नामदेव ने श्रोताओं से साझा किए रंगमंच के अनुभव

  • रवीन्द्र भवन में थियेटर ओलंपिक्स का आायोजन

भोपाल,

संस्कृति विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली द्वारा आयोजित रंग संसार के भव्य आयोजन आठवें थियेटर ओलम्पिक्स के दूसरे दिन को भारत भवन में फिल्म अभिनेता और रंगकर्मी गोविन्द नामदेव ने यहां उपस्थित श्रोताओं, कलाकारों से रंगमंच और फिल्मों से जुड़ी हुई बातें साझा की.

गोविन्द नामदेव की क्लास में अभिनय को लेकर बातें हुई जिसका टॉपिक केरेक्टर बिल्डिंग था. रंगमंच हो या फिल्म अभिनेता अभिनेत्री को अपने किरदार को समझना आवश्यक होता है. जो भी किरदार उन्हें दिया गया है उनके अनुरूप खुद को ढालना, उस किरदार को समझना एक कलाकार के लिए महत्वपूर्ण होता है.

राष्ट्रीय  नाट्य विद्यालय और भारतीय सिनेमा में अपने अनुभव को साझा करते हुए नामदेव ने बताया यदि कलाकार अपने किरदार को न समझ पाए तो ये एक्टिंग में आने वाली सबसे बड़ी समस्या बन सकती है.

उन्होंने बताया किसी भी किरदार को निभाने से पहले वो उसे समझते हैं, अपने जीवन में उस किरदार को खोजते है. फिर उसके हाव-भाव, उसका उठना-बैठना, बोलने का तरीका सभी समझ कर उस किरदार के हिसाब से अपने बोलने के सुर तय करते हैं. इसके बाद उस किरदार को ग्रहण कर मंच पर या परदे पर निभाते है. ये अभ्यास हर कलाकार को करना चाहिए.

भाषा के उच्चारण को लेकर उन्होंने बताया कि भाषा की शुद्धता के लिए अभ्यास करना ज़रूरी है. नाटक में शब्दों का ठीक उच्चारण बेहद ज़रूरी है. रंग मंच में अभिनय को बेहतर बनाने का आधा काम मंच पर हमारा सही उच्चारण करता है.

जो भी संवाद सहजता के साथ बोले जाते हैं वो दर्शकों के दिल तक पहुँचते हैं. वहां मौजूद कलाकारों ने अभिनय करते समय किसी किरदार को निभाने में आने वाली समस्याओं को गोविन्द के साथ साझा किया. गोविन्द ने बताया अभिनय में भाव का होना महत्वपूर्ण है, भाव को समझ के संवाद बोलने में मेहनत नहीं लगती और एक्टिंग सहज होती है.