आगरा, 20 अप्रैल. आगरा मंडल के जिला अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न होने पर उसकी ओर से कार्रवाई किए जाने के डर से यमुना की स्वच्छता के लिए अभियान शुरू कर दिया है. शुक्रवार को यमुना नदी के किनारे के घाटों से कुछ अतिक्रमण हटाया गया.

पर्यावरण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं व सुप्रीम कोर्ट की निगरानी समिति के सदस्यों की ओर से शिकायतें आने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई. शिकायत थी कि किसान बड़ी मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पानी में मिल रहा जबकि यही पानी पाइप के जरिए लोगों के घरों में पहुंचता है. आगरा नगर-निगम के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बाल्केश्वर घाट पर स्वच्छता अभियान जारी रहेगा. उत्तर प्रदेश वन विभाग ने भी नदी के किनारे हजारों पौधे रोपित करने का अभियान शरू किया है. प्रखंडीय वन अधिकारी पी.के. जानू ने कहा, ‘हम शहरी इलाके में नदी के किनारे पौधे रोपित कर रहे हैं. आप एक-दो महीने में बारिश के बाद देखेंगे कि नदी किनारे की पूरी जमीन हरी हो गई है.’ जानू ने कहा, ‘हम 2,000 से ज्यादा पौधे पहले ही रोपित कर चुके हैं, जो एक बड़ी संख्या है और आप मानसून की कुछ बारिश होने के बाद जल्दी ही इसके परिणाम देखेंगे.’

सुप्रीम कोर्ट ने वकील एम.सी. मेहता की ताजमहल के आसपास प्रदूषण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद निर्देश दिया था कि नदी किनारे के क्षेत्र में कृषि कार्य प्रतिबंधित होने चाहिए. साथ ही वहां से धोबियों व डेयरियों को हटाना चाहिए. वृंदावन के प्रसिद्ध संगीतज्ञ आचार्य टी. जैमिनी ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक पर्यावरण इंजीनियर हैं, इसलिए उन्हें यमुना नदी का पहले जैसा गौरव लौटाने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए.

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