सुप्रीम कोर्ट में होगी मैमो काण्ड की सुनवाई

इस्लामाबाद, 15 जनवरी. पाकिस्तान में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी सहित संकटग्रस्त नेताओं के भाग्य का फैसला कल होगा जब सुप्रीम कोर्ट मेमो मामले पर और रसूख वाले लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करेगा.

परेशानियों में घिरी सरकार ने समर्थन के लिए संसद का रुख किया है. समझा जाता है कि संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में उस प्रस्ताव पर कल मतदान होगा जिसमें लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व द्वारा किए गए प्रयासों पर मंजूरी और समर्थन मागा गया है. एक ओर जहा संसद इस प्रस्ताव पर विचार करेगी वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की 17 सदस्यीय पीठ रसूख वाले लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने संबंधी एक परिवाद पर सुनवाई फिर से शुरू करेगी.

कयानी ने नहीं की गिलानी की शिकायत

इस्लामाबाद. राष्ट्रपति कार्यालय ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से प्रधानमंत्री के उस बयान को लेकर शिकायत की थी जिसमें मेमोगेट कांड से निपटने को लेकर सेना की आलोचना की गई थी. इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने कहा कि ये महज अटकलों पर आधारित हैं. बाबर ने एक संक्षिप्त वक्तव्य में कहा कि सूत्रों का हवाला दिए बिना रिपोर्ट मनगढंत और अनुमान पर आधारित हैं.

जरदारी के खिलाफ फिर खुलेंगे भ्रष्टाचार के मामले

लाहौर. सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) तख्तापलट से बचने की खातिर राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने पर विचार कर रही है.

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने जरदारी और आठ हजार अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई की थी. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा वर्ष 2007 में क्षमादान के तहत लाभांवित होने वाले तीन शीर्ष नौकरशाहों को भी गिरफ्तार किया था. पीपीपी के शीर्ष नेताओं ने अपनी पिछली बैठक में इस बात को दोहराया था कि संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाने से छूट मिली हुई है. इस वजह से सरकार जरदारी के खिलाफ मनी लांड्रिंग का केस फिर से खोलने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र नहीं लिखेगी. मगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दिए जाने के बाद पीपीपी के सहयोगी दलों ने शीर्ष नेतृत्व को स्विस अधिकारियों से संपर्क करने का सुझाव दिया है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

सेना में तख्तापलट का साहस नहीं

न्यूयॉर्क, 15 जनवरी. पाकिस्तान में करीब एक सप्ताह से सेना और सरकार के बीच चल रहे तनाव के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि वहां सैनिक तख्तापलट की संभावना कम है. सेना के अधिकारियों में इस बार सरकार को उखाड़ फेंकने का साहस नहीं है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि वर्ष 1958, 1969, 1977 और 1999 में तख्तापलट कर निराशा खत्म करने वाली सेना में इस बार ऐसा करने का साहस नहीं है.

Related Posts: