• भारत-इंग्लैंड एक दिवसीय सीरीज

लंदन, 30 सितंबर. इंग्लैंड ने भले ही घरेलू सीरीज के दौरान क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारत को करारी मात दी हो लेकिन वनडे कप्तान एलेस्टर कुक का कहना है कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम को अगले महीने उन्हीं की सरजमीं पर वनडे सीरीज में हराना काफी मुश्किल होगा. कुक ने कहा कि भारतीय टीम इंग्लैंड से हार का बदला लेने के लिए बेताब होगी.

उन्होंने कहा जाहिर तौर पर वहां (भारत में जीतना) मुश्किल होगी. उन्हें खुद को साबित करना है और परिस्थितियां निश्चित रूप से उनकी मददगार होंगी. मुझे इस बात पर शक है कि हम खेलने वाले विकेट पर ज्यादा हरी घास देख पाएंगे.उन्होंने कहा कि वे अपने देश में विश्व चैंपियन हैं और बदला लेने के लिए बेताब होंगे. अब यह हमारे ऊपर है कि हम परिस्थितियों से कैसे निबटते हैं और हम कैसे खेलते हैं. अच्छे खिलाड़ी परिस्थितियों के अनुकूल होकर खेलते हैं. हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो इंग्लैंड की जर्सी में भारत में कभी नहीं खेले हैं. कुक ने कहा कि सीखने के लिए काफी कुछ होगा लेकिन वे इससे सामंजस्य बिठा लेंगे. भारत को हाल में इंग्लैंड के खिलाफ पांच वनडे मैचों की सीरीज में 0-3 से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी जबकि एक मैच बारिश के कारण रद और एक अन्य मैच टाई रहा था.

इससे पहले भारत का टेस्ट सीरीज में 0-4 से सूपड़ा साफ हुआ था. यह बात जानने के बावजूद कि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह जैसे प्रमुख खिलाड़ी चोटों की वजह से शुरुआती दो वनडे मैचों में टीम इंडिया का हिस्सा नहीं होंगे. कुक ने स्वीकार किया कि भारत को उसी की सरजमीं पर हराना मुश्किल होगा. कुक के लिए बतौर कप्तान और बतौर खिलाड़ी भारत का दौरा निश्चित रूप से अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है.

क्योंकि इंग्लैंड ने वर्ष 1985 के बाद से भारत को उसकी सरजमीं पर किसी वनडे सीरीज में नहीं हराया है और अंतिम दो सीरीज में इस टीम को 5-1 और 5-0 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. कुक ने हालांकि अपने अच्छे प्रदर्शन से टीम में विश्वास जताया है. उन्होंने गर्मियों के सत्र में खेले गए वनडे मैचों में 58 के औसत से रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 95 का रहा है. उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए इससे बेहतर नहीं हो सकता था. कुक ने कहा कि बल्लेबाज के तौर पर मैंने हमेशा कहा कि मैं इंग्लैंड के लिए वनडे खेल सकता हूं. कप्तानी के बारे में उन्होंने कहा कि टीम के कप्तान के रूप में आदी होने में आपको समय लगता है और कोच तथा खिलाडिय़ों को आपके आदी होने में भी समय लगता है.

नए नियमों के साये में खेलेंगे

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने मई में हुए वार्षिक सम्मेलन में मुख्य कार्यकारियों की समिति ने रनर की व्यवस्था समाप्त करनेए एकदिवसीय में प्रत्येक छोर से नयी गेंद का इस्तेमाल करने और बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी पावर प्ले लेने के समय को निर्धारित करने की सिफारिश की थी. ये सिफारिशें आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड द्वारा मंजूर किये जाने के बाद एक अक्टूबर से प्रभावी हो जाएंगी.

इसका मतलबए भारत और इंग्लैंड के बीच 14 अक्टूबर से शुरू होने वाली एकदिवसीय श्रृंखला आईसीसी के नए नियमों के तहत खेली जाएगी. एकदिवसीय में प्रत्येक छोर से नयी गेंद का इस्तेमाल. अब से एकदिवसीय क्रिकेट में प्रत्येक पारी में एक के बजाए दो गेंदें उपयोग में लायी जाएंगी. यह नियम सिर्फ एकदिवसीय के लिए है और ट्वेंटी-20 में पहले की तरह एक ही गेंद इस्तेमाल की जाएगी. धीमी ओवर गति पर कड़ी सजा. टीमों के कप्तान एक वर्ष के अंदर तीन बार धीमी ओवर गति के कारण निलंबित कर दिये जाते थेए लेकिन अब ऐसा दो बार होने के बाद ही उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा.

क्षेत्ररक्षक को रोका तो होंगे आउट. खेल के तीनों प्रारूप यानी एकदिवसीय, टेस्ट और ट्वेंटी-20 में रन आउट होने का नया नियम लागू होगा. यदि गेंदबाजी कर रही टीम को ऐसा लगता है कि विकेटों के बीच रन लेते समय बल्लेबाज ने क्षेत्ररक्षक को स्टंप पर हिट करने में बाधा पहुंचायी है तो वो इसके लिए अंपायर के पास अपील कर सकती है. एक ओवर में दो बाउंसर की छूट. अब गेंदबाज हरेक ओवर में एक के बजाय दो बाउंसर फेंक सकते हैं. पहले सिर्फ एक ही बाउंसर फेंकने की छूट थी. दूसरी बाउंसर फेंकने पर नो बॉल दे दिया जाता था.

अब 16वें ओवर के पहले या 40वें ओवर के बाद कोई पावर प्ले नहीं.

आईसीसी ने पावर प्ले के नियमों में भी थोड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक पावर प्ले 20 ओवरों का ही होगा. पहले 10 ओवर का पावर प्ले अनिवार्य होगा. लेकिन अगले 5.5 ओवरों के दो पावर प्ले दोनों टीमों को समय सीमा में लेना होगा. कोई भी टीम पावर प्ले 16वें ओवर से पहले और 40वें ओवर के बाद नहीं ले सकेगी. यानी इन 25 ओवरों में ही बल्लेबाजी या गेंदबाजी पावर प्ले का इस्तेमाल टीमें अपने हिसाब से कर सकेंगी. इसका मतलब अंतिम ओवरों में मिलने वाला एडवांटेज खत्म हो जाएगा.

घायल होने वाले खिलाडिय़ों को रनर नहीं. क्रिकेट में रनर का कॉन्सेप्ट भी आईसीसी ने समाप्त कर दिया है. अब यदि कोई बल्लेबाज खेलते समय घायल हो जाता है, तो उस रन लेने के लिए रनर की मदद नहीं मिल सकेगी. किसी भी बल्लेबाज को तब तक रनर नहीं दिया जाएगा जबतक टीम के 9 विकेट ना गिर गए हों. घायल बल्लेबाज रिटायर्ड हर्ट लौट सकता है या फिर थोड़ी देर आराम कर वापस बल्लेबाजी के लिए आ सकता है. साथ ही अब एकदिवसीय में यदि कोई क्षेत्ररक्षक घायल होकर या किसी अन्य कारण से मैदान से बाहर जाता है तो इस पेनल्टी टाइम की गणना कर उसके गेंदबाजी या बल्लेबाजी करने के समय में जोड़ा जाएगा. यह नियम अब तक सिर्फ  टेस्ट में लागू था.

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