25 साल बाद भी बोफोर्स पर भ्रम की स्थिति

नई दिल्ली, 26 अप्रैल. बोफोर्स मुद्दे पर असहज मनमोहन सरकार को विपक्ष ने घेरना शुरू कर दिया है। संसद में भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि इस पहलू की जांच होनी चाहिए कि आखिर अमिताभ बच्चन का नाम इसमें कैसे और क्यों घसीटा गया? फिर मामले के अहम आरोपी क्वात्रोच्चि को दिल्ली से भागने क्यों दिया गया? उल्लेखनीय है कि स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन ने दावा किया था कि बोफोर्स मामले में अमिताभ बच्चन को फंसाया गया था।

यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए जसवंत सिंह ने बोफोर्स खुलासे को गंभीर बताते हुए कहा कि भले ही इस खुलासे में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दलाली के आरोप से बरी किया गया है, लेकिन इस मामले के मुख्य आरोपी ओतावियो क्वात्रोच्चि के दलाली लेने की बात कही गई है। लगभग 25 साल बाद भी इस बोफोर्स मामले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

बोफोर्स मामले का कांटा निकालना जरूरी
सिंह ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि बोफोर्स मामले का कांटा निकालना जरूरी है और जबतक इसे नहीं निकाला जाएगा तबतक जहर फैलता रहेगा। इस खुलासे के बाद पांच पहलू सामने आए हैं जिसकी जांच होनी चाहिए। पहला यह कि इस मामले की जांच के लिए स्वीडन गई सीबीआई टीम ने उनलोगों से मुलाकात क्यों नहीं की जिन्होंने वहां इसकी जांच की थी? यह जांच भी हो कि आखिर क्वात्रोच्चि को लंदन के बैंक से पैसा निकालने के लिए सीबीआई ने क्लीन चिट क्यों दी? फिर उसके खिलाफ जारी रेडकॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे ब्राजील में गिरफ्तार क्यों नही कराया गया और अंत में नोटिस वापस क्यों लिया गया?

राज्य सभा में भी भारी हंगामा
बोफोर्स मसले खुलासे को लेकर नए तथ्यों की जांच तथा चर्चा की मांग को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही तीसरी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले पूर्वाह्र 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उसी मुद्दे पर हंगामे के कारण पहले 15 मिनट और बाद में 12 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। इस वजह से प्रश्नकाल नहीं हो सका था।

देश की साख पर बट्टा लगा
सदन की कार्यवाही तीसरी बार 12 बजे शुरू होते ही विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि बोफोर्स मामले में तथ्यों को तोडऩे-मरोडऩे के कारण यह मामला 25 वर्षों से लंबित है। इससे देश की साख पर बट्टा लगा है। इस मामले में वर्ष 1990 में केंद्र सरकार को कुछ दस्तावेज मिले थे और 1999 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। जेटली ने कहा कि इस मामले में जो नए तथ्य सामने आए है उसकी गंभीरता से जाच होनी चाहिए। उन्होंने रक्षा सामग्री खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के आरोपी को देश से बाहर निकलने का मौका दिया गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी एवं समाजवादी पार्टी के मोहन सिंह का कहना था कि बोफोर्स मामले में जो नए तथ्य सामने आए हैं उनकी जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने कहा कि मौजूदा विपक्ष के नेता 1990 में अतिरिक्त महान्यायवादी थे उस समय भी इस मामले का खुलासा नहीं हो सका। इसपर पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक शुरू हो गई और पीठासीन अधिकारी प्रो. पीजे कुरियन ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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