सरकार ने बताया विदेश में जमा है 104 अरब डॉलर

नई दिल्ली। काले धन पर बहुप्रतीक्षित श्वेत पत्र सरकार ने सोमवार को संसद में पेश कर दिया। इसमें किसी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है लेकिन काले धन की समस्या से निपटने के लिए लोकपाल और लोकायुक्त के गठन की मजबूत पैरवी की गयी है।

सरकार की ओर से वित्त मंत्री ने कहा कि विदेशों में भारत का 104 अरब डॉलर का कालाधन जमा है। कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों और विश्व समुदाय के दबाव से काले धन की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा लोकसभा में पेश श्वेत पत्र में देश के भीतर और बाहर काले धन को लेकर सरकारी आकलन भी नहीं पेश किया गया है हालांकि इसमें अन्य एजेंसियों के आकलन जरूर दिये गये हैं। श्वेतपत्र में वित्तीय अपराध से तेजी से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का जिक्र है और अपराधियों को कडे दंड की बात कही गयी है। डेबिट और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए श्वेत पत्र में कर रियायतों का प्रस्ताव किया गया है ताकि लेनदेन पर नजर रखी जा सके।

लोकपाल-लोकायुक्त जरूरी

केन्द्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त बनने चाहिए ताकि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच तेजी से हो सके और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। श्वेत पत्र में यह भी बताया गया है कि सरकार की कालेधन के बारे में क्या नीति है और इस समस्या से निपटने के लिए क्या प्रशासनिक उपाय किए जा रहे हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि सरकार की क्या नीति है और काले धन को बाहर लाने के लिए सरकार ने अभी तक क्या कदम उठाए हैं और उनके नतीजे क्या रहे हैं। श्वेत-पत्र में कहा गया है कि काले धन का असर हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीति जीवन पर पड रहा है। सरकार की विभिन्न संस्थाएं भी इस असर से अछूती नहीं रही हैं।

प्रशासनिक उपायों की असफलता और पूरी व्यवस्था में भ्रष्टाचार से आम गरीब आदमी पर भी बेहद असर पड रहा है। वित्त मंत्री ने कहा है कि समग्र विकास की नीति इस बात पर निर्भर करती है कि हम एक समाज के रूप में भ्रष्टाचार की बुराई को समाप्त करने और काले धन की जडों पर प्रहार करने में कितनी क्षमता दिखाते हैं। मुखर्जी ने कहा कि इस दिशा में प्रयास करते हुए हमें अधिक पारदर्शक होना होगा तथा अपने आर्थिक प्रबंध इस तरह से करने होंगे कि उनके नतीजे दिखाई दें। श्वेत पत्र में कहा गया कि भारत ने उन देशों में व्यापार और लेन-देन की व्यवस्था का हमेशा विरोध किया है, जो अपने यहां करों में छूट देते हैं। भारत का हमेशा यह विचार रहा है कि भारत के विदेशी निवेशक या तो भारत में या फिर अपने देश में कर अदा करें। देश या विदेश में कर से बचने की किसी भी व्यवस्था का भारत समर्थन नहीं करता। ऐसी अस्पष्ट व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बन्द हो।

उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकार ने पांच विधेयक प्रस्तुत किए। लोकपाल विधेयक, न्यायिक जवाबदेही विधेयक, भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वालों के लिए व्हिसल ब्लोअर बिल, शिकायत निवारण विधेयक और सरकारी खरीद को नियमित तथा पारदर्शक बनाने के लिए रखे गए विधेयक का मकसद इसी दिशा में कदम उठाना था। ये सभी विधेयक संसद में विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन हैं। 2012 के वित्त विधेयक में भी कुछ उपाय किए गए थे। जीएएआर की व्यवस्था भी कर छूट वाले देशों में विभिन्न रियायतों को बन्द करने के लिए की जा रही है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि स्विट्जरलैंड के बैंकों में 2006 में भारतीयों का तेईस हजार तीन सौ तेहत्तर करोड रूपया जमा था, लेकिन 2010 में यह 9 हजार दो सौ पिचानवें करोड रूपये रह गया। 2006 से 2010 के बीच स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा काले धन में चौदह हजार अठहतर करोड रूपये की कमी आई है।

