भोपाल, 7 जून नभासं. जरा सोचिए अगर धरती का जल सूख गया तो क्या होगा? जमीन के जलस्रोत बंद हो गए तो क्या होगा? जी हां इस समय शहर में ड्राई जोन का खतरा बढ़ गया है.

यदि यही स्थिति रही तो आम जनजीवन को पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं होगी.इस समय जो बचा-खुचा जल लोगों को मिल रहा है, वह भी दूषित और और फ्लोराइड युक्त है जो बच्चों से लेकर बड़ी आयु वर्ग के लोगों के लिए तनाव, जोड़ों का दर्द और जीवन भर के लिए गंभीर बीमारी का कारण बनता है.चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की बीमारी ग्रांउड वाटर, हैंडपंप, कुआं आदि के पानी से सबसे ज्यादा होती है. गर्मी के दिनों में पानी में फ्लोराइड की मात्र सबसे ज्यादा बढ़ जाती है.भूजल वैज्ञानिकों का कहना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए अब मात्र एक ही रास्ता बचा है और वह है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम.इससे धरती तक पानी पहुंचाकर सूखे कुएं अथवा ट्यूबवेल में दोबारा पानी लाया जा सकता है.भूजल वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम के असंतुलन की वजह से हर साल जमीन का भूजल स्तर 14 फुट नीचे जा रहा है.जमीन की पहली परत सूख चुकी है.सड़कें और घर आंगन पक्के होने से जमीन के अंदर पहुंचने वाले पानी का रास्ता बंद हो गया है.ऐसे में धरती की इस पहली सूखी पड़ती परत को नमी देना बेहद जरूरी है.वष्र के जल के एक बड़े हिस्से को भी धरती में समाहित करना होगा.

शहर के ज्यादातर क्षेत्रों में ट्यूबवेल, हैंडपंप का पानी छूट चुका है.यह तभी चालू होंगे जब कम से कम 8 से 10 दिन की लगातार बारिश होगी.हालांकि शहर की एक बड़ी आबादी अभी पूरी तरह से टैंकरों के पानी पर निर्भर है.जो ट्यूबवेल चल रहे हैं उनमें से ज्यादातर में जो पानी आ रहा है वह फ्लोराइड और नाइट्रोजन युक्त है जिससे लीबर, सांस, फेफड़े की बीमारी हो रही है.चिकित्सकों के अनुसार अक्सर गर्मी के मौसम में इस तरह की स्थिति बन जाती है.मेडिसिन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी कहते हैं कि दूषित पानी के सेवन के मरीज सबसे ज्यादा आ रहे हैं.क्योंकि पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट की मात्र बढ़ जाती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

ऐसे होती है वाटर हार्वेस्टिंग:- वाटर हार्वेस्टिंग के लिए कुओं के तल को पूरी तरह से साफ कर लें.उस पर ढक्कन भी लगाएं.इसके बाद घर की छत से पाइप उतारकर उसे सीधे कुएं की तली तक ले जाएं.लेकिन यह ध्यान रखें कि शुरुआती बारिश का पानी कुएं में न उतारें.इसी तरह डेढ़ से ढाई हजार वर्गफीट छत वाले मकानों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी है.इसमें बरसात की छत का पानी एकत्र कर ढाई इंच व्यास वाले पाइप की सहायता से सूखे हुए नलकूप, ट्यूबवेल व हैंडपंप में पाइप उतारें.पानी को फिल्टर करने के लिए पीवीसी पाइप से बने एक फिल्टर का उपयोग करना पड़ता है.

गड्ढा बनाकर पानी उतारें- शहरी क्षेत्र में सामान्य तौर पर छोटे मकानों के लिए सबसे आसान तरीका है गड्ढा बनाकर पानी को धरती में उतारना.गोलाकार या आयताकार गड्ढा खोदकर उसमें 30-60 मिलीमीटर व्यास की लेयर दो फुट और सबसे नीचे मोटी गिट्टी 60-90 मिलीमीटर व्यास की लेयर दो फुट तक डालें और इसके ऊपर दो फुट मोटी रेत की परत बिछाएं फिर छत का पानी इस गड्ढे में उतारें इससे जमीन का जल स्तर ऊपर आएगा.

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