खामियों के बीच होगी खरीदी, गेहूं भंडारण के अधूरे इंतजामात, गोदामों का अभाव

नवभारत न्यूज सीहोर/राजगढ़-ब्यावरा/ विदिशा/ इटारसी/ रायसेन,

आज से जिले में किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का श्रीगणेश हो जाएगा. सीहोर में गत वर्ष की तुलना में खरीदी लक्ष्य अधिक होने के बावजूद भंडारण की समस्या का समाधान नहीं तलाशा गया है.

पांच लाख मेट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य है, जबकि भंडारण करने के लिए महज दो लाख मेट्रिक टन की व्यवस्था ही जुट सकी है. इसका असर भी समर्थन मूल्य की खरीदी पर पड़ सकने की आशंका बलवती हो गई है.

जिले की कृषि उपज मंडियों में रबी सीजन की प्रमुख उपज गेहूं की आवक शुरू हो गई है. हालांकि अधिकांश किसान शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. जिससे मंडी में आवक अपेक्षाकृत कम थी. मंगलवार से जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का काम शुरू हो जाएगा.

जिला खाद्य एवं आपूर्ति महकमे के बताए अनुसार जिले के 160 खरीदी केन्द्रों पर गेहूं की तुलाई शुरू हो जाएगी. इस बार भी खरीदी केन्द्रों पर किसानों को कई समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश खरीदी केन्द्रों पर गेहूं को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है. हालांकि संबंधित अधिकारी सभी तैयारियां पूरी होने के दावे कर रहे हैं.

इस साल समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए 5 लाख मेट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य 4 लाख 44 हजार मेट्रिक टन से अधिक है. समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने इस साल 74 हजार 529 किसानों ने पंजीयन कराया है. जबकि पिछले साल 59 हजार 921 किसानों ने पंजीयन कराया था.

पिछले साल की भांति इस बार भी गेहूं का सुरक्षित भंडारण करना शासन- प्रशासन के लिए खासा चुनौतीपूर्ण होगा. जिला मुख्यालय पर हर सायलो में 50 हजार मैट्रिक टन गेहूं भंडारण की व्यवस्था है, लेकिन इस साल साढ़े 12 हजार मैट्रिक क्षमता वाले सायलो के चार बाक्सों में से तीन भरे हुए हैं.

शेष एक ही सायलो खाली है. इनमें साढ़े 12 हजार मैट्रिक टन गेहूं का ही भंडारण संभव हो सकेगा. इसकी वजह से सायलो केन्द्र पर इस बार चार सोसायटियों के किसानों से गेहूं का उपार्जन होगा, जबकि पिछली बार यहां आठ सोसायटियों के किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया था. हालांकि जिला आपूर्ति अधिकारी शैलेष शर्मा का कहना है कि वर्तमान में ढाई लाख मेट्रिक टन गेहूं भंडारण के इंतजाम किए जा चुके हैं. शेष गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए सायलो व गोदामों की व्यवस्था शासन स्तर से जुटाई जाएगी.

जिले में किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 20 मार्च से 20 मई तक की अवधि नियत की गई है. केन्द्र सरकार द्वारा औसत अच्छी गुणवत्ता (एफएक्यू) गेहूं का समर्थन मूल्य एक हजार सात सौ पैंतीस रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है.

इसके अलावा 265 रुपए बोनस के साथ किसानों को दो हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं की खरीदी की जाएगी. किसानों से गेहूं उपार्जन कार्य सप्ताह में 5 दिवस सोमवार से शुक्रवार तक किया जाएगा.

इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य दो हजार रुपए प्रति क्विंटल होने के कारण किसान सरकार को ही गेहूं बेचने के लिए तैयार बैठे हैं. मंगलवार से खरीदी कार्य प्रारंभ तो हो रहा है, लेकिन हर बार की तरह इस साल भी किसानों को अनेकानेक कमियों का सामना करना पड़ेगा.

पछले वर्ष कई बार किसानों को आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ा था, क्योंकि कहीं वारदान की कमी तो कहीं भंडारण की दिक्कत होने के कारण खरीदी कार्य रोक दिया जाता था और परेशान किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ता था.

बादलों ने बढ़ाई किसानों की धडक़नें

मंगलवार से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का आगाज हो रहा है तो इससे पहले एक बार फिर मौसम में आए बदलाव ने किसानों को चिंतित कर दिया है. जिले में वर्तमान में फसल की कटाई और थे्रसिंग कार्य चल रहा है. ऐसे में खेत और खलिहान दोनों में फसल को मौसम की तुनकमिजाजी नुकसान पहुंचा सकती है.

सोमवार को दिन में आसमान पर बादलों का बसेरा बना रहने से बूंदाबांदी होने की आशंका बनी रही.इससे खेतों में व्यस्त किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. इसी तरह समर्थन मूल्य पर फसल बेचने आने वाले किसानों के अलावा मंडी की नीलामी में शामिल होने के लिए कई किसान सोमवार को कृषि उपज मंडी में उपज से भरी ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर पहुंच गए थे.

दोपहर बाद आसमान पर बादलों का जमावड़ा देखकर चिंतित किसानों ने बूंदाबांदी से बचाने के लिए तिरपाल आदि का इंतजाम किया. इसके अलावा समर्थन केन्द्रों के बाहर भी ट्रैक्टर ट्रालियों के पहुंचने का सिलसिला बना हुआ है.ऐसे में आसमान से होने वाली मामूली बूंदाबांदी भी उनकी उपज को प्रभावित कर सकते हैं, क्यों कि किसी भी खरीदी केन्द्र पर न तो बूंदाबांदी अथवा बारिश के दौरान उपज को भीगने से बचाने के इंतजाम नहीं हैं.

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