नई दिल्ली. बजट की उलटी गिनती शुरू हो गई है. हर किसी को उम्मीद है कि वित्तमंत्री की झोली में उसके लिए कुछ न कुछ जरूर होगा. मोदी सरकार ने भी अपने 10 महीने के कामकाज से उम्मीदें जगा दी हैं. सभी देश की तरक्की में अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. बस अब उन्हें इंतजार है इशारे का जो इस बजट से मिलने की उम्मीद है.

एसएमई को वित्तमंत्री से बहुत उम्मीदें है, बजट में इनकी कारोबार की दिक्कतें दूर करना जरूरी है और इनको टैक्स में भी छूट मिलनी चाहिए. बजट में एसएमई स्टॉक एक्सचेंज बनाने की मांग कर रहे हैं. वहीं एक्साइज छूट की सीमा 1.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 4-5 करोड़ रुपये की जाएं ऐसी उम्मीद कर रहे हैं. वे चाहते है कि एसएमई के लिए सस्ती जमीन और एफएसआई की सुविधा मिल जाएं. साथ ही टैक्स छूट बढ़ाई जाएं, क्योंकि मुनाफे के मुकाबले टैक्स ज्यादा लगता है. इसके अलावा एसएमई चाहते है कि स्किल डेवलपमेंट के जरिए रोजगार को बढ़ावा दिया जाए, टैक्स पेमेंट के लिए एक विंडो सिस्टम हो जाएं और टैक्स पेमेंट के लिए विभागों की संख्या घटाई जाएं.

आंत्रप्रेन्योर चाहते हैं कि स्टार्टअप को आसान कर्ज मिल जाएं ताकि कारोबार शुरू करना आसान हो जाएं और लालफीताशाही से छुटकारा मिल जाएं. साथ ही सरकार इनोवेशन को समझकर टैक्स का बोझ भी कम कर दें. वहीं ज्वेलरी इंडस्ट्री को भी बजट से कुछ खास उम्मीदें है. ज्वेलरी इंडस्ट्री चाहती है कि ज्वेलर्स के साथ सौतेला व्यवहार खत्म हो जाएं. बजट में सोने के इंपोर्ट की दिक्कतें खत्म की जाएं, कस्टम ड्यूटी घटाई जाएं, सोना खरीदने की लिमिट बढ़ाई जाएं और प्रिजंपटिव टैक्स लागू किया जाएं. इसके अलावा ज्वेलरी इंडस्ट्री चाह्ती है कि सरकार बजट में कलर स्टोन और मशीनो के इंपोर्ट पर भी ड्यूटी खत्म कर दें.
इस बजट से फार्मा सेक्टर को भी कुछ उम्मीदें हैं. फार्मा सेक्टर चाहता है कि बजट में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स जल्द से जल्द लागू होना चाहिए. जीएसटी लागू होने से दवाएं सस्ती मिलेंगी. एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए इसेंटिव देना जरूरी है. इसके अलावा फार्मा सेक्टर को आसान और सस्ता कर्ज मिल जाना चाहिए. कच्चे माल और तैयार गुड्स पर एक समान एक्साइज होना चाहिए. फिलहाल कच्चे माल पर 12 फीसदी और तैयार माल पर 6 फीसदी एक्साइज है.

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर की उम्मीदें
बजट को सिर्फ 5 दिन रह गए हैं. आम आदमी से लेकर कॉरपोरेट इंडिया तक सभी वित्तमंत्री से कुछ-न-कुछ चाहते हैं. उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार के इस बजट में मेक इन इंडिया को पुश देने पर जोर रहेगा. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर की भी बजट से काफी उम्मीदें हैं. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को राहत देने के लिए बजट में सरकार को क्या एलान करने चाहिए इस पर सीएनबीसी आवाज के साथ बात करते हुए वीआईपी इंडस्ट्रीज के चेयरमैन दिलीप पिरामल ने कहा कि जीएसटी को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए. और जीएसटी के बारे में स्पष्टता होनी चाहिए.

दिलीप पिरामल ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी को 12 फीसदी से घटाकर फिर से 10 फीसदी ला देना चाहिए. मेक इन इंडिया को सफल करने के लिये पार्ट्स और कम्पोनेंट्स (कच्चे माल) पर कस्टम ड्यूटी घटाना चाहिए. इस बजट में वित्त मंत्री को इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देने के लिए नितिगत सुधार करने की जरूरत है. इसके टैक्स पॉलिसी को सरल और स्पष्ट किए जाने की बहुत जरूरत है.

एक और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनी ब्लू स्टार के ईडी बी त्यागराजन का कहना है मैन्यूफाक्चरिंग (मेक इन इंडिया) को बढ़ावा देने के लिए लेबर पॉलिसी में सुधार की बड़ी जरूरत है. सरकार को इंफ्रा में सुधार को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए. को जल्द लागू किया जाए और इसमें स्पष्टता लाई जाए. बी त्यागराजन ने कहा कि इस बजट में सर्विस टैक्स पर होने वाले एलानों पर नजर रहेगी. वित्त मंत्री को टैक्स पॉलिसी को और सरल बनाना चाहिए और एक्साइज ड्यूटी को घटाकर 10 फीसदी के स्तर पर ले आना चाहिए.

सब्सिडी को कैसे कंट्रोल करेगी सरकार!
मोदी बजट में सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि निवेश बढ़ाने के लिए सरकार क्या करती है. सरकार की कमाई घट रही है और खर्चे बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में वित्तीय घाटा और सब्सिडी को कंट्रोल में करने का चैलेंज बहुत बड़ा होगा.

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