धरना आंदोलन समर्थन में नरसिंहपुर पहुंचे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा

देश की मजबूत कड़ी है किसान

नवभारत न्यूज जबलपुर

राजनीति करने नहीं आया शत्रुघ्न सिन्हा नरसिंहपुर राष्ट्रीय किसान संघ के द्वारा जारी किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे भारत सरकार के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा तथा राष्ट्रीय किसान संघ के राष्ट्रीय संयोजक शिवकुमार शर्मा कक्का जी के द्वारा नरसिंहपुर में राष्ट्रीय मंच पर आज बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता तथा भारतीय जनता पार्टी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का किसानों धरना चल रहा है।

धरना आंदोलन मेंं राजनीति से परे हटकर उनके समर्थन में नरसिंहपुर पहुंचे यह लड़ाई विगत 4 दिन से नरसिंहपुर के कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना देकर यशवंत सिन्हा के द्वारा किया जा रहा है नरसिंहपुर आज संघर्ष के लिए मध्य प्रदेश के साथ-साथ भारत का केंद्र बिंदु बन रहा है।

इसमें अपनी सहभागिता दर्ज कराने आए अभिनेता शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि चुनाव से पहले अलग-अलग राजनेता तरह-तरह की बात करते हैं. किसानों के लिए भी केंद्र की सरकार ने अनेकों वादे किए थे। जिसमें किसानों को लेकर सभी योजनाओं का लाभ लेकर किसानों को मजबूत किया जावेगा लेकिन चुनाव होते ही वह वादे, चुनावी वादे बनकर रह गए आज कुछ राज्यों में फिर चुनाव आने वाले हैं उसको लेकर भोली भाली जनता और भोले किसानों को 2022 तक के लिए फिर से आश्वस्त कर दिया.

कहते हैं कहां पर था चिराग घर-घर में चलेंगे लेकिन चुनाव के बाद कहां चिराग घर तो क्या शहर में भी नहीं चलेंगे यह जो राजसमंद किसानों के लिए बनाया गया है किसान भाइयों आज आपको यह कहने की आवश्यकता नहीं है सिन्हा जी संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ बल्कि इस मंच से आज मैं कहता हूं कि किसान भाइयों संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ यादाश्त मंच का निर्माण देश की समस्याओं मजदूरों किसानों की समस्याओं से लडऩे के लिए उनको उनके हक दिलाने के लिए बनाया गया है आज मैं यहां इस मंच पर राजनीति करने नहीं आया हमारे लिए हमारे किसान भाई हमारे मजदूर भाई जो हमारे अन्नदाता हैं और आज उनके साथ राजनीति की जा रही है उस राजनीति का विरोध करने अपने भाइयों को उनका हक दिलाने मैं यहां आया हूं.

आज पूरे देश में किसान दिन रात मेहनत कर हमारा उधर पोषण करता है भारत हमारा कृषि प्रधान देश है लेकिन क्या किसान के लिए वह सुविधाएं सरकार से मिल रही हैं अनाज का उत्पादन कर अपनी जीविका चलाने के लिए किसान अनाज बेच देता है और फिर मजदूर बनकर मजदूरी करने जुड़ जाता है क्या ऐसा देश कृषि प्रधान कहा जा सकता है.

 

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