लोकपाल बिल पर हंगामा

शीत सत्र में लाने का प्रस्ताव
संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान लोकपाल विधेयक पास होने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। बहुत इंतजार के बाद राज्यसभा में इस विधेयक को पेश तो कर दिया गया लेकिन इसके पेश होते ही इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने और तीन माह बाद शीत सत्र में पेश करने का प्रस्ताव सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने रख दिया। फिलहाल नरेश अग्रवाल का प्रस्ताव माना जाए या खारिज किया जाए इसपर राज्यसभा में हंगामा जारी है। कल यानी मंगलवार को बजट सत्र का आखिरी दिन है। विधेयक में संशोधन किए जाने के बावजूद कुछ बिंदुओं पर विवाद बरकरार है। उदाहरण के लिए, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को अब भी इस बात को लेकर आपत्ति है कि  सीबीआई को सरकार से स्वतंत्र नहीं बनाया जा रहा। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्री वी. नारायणसामी तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने विधेयक पर सहमति बनाने की कोशिशों के मद्देनजर सोमवार सुबह राज्यससभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली से सोमवार को मुलाकात की, लेकिन सहमति की कोशिशें नाकाम रहीं।

टीम अन्ना ने की आलोचना

वहीं, टीम अन्ना ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसे में जबकि संसद की कार्यवाही समाप्त होने में केवल दो दिन बचे हैं, सरकार केवल खानापूर्ति करने के लिए इसे राज्यसभा में पेश करने जा रही है। टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने ट्विटर पर लिखा, नया विधेयक लोगों को गुमराह करने, खानापूर्ति करने और विपक्षी दलों पर जिम्मेदारी थोपने के उद्देश्य से पेश किया जा रहा है।

निराशाजनक दस्तावेज

काले धन पर सरकार द्वारा सोमवार को संसद में पेश किए गए बहुप्रतीक्षित श्वेतपत्र को विपक्षी भाजपा ने निराशाजनक दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसमें आवश्यक चीजें छिपाई गई हैं, और अनावश्यक चीजों को पेश किया गया है। भाजपा नेता व पूर्व वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि कालेधन पर बहुप्रतीक्षित श्वेतपत्र एक निराशाजनक दस्तावेज है। यह हमारे नागरिकों को देश के सामने समस्या के रूप में खड़े इस तरह के प्रश्नों पर कोई संदेश देने में विफल है। सिंह ने श्वेतपत्र की कुछ खामियां गिनाते हुए कहा कि सरकार ने न तो इस रिपोर्ट में कोई गणित या आंकड़ा दिया है, और न ही विदेशी बैंकों में काला धन रखने वाले खातेदारों का ब्यौरा दिया है। उन्होंने कहा कि 2006 में काले धन का जो आंकड़ा था, उसके मुकाबले 2010 का आंकड़ा 14 हजार करोड़ रुपये की कमी दर्शाता है।

सरकार ने यह भी नहीं बताया कि यह पैसा भारत आया या कहीं और गया। सिंह ने कहा कि सरकार जब तक इन बातों पर स्पष्टीकरण नहीं देती, तब तक यह दस्तावेज असंतोषजनक है। भाजपा नेता ने कहा कि श्वेतपत्र का उद्देश्य दूध का दूध, पानी का पानी करना होता है, लेकिन इस श्वेतपत्र में कई चीजें ऐसी हैं, जो आसानी से इंटरनेट पर उपलब्ध हैं और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा रखा गया यह दस्तावेज नॉन पेपर है जिसमें केवल पानी ही पानी है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज सरकार द्वारा हथियारों की खरीद व व्यापार के माध्यम से भूमि हस्तांतरणों पर लगाई जाने वाली अनुचित स्टांप ड्यूटी व देश में भ्रष्ट राजनीति द्वारा बने माहौल के जरिए कालेधन के निर्माण के संबंध में कुछ स्पष्ट नहीं करता।

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