• जरदारी की यात्रा पर विशेष

नई दिल्ली, 8 अप्रैल. पाक राष्ट्रपति जरदारी के दौरे की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि जरदारी के 42 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी भी शामिल हैं.

पहले रब्बानी के आने को लेकर जानकारी नहीं दी गई थी. दूसरी ओर पहले यह बताया जा रहा था कि जरदारी की दोनों बेटियां भारत आ रही हैं, पर वे नहीं आईं. दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर भारत के केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने जरदारी की अगवानी की. मनमोहन सिंह और आसिफ अली जरदारी ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों का व्यावहारिक समाधान खोजने के इच्छुक हैं. लगभग तीस मिनट की अकेले में बैठक करने के बाद दोनों नेताओं ने प्रेस बयान दिये, जिसमें उन्होंने वार्ता को लेकर संतोष व्यक्त किया. मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैंने और राष्ट्रपति जरदारी ने ऐसे द्विपक्षीय मसलों पर रचनात्मक और दोस्ताना बातचीत की है जो भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को प्रभावित करते हैं.

दोपहर करीब 12 बजकर 10 मिनट पर पालम वायुसैनिक अड्डे (तकनीकी एरिया) पहुंचने के बाद जरदारी अपने बेटे बिलावल भुटटो के साथ सीधे सिंह के सरकारी आवास सात रेसकोर्स रोड के लिए रवाना हुए. अजमेर शरीफ के दर्शन करने के लिए निजी यात्रा पर भारत पहुंचने वाले जरदारी को सिंह ने दोपहर भोज पर आमंत्रित किया था. मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैंने जरदारी की इस यात्रा का फायदा उनके साथ सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत कर उठाया और मैं इस यात्रा के नतीजे से काफी संतुष्ट हूं.Ó उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच कई मसले हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारे कई मुद्दे हैं और हम उन सभी मुद्दों का व्यावहारिक समाधान खोजने के इच्छुक हैं और यही संदेश मैं और राष्ट्रपति जरदारी देना चाहते हैं.Ó जरदारी ने कहा कि हमारी द्विपक्षीय वार्ता काफी फलदायक रही. उन्होंने उम्मीद जतायी कि सिंह से जल्द ही पाकिस्तान की सर जमीं पर उनकी मुलाकात होगी. जरदारी ने मनमोहन सिंह को पाकिस्तान आने का न्यौता दिया. जरदारी ने कहा, ‘हम भारत के साथ बेहतर संबंध चाहेंगे.Ó मनमोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान आने का जरदारी का न्योता स्वीकार कर लिया है. सात आरसीआर पहुंचने पर मनमोहन सिंह ने जरदारी का गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेताओं ने साथ खडे होकर फोटो खिंचवाये.

भारत की अवाम को अस्सलाम अलैकुम!

जरदारी ने कहा, ‘मैं पाकिस्तान के राष्ट्रपति की ओर से भारत की अवाम को अस्सलाम अलैकुम (खुदा सबको सलामत रखे) कहना चाहूंगा. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे दोपहर भोज पर आमंत्रित किया हालांकि मैं निजी यात्रा पर यहां आया था, लेकिन हमने कुछ द्विपक्षीय मसलों पर फलदायक बातचीत की है. जरदारी की वर्तमान यात्रा सात साल में किसी पाकिस्तानी राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा है. जरदारी का विमान नयी दिल्ली के पालम वायुसैनिक अड्डे (तकनीकी एरिया) पर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर पहुंचा. उनके साथ उनके बेटे बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक और कुछ अन्य अधिकारी भी आये हैं.

