हमने सभी देश वासियों व फैंस का दिल तोड़ा है

पर्थ,17 जनवरी. पिच पर लगातार जूझ रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने आज स्वीकार किया कि उनकी टीम आस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्तमान सीरीज में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सकी है और उन्होंने पूरे देश और दुनिया भर में अपने करोड़ों फैंस को नीचा दिखाया है.

भारत चार मैच की सीरीज में 0-3 से पीछे चल रहा है और उस पर इंग्लैंड के बाद लगातार दूसरे क्लीनस्वीप का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में खराब फार्म से जूझने वाले भारतीय ओपनर गौतम गंभीर भी निराश और शर्रि्मदा नजर आए. गंभीर ने कहा, हमने पूरे देश और अपने फैंस को नीचा दिखाया और हमें यह स्वीकार करना होगा. स्वदेश में लोग नाराज हैं और हम उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. हमने लोगों को खुद की आलोचना करने का मौका दिया है. हमने अच्छी क्रिकेट नहीं खेली और जिस तरह की हमारी बल्लेबाजी है उसे देखते हुए अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे. हमने उस आम आदमी को नीचा दिखाया जो हमसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा था और मैं इसे स्वीकार करता हूं. हमें जितना जल्दी हो सके इसे बदलना होगा. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने अभी तक छह पारियों में 24.00 की औसत से 144 रन बनाए हैं. गंभीर ने कहा, मैं उन लोगों में नहीं हूं जो जिम्मेदारी लेने में हिचकिचाता हो. यदि आप नंबर एक बनना चाहते हो तो आपको अच्छा प्रदर्शन करना होगा और विदेशों में जीतना होगा. चाहे वह इंग्लैंड हो, दक्षिण अफ्रीका या फिर आस्ट्रेलिया. गंभीर पिछले दो साल से अधिक समय से टेस्ट मैचों में शतक नहीं बना पाए हैं. इस बारे में गौती ने कहा, यदि शतक सब कुछ होता है और मैं एक सैंकड़ा जडऩे के बाद अगली चार या पांच पारियों में कम स्कोर बनाता हूं तो मुझे नहीं लगता कि इससे मुझे संतोष होगा. आप निरंतर एक जैसा प्रदर्शन करना चाहते हो. यदि शतक के बाद अगली पारी में मैं दोहरे अंक में भी नहीं पहुंच पाता हूं तो मुझे खुशी नहीं होगी.

आपको निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना होता है. यदि आप शतक बनाते हो तो अच्छी बात है. शून्य से शतक तक की लंबी यात्रा होती है और हम सभी जानते हैं कि बल्लेबाज के लिए एक गेंद का खेल होता है. मैं शतक लगाने को लेकर दबाव में नहीं हूं. यदि मैं लगातार अर्धशतक भी बनाता रहता हूं तो मुझे खुशी होगी. गंभीर ने इसके साथ ही कहा कि किसी एक पर दोष मढऩा सही नहीं होगा क्योंकि यह सामूहिक असफलता है. गंभीर ने कहा, हमें सचिन के 100वें शतक की तुलना में सीरीज जीतने में अधिक खुशी होती. इसके विपरीत यदि सचिन शतक बना लेते और हम हार जाते तो इससे हमें खुशी नहीं मिलती. किसी के व्यक्तिगत प्रदर्शन से नहीं बल्कि सब कुछ सीरीज जीतने से जुड़ा है.

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