सतना 14 अक्टूबर. भारतीय जनता पार्टी के बुर्जुग नेता एवं देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी नें केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार पर संवैधानिक संघीय ढांचे को नष्ट करने का आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि यह स्थिति संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के लिए खतरनाक है। क्योंकि प्रदेश और जनता की जरूरतें तक पूरी नहीं होनी दी जा रही है।

जन चेतना यात्रा की अगुवाई करते हुए सतना पहुंचे पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री आडवाणी ने यह बात शुक्रवार को स्थानीय सर्किट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन में कही श्री आडवाणी नें कहा कि गैर कांग्रेसी राज्यों के साथ केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार भेदभाव पूर्ण रवैया अपना रही है।  म.प्र. जैसे राज्य के साथ ऐसा बर्ताव प्रदेश सरकार के बेहतर काम काज के बावजूद सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि यहां भाजपा की सरकार है. भ्रष्टïचार का जो मुद्दा देश भर में छाया है उस पर विधेयक पारित कर म.प्र. विधानसभा ने भेजा लेकिन केन्द्र ने उसे मंजूरी नहीं दी. यदि म.प्र. की सरकार मुख्यमंत्री समेत अन्य लोक सेवकों को भ्रष्टïचार विरोधी कानूनके दायरे में लाना चाहती है तो इसमे खराबी ही क्या है? आज देश में भ्रष्टïचार, आतंकवाद और गौवंश संरक्षण पर सख्त कानून की जरूरत है. इन तीनो पर म.प्र. सरकार कानून लागू भी करना चाहती है लेकिन केन्द्र को दिक्कत है. यह बहुत गंभीर बात है-केन्द्र का रवैया डिस्क्रिमिनेशन का है- एन.डी.ए. के कार्यकाल में ऐसी स्थिति नहीं थी. प्रधानमंत्री पद पर अपनी दावेदारी से जुड़े प्रश्र के उत्तर में श्री आडवाणी ने कहा कि मैं रेस में नही हूं. लेकिन इसका फैसला पार्टी करेगी. देश में अगली सरकार के प्रश्र पर श्री आडवाणी नें कहा कि यदि अगली सरकार एन.डी.ए की बनती है तो उसमे कांग्रेस और कांग्रेस की सरकार का योगदान होगा. वे मैहर होते हुए जबलपुर की ओर रवाना हो गये.

भाजपा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पार्टी में मौजूदा स्थिति के बारे में पूर्व उप प्रधानमंत्री नें कहा कि अटल जी हमारे सर्वमान्य नेता है. मैं उन्हें राज्यसभा में लाना चाहता था लेकिन उन्होने स्वयं ही इंकार कर दिया. लोकपाल बिल में न्यायपालिका को शामिल किए जाने के सवाल पर उन्होनें कहा कि लोकपाल बिल में प्रधानमंत्री होना चाहिए. लेकिन सरकार के बिल में पी.एम. नहीं है इसीपर बहस हो रही है. न्यायपालिका के लिए अलग व्यवस्था के तहत न्यूडीशियल एकाउन्टेविलिटी की कल्पना की गई है. सरकार ने कुछ प्रावधान किए हैं हमने उनमे संशोधन की बात की है जब बिल सदन में आएगा तब देखेंगे. सतना में पत्रकारों को रूपए बांटे जाने के मामले को उन्होनें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के ऊपर छोड़ दिया. प्रदेश के मंत्रियों पर लोकायुक्त की कार्रवाई से सम्बन्धित प्रश्न पर श्री आडवाणी नें कहा कि लोकायुक्त की रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. कर्नाटक में हमने लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है. इसी प्रश्र पर भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने स्पष्टï किया कि म.प्र. में लोकायुक्त की कोई ऐसी रिपोर्ट नहीं है.

नोट मामले पर दिए जांच के निर्देश

भोपाल,14 अक्टूबर.भ्रष्टाचार के खिलाफ जागृति लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा निकाली जा रही जनचेतना यात्रा के मध्य प्रदेश में प्रवेश करने से पहले सतना मे मीडियाकर्मियों के बीच नोट बांटे जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इसे राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश करार दिया है,वहीं स्वयं आडवाणी ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रभात झा को जांच के निर्देश दिए हैं। मालूम हो कि आडवाणी की जनचेतना यात्रा के मध्य प्रदेश में आने से पहले सतना में भाजपा सांसद गणेश सिंह व लोक निर्माण मंत्री नागेंद्र सिंह की मौजूदगी में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। वार्ता खत्म होने के बाद वहां पहुंचे मीडियाकर्मियों को एक-एक लिफाफा दिया गया।

इस लिफाफे में 500-500 रूपए का नोट रखा था। इस पर पत्रकारों ने सख्त आपत्ति भी दर्ज कराई। मीडियाकर्मियों को नोट दिए जाने के मामले के तूल पकडऩे पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं के इस कृत्य ने पार्टी की मानसिकता को उजागर कर दिया है। एक तरफ आडवाणी भ्रष्टाचार के खिलाफ यात्रा निकाल रहे हैं,वहीं मीडियाकर्मियों के बीच नोट बांटे जा रहे है। उनका आरोप है कि प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों से लेकर अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। उनकी हकीकत उजागर न हो जाए इस मकसद से मीडिया को खरीदने की कोशिश की गई, मगर मीडिया ने इस प्रलोभन में न आकर भाजपा का असली चेहरा बेनकाव किया है।

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांति लाल भूरिया ने कहा कि आडवाणी काले धन की बात करते हैं और उनकी यात्रा का सारा इंतजाम कालेधन से ही हो रहा है।सतना में आडवाणी से पत्रकारों ने सवाल किया तो उनका कहना था कि यह स्थानीय मामला है, इस प्रकरण की प्रदेशाध्यक्ष जांच कर उन्हें प्रतिवेदन देंगे ताकि उसका पता चल सके कि किसने नोट बांटे। वहीं सांसद गणेश सिंह का कहना है कि संवाददाता सम्मेलन उन्होंने आयोजित किया था, तथा उसके बाद वह चले गए थे। नोट किसने बांटे है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है,इसकी वह जांच कराएंगे।

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