उनका केन्द्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल और विदेश सचिव रंजन मथाई ने स्वागत किया. बिजनेस सूट पहने जरदारी ने इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया लेकिन कोई टिप्पणी नहीं की. वह सीधे प्रधानमंत्री सिंह के सात रेसकोर्स स्थित सरकारी आवास के लिए रवाना हो गये. एक दिन की निजी यात्रा पर आये पाकिस्तानी राष्ट्रपति राजस्थान के अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह जा रहे हैं. बैठक का हालांकि कोई तयशुदा एजेंडा नहीं था लेकिन दोनों नेताओं ने संभवत: परस्पर हित के मुद्दों पर बातचीत की है. जरदारी और मनमोहन करीब तीन साल के अंतराल बाद मिले. इससे पहले वे 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में मिले थे. वैसे अब देश-दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि आसिफ अली जरदारी और मनमोहन सिंह के बीच बातचीत का स्तर कितना व्यापक रहा. समझा जा रहा है कि मनमोहन सिंह और जरदारी कश्मीर, आतंकवाद, व्यापार सहित सभी मुद्दों पर चर्चा की. पिछले 7 वर्षों में किसी पाकिस्तानी राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है. जरदारी के साथ 42 सदस्यों का एक शिष्टमंडल भी भारत आया है

भारत में लगेगी पाक उत्पादों की प्रदर्शनी

भारत कारोबारी रिश्ते सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाकिस्तान के लाइफस्टाइल उत्पादों की एक प्रदर्शनी का आयोजन करेगा. इसमें पाकिस्तान की 100 से अधिक कम्पनियां अपने उत्पादों एवं सेवाओं का प्रदर्शन करेंगी. एक अधिकारी ने बताया कि प्रगति मैदान में 12 से 15 अप्रैल तक चलने वाले लाइफस्टाइल पाकिस्तान का उद्घाटन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा एवं उनके पाकिस्तानी समकक्ष मोहम्मद अमीन फहीम करेंगे. इस प्रदर्शनी में कम्पनियां वस्त्र, चमड़े के सामान, गृह सज्जा से जुड़ी वस्तुएं, खाद्य पदार्थ, संगमरमर के साथ से बने सामान, हस्तशिल्प और डिजायनर फर्नीचर के अपने उत्पादों को प्रदर्शित करेंगी. इससे पहले पाकिस्तान के फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स द्वारा लाहौर में 3 दिवसीय इंडिया शो का आयोजन किया गया था.

ट्रेड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान के अध्यक्ष तारिक पुरी ने बताया, भारत एवं पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्तों के बीच लाइफस्टाइल पाकिस्तान एक बड़ा कदम है. यह अंतर्क्षेत्रीय व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है. इस प्रदर्शनी में पाकिस्तान के प्रमुख लाइफस्टाइल ब्रैंड गुल अहमद, अलकरम, हम लेदर, खादी, चेन वन, बोनांजा और निशात अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी. वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा के नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल 13 फरवरी को पाकिस्तान के 4 दिवसीय दौरे पर गया था.

सरबजीत की रिहाई के लिए अजमेर पहुंचे रिश्तेदार

पाकिस्तान में मृत्युदंड पाए सरबजीत की रिहाई की गुहार लगाने के लिए उसके परिजन अजमेर पहुंच गए.  सरबजीत की बहन दलबीर कौर एवं पुत्री स्वपनदीप दरगाह के आगे एक तख्ती लिए खड़ी थी जिस पर लिखा है, दिलों को फिर से जोड़ दीजिए, सरबजीत को छोड़ दीजिए. स्वपनदीप ने कहा, मैं राष्ट्रपति जरदारी से अपने पिता की रिहाई की अपील करती हूं. क्योंकि वह बेगुनाह हैं. दलबीर कौर ने कहा, मैं दरगाह पर प्रार्थना करने आई हूं और मुझे उम्मीद है कि मेरा भाई रिहा हो जाएगा. ख्वाजा के आशीर्वाद से जरदारी अजमेर आ रहे हैं. मुझे आशा है कि मेरा भाई भी एक दिन आएगा. पाकिस्तान की जेल में 19 साल से कैद सरबजीत को लाहौर एवं मुल्तान में 1990 में हुए चार बम विस्फोटों के सिलसिले में मृत्युदंड दिया गया है. इन विस्फोटों में 14 लोग मारे गए थे.

