• कांग्रेस ने पढ़ाया मर्यादा का पाठ

नई दिल्ली,12 फरवरी, नससे. कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के बयान पर चुनाव आयोग के सख्त रुख को देखते हुए पार्टीजनों को संभलकर बोलने की हिदायत दी है.

आयोग द्वारा श्री खुर्शीद की राष्ट्रपति से शिकायत किए जाने पर पार्टी की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. कांग्रेस हमेशा चाहती है कि सभी कांग्रेसजन सार्वनिक जीवन की मर्यादा और देश के कानून के अंतर्गत ही अपनी बात करें. मुस्लिमों के आरक्षण के मुद्दे पर चेतावनी के बावजूद श्री खुर्शीद की बयानबाजी जारी रहने पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को कल शाम एक पत्र लिखकर इसकी शिकायत की और उनसे तत्काल इस मुद्दे पर निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की. राष्ट्रपति ने उचित कार्रवाई के लिए यह पत्र प्रधनमंत्री कार्यालय को भेज दिया है. संभवत: यह पहली बार है है जब आयोग ने किसी केन्द्रीय मंत्री की शिकायत राष्ट्रपति से की है. इस मामले को लेकर गरमाई राजनीति उत्तर प्रदेश मे चल रहे चुनाव के मद्देनजर पार्टी ने कांग्रेजसजनों को संभलकर बोलने की हिदायत देकर आयोग के गुस्से को कम करने का प्रयास किया है.

बर्खास्त करें : भाजपा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने खुर्शीद को संविधान के खिलाफ काम करने के लिए कानून मंत्री के पद से बर्खास्त करने की मांग की. उन्होंने ट्वीट किया हम राष्ट्रपति से खुर्शीद को संविधान के खिलाफ काम करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का आग्रह करते हैं.

अभूतपूर्व संवैधानिक संकट

भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद का मानना है, ‘जिस तरह की स्थिति बनी है उससे एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है’ क्योंकि सवाल चुनावों के बारे में नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक इकाइयों की विश्वसनीयता का है जिसे विशेष दर्जा प्राप्त है. प्रसाद ने कहा, ‘क्या माननीय प्रधानमंत्री कोई कार्रवाई करेंगे या निष्क्रियता की स्थिति में बने रहेंगे? क्या श्रीमती सोनिया गांधी कुछ बोलेंगी या अपनी विशिष्ट चुप्पी साधे रखेंगी..नहीं तो देश समझेगा कि खुर्शीद ने जो कहा, उसके बारे में उन सबकी एक सी भावनाएं हैं.’ भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यदि सरकार खुर्शीद को नहीं हटाती तो ‘हम समझेंगे कि यह (खुर्शीद की टिप्पणी) कांग्रेस का सामूहिक बयान है.’ कानून मंत्री के खिलाफ चुनाव आयोग के कदम का समर्थन करते हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि आयोग के पास आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई कराने का पूरा अधिकार है. जनता दल यू के अध्यक्ष शरद यादव ने उल्लेख किया कि कानून मंत्री का ‘राजनीति से प्रेरित एजेंडा’ है. उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री को उन्हें उत्तर प्रदेश में ‘प्रतिबंधित’ करना चाहिए क्योंकि वह ‘हताशापूर्ण’ तरीके से वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

चुनावी धांधलियों पर ध्यान क्यों नहीं देता आयोग

लखनऊ. सलमान खुर्शीद द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद के बीच केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग को यह भी देखना चाहिए कि मायावती सरकार नौकरशाही का किस कदर दुरूपयोग कर रही है.  बटला हाउस कांड पर कांग्रेस के मंत्रियों और अन्य राजनीतिक दलों की अलग अलग बयानबाजी पर सिब्बल ने कहा, ‘किसी मंत्री के बयान पर मैं कुछ कहना नहीं चाहता, लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि सभी लोगों को उत्तर प्रदेश के विकास का मुददा उठाना चाहिए.

और जहां तक बटला हाउस कांड की बात है तो उस बारे में गृह मंत्री के बयान के बाद कोई मुद्दा बाकी नहीं बचा.’ खुर्शीद के बयान को लेकर चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति से उनकी शिकायत किए जाने पर सिब्बल ने उनका नाम लिए बिना कहा, ‘किसी ने कोई बयान दिया है तो कुछ सोचकर दिया होगा. चुनाव आयोग की अपनी सोच है और आयोग उन पर कार्रवाई कर रहा है और उसका जवाब वही देंगे, लेकिन जहां तक चुनाव आयोग का सवाल है तो उन्हें यह भी देखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में फतेह बहादुर सिंह को चुनाव आयोग ने होम सेकेट्री के पद से हटा दिया था लेकिन उन्हें मायावती सरकार ने कार्मिक विभाग में तैनात कर दिया और अब तैनाती तबादले के सारे अधिकार उनके पास हैं. कानपुर में केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के आवास पर सिब्बल ने पत्रकारों से कहा, ‘चुनाव आयोग को देखना चाहिये कि उत्तर प्रदेश में कैबिनेट सचिव शंशाक शेखर सिंह बसपा का एजेंडा चला रहे हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप मिश्रा को उत्तर प्रदेश सरकार ने रेजीडेंट कमिश्नर बनाकर दिल्ली भेज दिया और आयोग से मंजूरी तक नहीं ली गई. उत्तर प्रदेश में तमाम नियम कानूनों को ताक पर रखकर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय बहुजन समाज पार्टी का आफिस बना हुआ है और वहां के अधिकारी मायावती के पोस्टर बैनर छपवा रहे हैं. विश्वविद्यालय की तमाम गाडिय़ां गलत कामों में लगी हैं. चुनाव आयोग को इन चीजों को भी देखना चाहिए.

Related Posts: