बीसीसीआई ने कपिल को भुलाया

नयी दिल्ली, 22 मई. अपने बागी तेवरों के कारण अक्सर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड  की आंखों की किरकिरी बने रहने वाले विश्व कप कप विजेता पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव को एक बार फिर बीसीसीआई के सौतेले व्यवहार का सामना करना पड़ा है.

बोर्ड ने आईपीएल-5 के प्ले आफ के दौरान पूर्व टेस्ट क्रिकेटरों को आमंत्रित किया है और एक भी टेस्ट खेल चुके क्रिकेटर को बोर्ड की ओर से सम्मान चैक दिये जाने हैं लेकिन टेस्ट इतिहास में भारत की ओर से सर्वाधिक विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज कपिल देव का नाम उन आमंत्रित खिलाडिय़ों की सूची से गायब है जिन्हें प्ले आफ के दौरान सम्मानित करने की घोषणा बीसीसीआई ने की थी. कपिल के समकालीन सुनील गावस्कर और रवि शास्त्री तथा उनके बाद क्रिकेट खेले अभय कुरुविला जैसे क्रिकेटर तो इस सूची में शामिल हैं लेकिन कपिल का नाम सिरे से नदारद है. हालांकि बोर्ड ने पहले ही स्पष्टीकरण दिया है कि सभी पूर्व खिलाडिय़ों को स्टेडियम में बुलाना संभव नहीं है इसलिए कुछ को उनके हिस्से की सम्मान राशि का चैक उनके घर भेज दिया जाएगा लेकिन सवाल यह उठता है कि बुलाये गये खिलाडिय़ों को वरीयता देने का आधार क्या है.

434 टेस्ट विकेट लेकर न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली का रिकार्ड तोडऩे से पहले कपिल भारत की पहली विश्व विजेता टीम का नेतृत्व कर चुके थे और बतौर आलराउंडर आज भी उनकी मिसाल दी जाती है. ऐसे में किसी भी असमर्थता के बहाने कपिल को नजरअंदाज करना गले से नहीं उतरता है.कपिल सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने के मामले में भारत में शीर्ष पर हैं तो दुनिया में भी ज्यादा पीछे नहीं हैं. टेस्ट इतिहास में केवल दो तेज गेंदबाज वेस्टइंडीज के कोर्टनी वाल्श 519 और आस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्रा 563 ही कपिल से ज्यादा विकेट हासिल कर पाये हैं.

बीसीसीआई ने पूर्व वनडे खिलाडिय़ों को भी जिन्होंने कम से कम एक टेस्ट खेला हो, उनके तीन वनडे को एक टेस्ट के बराबर तदनुसार सम्मान राशि देने की बात कही है और कपिल ने ही 1983 के विश्व कप से भारत की पहचान वनडे की दुनिया में स्थापित करवायी थी. अक्सर कपिल भारतीय क्रिकेट के कुप्रबंधन को लेकर बीसीसीआई पर निशाना साधते रहे हैं. क्या उन्हें इसी बात का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है. या फिर इस बात का कि वह कुछ वर्ष पहले कथित बागी इंडियन क्रिकेट लीग से जुड़े थे. मसला चाहे जो भी लेकिन भारतीय टेस्ट जगत के इतने बड़े जलसे से कपिल का नदारद रहना कहीं से न्यायोचित नहीं दिखता है.

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