मोहर्रम के विशाल परम्परागत जुलूस में शामिल होंगे लाखों लोग

जुलूस में सैकड़ों ताजिये, बुर्राक, सवारिया, अलम मुबारक, अखाड़े मातमी जत्थे, ढोल, नगाड़े भी होंगे

भोपाल, 29 नवंबर. आल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के तत्वावधान में हर वर्ष की भांति इस बार भी पैगम्बर ए इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) साहेब के प्यारे नवासे हजरत इमाम हुसैन साहब की यादगार मोहर्रम यौम ए आशूरा पर विशाल जुलूस 6 दिसंबर को निकाला जाएगा. जुलूस में आगे-आगे परचम ए इस्लाम, अलम ए मुबारक तथा मातमी जत्थे होंगे. आशिकान ए हुसैन खुनी मातम भी करेंगे. जुलूस में चौराहों पर जगह जगह उलेमाओं की तकरीरे भी होंगी.

आल इंडिया मुस्लिम त्यौहार क मेटी के जिला अध्यक्ष मकबूल अहमद मंसूरी चिश्ती ने बताया है कि डा. औसाफ शहमीरी खुर्रम की कयादत में पूर्ण श्रद्घा एवं अकीदत के साथ मोहर्रम का पर्व मनाया जा रहा है. शहादत की रात में शहर भर में ताजिये और सवारियों गश्त करेंगी तथा प्रमुख दरगाहों, खानकाहों एवं इमामबाड़ो पर सलामी दी जाएगी सभी ताजिये और सवारियां जामा मस्जिद चौक में जमा होंगे. उन्होंने बताया कि देश में सांजी परम्परा यानि गंगा जमुना तहजीब की रिवायत को जारी रखते हुए इस बार भी मोहर्रम के जुलूस में मुस्लिम समाज के अनेक ताजियों सहित अनेक समाजों के ताजिए भी जुलूस में विशेष रूप से शामिल रहेंगे.

विसर्जन के पुख्ता इंतेजामात

मकबूल अहमद के अनुसार मोहर्रम के परम्रापगत विशाल जुलूस में सैकड़ों आकर्षक ताजियों के दर्शनार्थ लाखों लोगों के आने की उम्मीद का दृष्टिïगत रखते हुए इस बार कदीमी प्राचीन करबला मैदान एवं नवीन ताजिया घाट गिन्नौरी परिघाट एवं प्राचीन ताजियागाह शिरीन नदी कोहेफिजा रोड पर भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से कमेटी की जानिब से बड़े पैमाने पर व्यवस्थाएं की गई है. सभी ताजिये , सवारियों अखाड़े, अलम मुबारक पहले प्राचीन करबला मैदान ही पहुँचेंगे और अपनी-अपनी मजहबी रसूमात पूरी करेंगे और इसके बाद ही सभी अपनी-अपनी अकीदत के अनुसार विसर्जन करेंगे. मोहर्रम का चांद नजर आते ही राजधानी की मस्जिद सलैनी अशोका गार्डन सहित अनेक खानकाहों के अलावा सभी इमामबाड़ो हुसैनी टेकरी शरीफ हथाई खेड़ा सहित सभी अजाखानों इमामबाड़ो और प्राचीन करबला मैदान परम्परागत मजलिसों का सिलसिला चल रहा है. लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, हैदराबाद, कलकत्ता, जावरा इत्यादि अनेक शहरों के प्रमुख उलेमा मजलिसों को संबोधित कर करबला की लोमहर्षक घटना का वर्णन कर रहे है. उन्होंने बताया कि 8 दिसंबर को प्राचीन करबला मैदान में परम्परागत मजलिस ए सोयम होगी जिसमें हजारों श्रद्घालु इकट्ठे होकर नियाज ए हुसैन करेंगे और लंगर खिचड़ा (भंडार), तकसीम किया जाएगा.

अंगारों की खदक में मातम

इंसानियत के अलम बरदार, शेर करबला, शहीदे आजम हजरत इमाम हुसैन की यादगार मोहर्रम श्रद्घापूर्वक मनाया जा रहा है. 6 दिसंबर को योम ए आशूरा (दस मोहर्रम) को हर साल की तरह इस साल भी मध्यप्रदेश मुस्लिम त्यौहार कमेटी के अध्यक्ष हिफ्जुर रहमान छोटेमियां के नेतृत्व में मोहर्रम का पारम्परिक जुलूस निकाला जाएगा. जिसमें अलम, ताजिए, सवारियों आदि शामिल होंगे. जुलूस में छोटे बड़े लगभग पाँच सौ ताजिये, सैकड़ों अलम, दर्जनों सवारियों तथा लाखों लोग शामिल होंगे. जुलूस में मंगलवार, बुधवारा के विशाल ताजिया सहित जल संकट के निदान के लिये बरखेड़ी का बाबा हिदायत अली का सरसों का ताजिया पर्यावरण चेतना के प्रतीक के रूप में जुलूस में मुख्य आकर्षण का केन्द्र होगा. मुम्बई के सलीम अहमद का सोने-चांदी का ताजिया बादशाह भाई शुलपुर वालों का ताजिया भी जुलूस में शामिल रहेगा. हिफ्जुर रहमान ने बताया कि ताजिए बनाने क ा काम कोई दो माह पूर्व शुरू हो चुका है. योमे आशूरा पर बोहरा ब्रादरान जुलूस मार्ग पर सबील लगाकर पानी व शरबत पिलाने का भी आयोजन करेंगे. उन्होंने बताया कि कमेटी की ओर से तथा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में खिचड़े का आयोजन भी होगा. जिसमें हजारों लोग मौजूद रहेंगे. इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न स्थानों पर भी आशिकाने हुसैन नियाज नजर और खाने आदि का आयोजन यमूम मुहर्रम से कर रहे है. यह सिलसिला मोहर्रम के आखिर तक जारी रहेगा. रहमान ने बताया कि मोहर्रम की नौ तारीख की यानी शाहदत की रात को इमामबाड़ा इरानियात स्टेशन में अंगारों की खंदक में परम्परागत मातम होगा तथा शहर के सभी इमामबाड़ों में भी मातम होता तथा करबला सहित शहर के कई स्थानों पर आग की चूलें रोशन की जायेगी.

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