बीडीए के प्लाट दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले पकड़ाए, 65 लाख से अधिक की लगाई चपत

नवभारत न्यूज भोपाल,

क्राइम ब्रांच ने ऐसेे तीन शातिर ढगों को पकड़ा है, जो बीडीए में सेटिंग की बात कहकर सस्ते दामों में प्लाट आवंटन कराने का झांसा देकर लोगों से ठगी करते थे.

आरोपी कितने शातिर हैं, अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे लोगों को बीडीए ऑफिस भी ले जाते थे और इस तरह से व्यवहार करते थे जैसे कि वे बीडीए के ही कर्मचारी हैं. इसके बाद बातों में लेकर पैसे ले लेते थे और फर्जी आवंटन पत्र भी दे देते थे. क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई वर्मा ट्रेवल्स के संचालक के साथ हुई ठगी की घटना सामने आने के बाद बीडीए के आवेदन पर की है. पुलिस ने इनके पास से कंप्यूटर, प्रिंटर, सील व अन्य दस्तावेज बरामद किए हंै. पुलिस इनसे पूछताछ करने में जुटी है.

भोपाल विकास प्राधिकरण से शिकायती पत्र मिला था जिसमें बताया गया था कि मिसरोद, आईएसबीटी एवं विद्यानगर में फर्जी कागजातों के सहारे आवंटन आदेश एवं प्राधिकरण की रसीद फर्जी रूप से तैयार कर विक्री की जा रही है.

वर्मा ट्रेवल्स के संचालक दीपक वर्मा सहित विजय डोंगरे, नरेन्द्र कुमार शर्मा व जगदीश सिंह द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी कि रूपेश सिरोड़े व अन्य के द्वारा बीडीए के प्लाट दिलाने के नाम पर फर्जी आवंटन पत्र सौंपकर करीबन 65 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की गई है.

क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर गहनता से मामले की पड़ताल की. पुलिस को जांच में सामने आया कि जब भी शिकायतकर्ता से मिलने के लिए आरोपी जाते थे तो यह लालच देते थे कि बीडीए के प्लाट काफी कम कीमत में दिलवा देंगे. साथ ही यह भी कहते थे कि आवंटन प्रक्रिया बहुत कठिन है, गोपनीय तरीके से सेटिंग कर दिलवा रहे हैं और किसी से इसके बारे में जानकारी नहीं देने की बात भी कहते थे.

पुलिस ने इसके बाद रूपेश सिरोड़े निवासी अयोध्या नगर एवं उसके दो साथी रवि महेश्वरी निवासी लालपुरा तहसील लहार जिला भिंड और अतुल श्रीवास्तव निवासी मीनाल रेसीडेंसी को पकड़ लिया. आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकारा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए उन्होंने एमपी नगर में एक ऑफिस भी ले रखा था, जहां पर सौदा तय होने के बाद कागजात तैयार कर लेते थे.

सबसे पहले नवभारत ने किया था खुलासा

बीडीए के नाम पर लोगों से ठगी की वारदातों को नवभारत ने सबसे पहले प्रमुखता से प्रकाशित किया था. नवभारत ने इसका भी उल्लेख किया था कि बीडीए के नाम पर लोगों से ठगी को एक गिरोह अंजाम दे रहा है. इसके साथ ही भोलेभाले लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है.

प्लाट पर ले जाकर खड़ा कर खींच लेते थे फोटो

आरोपी कितने शातिर हैं अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे ऐसे ग्राहकों की तलाश में रहते थे, जो बीडीए के प्लाट खरीदने के इच्छुक होते थे. इसके बाद उन्हें विश्वास में लेकर जिस प्लाट का सौदा होता था, वहां पर ले जाकर आवंटन पत्र दे देते थे और प्लाट पर खड़ा कर फोटो खींच लेते थे, जिससे कि फरियादी को पूरा विश्वास हो जाता था.

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