महिला सुरक्षा अब यही राष्ट का एजेंडा है. केंद्र व राज्य सरकारों के समक्ष एक ही यक्ष प्रश्न है कि वह सब करना पड़ेगा जो इसके लिए जरूरी हो. तमिनलाडु में महिला मुख्यमंत्री जयललिता ने बिना केंद्र सरकार के कदमों की प्रतीक्षा किए अपने राज्य में महिला सुरक्षा सम्मान के लिए नियम घोषित कर दिए. केंद्रीय गृहमंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने राजनैतिक पार्टियों को लिखा है कि जस्टिस वर्मा कमीशन इस बारे में कानूनी अनुशंसाएं करने के लिए गठित हो चुका है जो एक महीने में रिपोर्ट देगा. इसलिए पार्टियों को उसके समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करना चाहिए. उस रिपोर्ट के बाद ही संसद सत्र बुलाना ठीक रहेगा.

राष्टपति श्री प्रणव मुखर्जी ने अपने नव वर्ष संबोधन में कह दिया कि वर्ष 2013 को महिला सुरक्षा को समर्पित किया जाए. दामिनी को उसके बलिदान के लिये संसद के केंद्रीय कक्ष में शोक सभा में श्रद्धांजलि दी गई. दामिनी या निर्भया जो भी उसका नाम हो, अब मरकर भी एक प्रतीक के रूप में जिंदा हो गई है. उसकी मौत ने न सिर्फ भारत बल्कि सारे विश्व को झकझोर दिया. आज वह विश्व चेतना बन गई है. अब समाज में संवेदना आ रही है. पाकिस्तान में एक महिला मुख्तारन पर खाप पंचायत की तर्ज पर चलने वाली कबीला पंचायत ने उस पर सामूहिक बलात्कार करने की सजा दी थी. हाल ही में मलाला नाम की एक छात्रा ने भी गोली खाकर समाज को हिला दिया.

देश में इस समय महिलाओं के उत्पीडऩ की खबरों में एकाएक वृद्धि हो गई है. ऐसा लगता है कि अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन माहौल के हिसाब से यथार्थ यह है कि अभी तक ऐसी खबरों को महत्व नहीं दिया जाता था. यह मान लिया गया था कि ऐसा चलता ही रहता है. लेकिन अब ऐसी हर घटना प्रमुखता से आगे आ रही है और लोगों में उन पर आक्रोश भी सामने आ रहा है.

लेकिन मध्यप्रदेश में इस दिशा में गंभीरता नहीं दिख रही. एक तरफ तो 1090 फोन नम्बर की 24 घंटे की महिला हेल्पलाइन शुरु कर दी और दूसरी तरफ जो कुछ लफंगे महिलाओं व लड़कियों पर फब्तियां कसते पकड़े गये, उन्हें कहीं समझाकर, कहीं उनके पालकों को बुलाकर और कुछ को उठक-बैठक लगवाकर छोड़ दिया. ऐसी कार्यवाहियां अपराध को सरसरी तौर पर लेना है. कुछ लड़के गल्र्स होस्टल के सामने से पकड़े गये थे, जो माहौल बन गया है वह ऐसी हरकतों पर पुलिस व अदालती कार्यवाही चाहता है. इस तरह सरसरी तौर पर छोड़ा जाना गलत रवैया है. उन सबको अदालत में पेश किया जाना चाहिए था.

अपराध विज्ञान यह भी मानता है कि अपराधी जीवन अवयस्क (एडोलोसेन्ट) उम्र में घर, पड़ोस व मुहल्ले में छोटी-मोटी चोरी से शुरू होता है और यौन अपराध छेडï़छाडï़ से शुरू होते हैं. यही इन अपराधों की जड़ है. यदि समाज को अपराध और यौन विकृति से मुक्त करना है, तो अवयस्क उम्र की चोरी व छेड़छाड़ पर पूरी सख्ती से कार्यवाहियां शुरू की जानी चाहिये. भोपाल में कुछ लडï़के  इस कारण भी छोड़ दिये गये कि अफसरों के लड़के थे. दिल्ली में भी प्रियदर्शनी, मट्टïू  और जर्मन युवती से दुराचार के दोनों दोषी आई.जी. स्तर के पुलिस अधिकारियों के लड़के थे. पुलिस को मुजरिम का स्टेटस नहीं देखना चाहिये. उसका कर्तव्य व दृष्टिïकोण यही होना चाहिये कि अपराध क्या किया गया है.

इस समय महिला सुरक्षा को लेकर जो वेदनापूर्ण ज्वार और आक्रोश पैदा हुआ है उसे माहौल के रूप में बराबर बनाये रखना है. आजकल युवकों में लड़कियों को परेशान करना, फब्तियां कसना, दुराचार करना उम्र का ‘एडवेंचर’ हो गया है. स्थिति के अनुरूप चोरी और छेड़छाड़ पर पालकों व पुलिस को पूरी कठोरता से कार्यवाहियां करना चाहिये अन्यथा महिलाओं को कोई सुरक्षा हासिल नहीं होगी.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: