एनसीटीसी पर गैर कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को घेरा

सुदृढ़ आंतरिक सुरक्षा के लिये राज्यों को मजबूत बनाएं

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्यों को मजबूत किये बिना आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नीति-निर्धारण एवं नये कानून बनाने से पहले राज्य सरकारों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिये। साथ ही केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा प्रदेश के गृह मंत्रियों के साथ प्रत्येक तिमाही में एक बार आंतरिक सुरक्षा संबंधी खुली और गंभीर चर्चा की जाना चाहिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य-स्तरीय आतंकवाद निरोधी इकाइयों को प्रभावी बनाने और उनके उन्नयन के लिये प्रथम 5 वर्षों में उनके गठन, प्रशिक्षण एवं संसाधनों पर आने वाले व्यय का वहन केन्द्र सरकार द्वारा किया जाये। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के विशेष शाखा प्रशिक्षण स्कूल को सुदृढ़ कर इसे अकादमी का दर्जा दिया जाये। उन्होंने मध्यप्रदेश के 9 जिलों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित घोषित किये जाने का भी आग्रह किया। श्री चौहान ने आतंकवादी गतिविधियों एवं संगठित अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही के लिये राज्य विधानसभा द्वारा पारित मध्यप्रदेश आतंकवादी उच्छेदक गतिविधि तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 को शीघ्र स्वीकृत करने का आग्रह केन्द्र से किया  प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार पर आंतरिक सुरक्षा संबंधी नीतियों पर राज्यों की अनदेखी करके गैर सरकारी संस्थाओं की सलाह पर कानून बनाने का आरोप लगाया।

शिवराज सिंह ने कहा कि संघीय ढांचे के विरूद्ध केंद्रीयकरण की दिशा में ऐसे कदम भारतीय लोकतंत्र में इससे पहले कभी नहीं उठाए गए। चौहान ने केंद्र की मंशा पर संदेह व्यक्त किया और तीखे कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि नीतिनिर्धारण एवं नए कानूनों को बनाने से पहले राज्य सरकारों से किसी भी प्रकार का विचार विमर्श नहीं किया जाता बल्कि मसौदा तैयार करके राज्यों के पास मात्र टिप्पणी के लिए भेज दिया जाता है। नीति निर्धारण एवं कानून बनाने में जनता की प्रत्यक्ष या परोक्ष भागीदारी होनी चाहिए। अभी राज्य सरकारों को हाशिये पर डालकर स्वयंसेवी संस्थाओं एवं व्यक्तियों से मसौदा प्रस्ताव मंगाये जा रहे हैं। देश में आंतकवाद और वामपंथी उग्रवाद का खात्मा दोहरी चुनौती है। चौहान ने कहा कि इससे केंद्र सरकार की मंशा पर संदेह होना स्वाभाविक है। यदि वह राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सोचती है तो उसे राज्य सरकारों की आतंकवाद विरोधी मुहिम और उससे जुड़ी संस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम नियमित रूप से करना चाहिए। शिवराज ने कहा कि ऐसा प्रत्येक प्रयास केंद्रीयकरण की तरफ एक बढ़ता कदम है और यह संघात्मक ढांचे की भावना के विपरीत है।

राज्यों की शक्ति छीनना चाहता है केंद्र: मोदी

गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि वह राज्यों की शक्ति कम करने के प्रयास में है। आंतरिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे पर राज्य सरकारों की अनदेखी कर केंद्र मनमाने तरीके से फैसला ले रहा है।

राष्ट्रीय सहमति बने

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) की स्थापना के लिए राष्ट्रीय सहमति आवश्यक है, जिससे देश के संघीय ढांचे पर कोई प्रतिकूल असर नही पडे। नक्सलवाद और आतंकवाद को केंद्र एवं राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से ही निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से आतंकवाद एवं नक्सलवाद से कड़ाई से निपटने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि इसके लिए एनसीटीसी की स्थापना के वास्ते राष्ट्रीय सहमति आवश्यक है. जिससे देश के संघीय ढांचे पर कोई प्रतिकूल असर नही पड़े।

‘केंद्र और राज्य की एजेंसियों में टकराव नहीं’

एनसीटीसी को लेकर संप्रग के घटक तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी सहित कई मुख्यमंत्रियों के निशाने पर आए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच कोई टकराव नहीं है और आतंकवादियों से निपटने के लिए वे मिलकर काम करते हैं। आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में चिदंबरम ने कहा कि 2011 में 18 आतंकवादी माडयूल ध्वस्त किए गए और 53 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2012 के पहले तीन महीनों में तीन माडयूल ध्वस्त किए गए और 11 लोग गिरफ्तार हुए। उन्होंने कहा कि मैं इस सचाई को रेखांकित करना चाहता हूं कि इनमें से आधे माडयूल केन्द्रीय एजेंसियों और संबद्ध राज्य पुलिस के संयुक्त प्रयासों से ध्वस्त किए गए। चिंदबरम ने कहा कि वे (राज्य और केन्द्र की एजेंसियां) मिलकर काम करते हैं, एक दूसरे से सलाह मशविरा करते हैं। खुफिया जानकारी का आदान प्रदान करते हैं और जब जरूरी होता है संदिग्ध को पकडने के लिए संयुक्त अभियान चलाते हैं। मेरे विचार से आतंकी माडयूल ध्वस्त करने के लिए हुए इस तरह के शांत और अदृश्य काम की उसी तरह सराहना होनी चाहिए जैसे आतंकवादी हिंसा से जुडे मामलों का हल करने के लिए होती है।

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