बेहाल नजर आए अभिभावक व छात्र-छात्राएं

बस हड़ताल का असर

नवभारत न्यूज भोपाल.

इंदौर के डीपीएस स्कूल बस के हादसे का शिकार होने के मामले को देखते हुए बसों व वैनों पर कार्यवाही के बाद नराज बस व वैन चालकों ने हड़ताल कर दी. बस व वैन नहीं आने के कारण बच्चों व पालकों को परेशानी का समना करना पड़ा.

बड़ी संख्या अभिभावक बच्चों को छोडऩे स्कूल अपने वाहनों से पहुचे जिससे शहर के कई जगहों में जाम की स्थिति बनी रही. हड़ताल में करीब करीब ड़ेढ हजार बस व साढे सात हजार वैन चालक सडक़ों पर नही उतरे.

हड़ताल को लेकर बस संचालकों का तर्क है कि प्रशासन उनकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है. वहीं प्रशासन का कहना है की, सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के तहत सुरक्षा मानकों को लागू करना ही होगा.

इसके लिए नरमी नहीं बरती जाएगी. मप्र स्कूल वाहन चालक सेवा समिति के अध्यक्ष शिवकुमार सोनी ने बताया की, हड़ताल में कोई भी स्कूल बसें व वैंन नहीं चली, जिसकी घोषणा एक दिन पहले ही कर दी गई थी. समिति आगे की रणनीति तय कर रही है. शासन अगर हमें बातचीत के लिए बुलाऐगी तो हम उनसे जरूर बात करेंगें. शहर में करीब एक लाख बच्चों को छोडऩे के लिए उनके पालक पहुंचे.

प्रशासन व बस-वैन संचालकों के बीच जारी रस्साकस्सी का खामियाजा इनको भुगतना पड़ा. पुलिस का कहना है की बस व वैन चालकों को पिछले कई सालों से सुरक्षा के उपाय करने की वक्त दिया गया था लेकिन वे अपने मनमानी मे अड़े हुए हैं.

चरित्र सत्यापन बनी परेशानी

जिला प्रशासन ने स्कूल वाहनों के दौरान वाहन चालकों से चरित्र सत्यापन की भी मांग की है. वाहन चालक इसकी खिलाफत करते हुए आरोप लगा रहे हैं की चरित्र सत्यापन के लिए जब वे थाने में जाते हैं तो उनके वाहन जब्त कर थाने में खड़े कर लिए जाते हैं. इसके अलावा चालकों की कहना है की ये ऑनलाइन व्यवस्था उनके समझ से परे हैं.

हालाकीं प्रशासन ने इसके लिए उन्हे सुविधाएं व समय देने को तैयार है लेकिन इसके ïबाद भी वाहन चालक मानने को तैयार नहीं है. वहीं एडीएम दिशा नागवंशी का कहना है की, बैठक में चालकों को स्पष्ट कर दिया गया है की उनसे तत्काल चरित्र प्रमाणपत्र सत्यापन नहीं चाहिए. उन्हे सात दिनों की समय भी दिया गया है.

बस ऑपरेटरों की मांग

स्कूल और कॉलेज बसों में जीपीएस एवं कैमरे की अनिवार्यता समाप्त की जाए. स्कूल बसों में प्रति सीट छ: सौ रूपय पेनाल्टी समाप्त की जाए साथ ही रूके हुए फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाएं. स्कूल बसों को ग्रीन कार्ड तथा कॉलेज बसों के रूके हुए फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए जाए. फिटनेस की अवधि 15 की जगह 20 वर्ष रखी जाए. स्कूल बसों को पक्के परमिट व परमिट की वैधता पर लीज 5 वर्ष रखी जाए.

कुछ स्कूलों में अवकाश

वाहन चालकों की हड़ताल के चलते राजधानी के कई बडे स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया. वहीं बहुत से स्कूलों में अभिभावक स्वयंं अपने बच्चों को स्कूल ले कर पहुंचे. इंदौर के डिपीएस स्कूल की बस 5 जनवरी को हादसे का शिकार हो गयी थी, जिसमें चार बच्चों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे प्रदेश में स्कूल बसों की जांच की जा रही है.

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