उमर से शर्त में एक रपया हारे जरदारी

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पास उनका एक रुपया है. दरअसल अब्दुल्ला ने जरदारी से शर्त लगाते हुए कहा था कि जब भी वह भारत की यात्रा पर आएंगे तो कश्मीर नहीं जा पाएंगे. 

उमर ने कहा कि 2006 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने जरदारी से एक रुपये की शर्त लगाई थी कि वह भारत दौरे पर कश्मीर नहीं जा सकेंगे. उन्होंने मेरा एक रुपया नहीं दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी पाकिस्तानी नेता ने लम्बे समय से राज्य की यात्रा नहीं की है. यह पूछने पर कि क्या वह चाहते थे कि जरदारी कश्मीर की यात्रा करें तो उन्होंने कहा, कि निश्चित तौर पर. मैं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की यात्रा करना चाहूंगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच वार्ता का सिलसिला शुरू हो. उन्होंने कहा कि जरदारी की यात्रा को लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है. हम संपर्क को बनाए रखना चाहते हैं. उमर ने दोनों देशों से जम्मू कश्मीर नियंत्रण रेखा के दोनों ओर होने वाले व्यापार में विनिमय प्रणाली को समाप्त करने की अपील की.

जेल के साथी को जरदारी से न मिलने का मलाल

कोलकाता, 8 अप्रैल. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की भारत यात्रा से उनके साथ पाकिस्तानी जेल में बंद रहे महबूब इलाही बेहद खुश हैं. लेकिन इलाही को इस बात का मलाल है कि जरदारी की संक्षिप्त यात्रा के कारण वह उनसे मुलाकात नहीं कर सके.

इलाही ने पाकिस्तान के उच्चायोग को पत्र लिखकर रविवार को भारत आ रहे जरदारी से मिलने का समय मांगा था लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी. भारत के पूर्व जासूस इलाही 1986-87 के दौरान कराची जेल में जरदारी के साथ कुछ महीने बीता चुके हैं. पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में इलाही 20 वर्ष की सजा काट चुके हैं. इलाही ने कहा, पाकिस्तान में जिया उल हक के सैन्य शासन के दौरान मैं जरदारी एवं बेनजीर भुट्टो के साथ एक ही जेल में सजा काट रहा था. हम अक्सर जेल प्रांगण में जरदारी से मुलाकात करते थे. जरदारी की जेल में अच्छी छवि थी. इलाही 60 एवं 70 के दशक के दौरान पाकिस्तान में जासूसी कर चुके हैं. वह पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और जिया के कुशासन एवं दमन की चर्चा करते थे.  इलाही ने बताया कि जरदारी भारतीय कैदियों से सहानुभूति रखते थे. उन्होंने कहा, जरदारी को भारतीय युद्धबंदियों के प्रति सहानुभूति थी. 52 वर्षीय इलाही पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार को याद करते हुए सिहर उठते हैं. उनके शरीर पर बने निशान उस जुल्म की गवाही दे रहे हैं. इलाही ने कहा कि पाकिस्तान जेल में 20 साल के दौरान उन्होंने सैकड़ों भारतीय युद्धबंदियों को देखा.

उन्होंने कहा, मैं सैकड़ों भारतीय कैदियों से मिला जिसमें अधिकतर युद्धबंदी थे. शारीरिक प्रताडऩा के कारण कई कैदियों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया. इस पूर्व भारतीय जासूस को इस बात का दुख है कि न तो भारत सरकार और न ही भारतीय सेना युद्धबंदियों को वापस लाने की कोशिश कर रही है. इलाही 1996 में पाकिस्तान की जेल से छूटने के बाद भारतीय कैदियों एवं युद्धबंदियों की रिहाई के लिए अभियान चला रहे हैं. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबधन सरकार के कार्यकाल में संसद भवन के समक्ष आत्मदाह की धमकी तक दी थी.

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