद पाकिस्तानी नेतृत्व ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया कि हमलावर पाकिस्तानी नागरिक थे। राइस ने लिखा है कि पाकिस्तानी एक बार डर गए थे और भारतीय दावों को एक ही झटके में सिरे से खारिज कर दिया।

Related Posts: