मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निश्चय प्रगट किया है कि राज्य में हर गांव व शहर की स्वयं की जल व्यवस्था हो और तालाबों को बचाने के लिये कानून बनाया जायेगा. नदियों का पुनर्जीवन राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. पावन नदी क्षिप्रा की 13 ऐसी सहायक नदियां है जो राजस्व अभिलेखों में तो दर्ज हैं लेकिन न जाने कब और कैसे उन पर अतिक्रमण कर उन्हें खेत व आबादी में बदल दिया गया. विदिशा जिले में ग्यारसपुर का प्राचीन तालाब पुरातत्व के स्टोन स्लेब में खोदकर प्रदर्शित किया हुआ था, लेकिन जमीन वह नहीं बल्कि वहां खेत था. उसे फिर तालाब में परिवर्तित किया गया है.

राज्य शासन न सिर्फ राज्य बल्कि देश हित में यह बड़ा काम करेगा कि जितनी भी नदियां, तालाब लुप्त हो चुके है उन्हें तुरन्त कार्यवाही कर वापस प्राकृतिक रूप में लाया जाए. कई नदी, तालाबों किनारों का इलाका दबा लिया गया है. उन्हें भी पूरे आकार में लाना होगा. राज्य में जलाभिषेक अभियान में सात लाख से अधिक जल संरचनाएं बनायी गई है.
भूजल निश्चित ही एक बड़ी समस्या है. इसके लिये सबसे बड़ा प्रयास यह प्रयास होना चाहिए कि वनों में पानी की रोक कम हो जाने से पानी तेजी से बहकर बाहर निकल जाता है. वही पानी भूजल बनता है जो जमीन में कुछ देर भरा रहे. पहले यह काम बरसात से पहले पतझड़ हो जाने से जमीन पर पड़े पत्ते करते थे जो पानी रोकते थे और उसी में सड़कर जंगल में खाद का काम भी करते थे.

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