• कैसे भराएगी जगह

पर्थ, 8 जनवरी. भले ही वो फिलहाल कुछ बड़ा ना कर पा रहे हों लेकिन भारत की महान त्रिमूर्ति सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण, जब टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहेगी तो फिलहाल लगता नहीं कि कोई उनकी जगह की अच्छी तरह से भरपाई कर पाने में सक्षम है.

पहले सुरेश रैना और अब विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को निराश किया. रोहित शर्मा को अब अगले सप्ताह मौका मिल सकता है और वह नए खिलाडिय़ों में अविश्वास को गलत ठहराने की कोशिश करेंगे. इन युवा खिलाडिय़ों को तैयार होने के लिए पर्याप्त मौका दिया गया. उन्होंने टेस्ट कैप पहनने से पहले काफी एकदिवसीय मैच खेले लेकिन तब भी वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. रैना ने पहला टेस्ट मैच खेलने से पहले 98 एकदिवसीय मैच खेले. उन्होंने अब तक 15 टेस्ट खेले हैं जिनमें वह 29.58 की औसत से 710 रन ही बना पाए हैं. वहींकोहली को 59 वनडे खेलने के बाद टेस्ट खेलने का मौका मिला लेकिन वह 6 मैच में 21.27 की औसत से 234 रन ही बना पाए हैं.

रोहित भी अभी तक 72 एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं. उनकी असफलता का कारण तेज और उछाल वाली गेंदों पर बैकफुट पर जाकर नहीं खेल पाना रहा है. उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर फ्रंट फुट पर जाकर शाट मारना आसान होता है. विदेशी पिचों पर घुटने की ऊंचाई से अधिक की उछाल होती है और उनके पास समानान्तर शाट खेलने के लिए तकनीकी दक्षता नहीं है. इसका परिणाम है कि वे असफल हो रहे हैं. अधिकतर विशेषज्ञों का मानना है कि ट्वेंटी-20 और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में लगातार हिटिंग करने से वे टेस्ट क्रिकेट की असली परीक्षा में खरे नहीं उतर पा रहे हैं.  पूर्व भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर का मानना है कि इससे युवा बल्लेबाजों के बल्ले की तेजी बढ़ गई है और वे उस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं कि गेंद बल्ले पर आए और वह उसे हल्के हाथों से खेले. भारतीय परिस्थितियां भी बल्लेबाजों के विकास के अनुकूल नहीं हैं. रणजी ट्राफी की पिचें निर्जीव होती हैं. इसके अलावा 80 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्वदेश में खेला जाता है तथा काफी एकदिवसीय मैच खेल जा रहे हैं. इसके साथ ही आईपीएल भी खेला जा रहा है.

जो भी कोच हैं वे युवा खिलाडिय़ों को यह नहीं बताते कि उन्हें अपनी तकनीक सुधारने के लिए गेंदों को रक्षात्मक तरीके से खेलकर रोकना है. कोई भी जल्द से जल्द पैसा जुटाना और नाम कमाना चाहता है. पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने बताया कि जब वह नेट्स पर हवा में शाट खेलने का प्रयास करते थे तो उनकी कलाई पर चोट पड़ जाती थी. कोच भी मानते हैं कि भारतीय पिचों पर ऐसे शाट खेले जा सकते हैं लेकिन उछाल वाली पिचों पर ऐसा संभव नहीं है.
कुछ पूर्व भारतीय बल्लेबाजों ने भी बताया कि किस तरह से उन्हें लाफ्टेड शाट खेलने पर बल्ला सिर के ऊपर उठाकर पूरे मैदान का चक्कर लगाने की सजा दी जाती थी. आस्ट्रेलिया के वर्तमान कप्तान और सिडनी में तिहरा शतक जडऩे वाले माइकल क्लार्क अच्छे उदाहरण हैं. क्लार्क ने कहा कि उन्होंने आईपीएल और ट्वेंटी-20 बिग बैश में खेलने से इंकार इसलिए किया क्योंकि वह अच्छा बल्लेबाज बनना चाहते थे. क्लार्क ने कहा, मैंने ट्वेंटी-20 को छोड़कर तथा वनडे और टेस्ट मैचों पर ध्यान केंद्रित करके अच्छा फैसला किया. मुझे लगता है कि मैंने अपने खेल में सुधार किया और वैसा खिलाड़ी बना जैसा कि मैं संभवत: बन सकता था. यह टीम इंडिया के भविष्य के लिए एक बड़ा सवाल है कि क्या दिग्गज खिलाडिय़ों की छत्रछाया में ही उन्हें आगे की नींव रखनी है या यह सोचना है कि उनके मौजूदा तीन महान खिलाडिय़ों के बगैर भी वो विदेशी टीमों को अपने और उनके,दोनों के घर में हराने की क्षमता रखते हैं. जाहिर तौर पर आज टीम इंडिया के पास एक ड्रीम बैटिंग आर्डर है लेकिन अब लगातार 6 टेस्ट मैचों में हार के बाद भविष्य के सचिन, द्रविड़ और लक्ष्मण जल्द ढूंढने का अलार्म बज चुका है.

पर्थ में रोहित, विराट दोनों खेलें तो अच्छा

नई दिल्ली, 8 जनवरी. भारत के लिए 40 टेस्ट खेलने वाले गायकवाड ने कहा कि मध्यक्रम के बल्लेबाज रोहित शर्मा को पर्थ में आगाज का मौका दिया जाना चाहिए. साथ ही चयनकर्ताओं को ख्रराब फॉर्म से जूझ रहे विराट कोहली को अपनी लय हासिल करने के लिए और मौका देना चाहिए. ऐसा नहीं है कि केवल विराट खराब प्रदर्शन कर रहे हैं. आस्ट्रेलिया में तो सभी जुझते दिखाई दे रहे हैं. अगर आप विराट को ड्रॉप करते हैं तो इसका मतलब हुआ कि आप उनका मनोबल तोड़ रहे हैं. आप अचानक तीनों सीनियर खिलाडिय़ों को एक साथ बाहर नहीं कर सकते हैं.

क्योंकि युवा केवल सीनियर्स के साथ रहने से काफी कुछ सीखते हैं. लिहाजा बारी-बारी से उन्हें बाहर बैठाना चाहिए. युवाओं को मिले मौका गायकवाड के इस दृष्टिकोण का समर्थन पूर्व मुख्य चयनकर्ता किरन मोरे ने भी किया है. बकौल मोरे, मैं पर्थ में विराट और रोहित दोनों को खेलते हुए देखना चाहता हूं. उनमें काफी टैलेंट हैं और उन्हें मौका दिया जाना चाहिए. 23 वर्षीय कोहली भारतीय वन-डे टीम के नियमित सदस्य हैं. उन्होंने अपने कैरियर के छह टेस्ट मैचों में 234 रन बनाए हैं, जिनमें आस्ट्रेलिया में उनकी चार पारियों में 43 रन भी शामिल हैं. पिछले साल विंडीज दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें इंग्लैंड दौरे से बाहर कर दिया गया. फिर आप उनसे विदेशी धरती पर कैसे उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं. अगर आप युवाओं से उम्दा प्रदर्शन चाहते हैं तो उन्हें मौका देना ही होगा.

बाहर हों लक्ष्मण

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर संजय मांजरेकर भी रोहित शर्मा को टीम में खेलते हुए देखना चाहते हैं लेकिन लक्ष्मण की जगह पर. इसके बावजूद कि इस स्टायलिश बल्लेबाज ने सिडनी टेस्ट की दूसरी पारी में पचासे ठोके हों. बकौल मांजरेकर- ‘वीवीएस लक्ष्मण को बाहर करना चाहिए और उनकी जगह पर अगले टेस्ट में रोहित को लेना चाहिए. आपको दीर्घकालीन सोचना होगा. लिहाजा विराट अंतिम एकादश से बाहर नहीं करना चाहिए.’

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