हरीश दुबे
ग्वालियर,

बीती दो अप्रैल को ग्वालियर-चम्बल अंचल में एससी-एसटी एक्ट को लेकर भारत बंद के दौरान भडक़ी हिंसा एवं उपद्रव में करीब दर्जन भर सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका उजागर हुई है.

पुलिस और प्रशासन ने तो इन अफसरों पर शिकंजा कसा ही है, कई को जेल भेजा है तो कई दाखिले ह्वालात हैं लेकिन सवाल उठता है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग करते हुए ये अधिकारी-कर्मचारी किस तरह उपद्रव की साजिश रचते रहे और इंटेलीजेंस को कानों-कान खबर नहीं हुई?

इन अफ़सरों-कर्मचारियों पर दर्ज हुए मामले: दतिया जिले के मलेरिया अधिकारी डा. हेमंत गौतम, स्टेट बैंक ग्वालियर के सहायक प्रबंधक राजेंद्र राजे, नगर रक्षा समिति के रनसिंह जाटव, बैंक आफ इंडिया के हीरालाल मंडेलिया, ग्वालियर के जिला शिक्षा विभाग में पदस्थ सुरेश अम्ब, दीपक राजौरिया, नेहरू युवा केंद्र के करनसिंह जाटव एवं भिन्ड के सहायक कोषालय अधिकारी.

अकेले भिन्ड में चार सरकारी अफ़सरों के नाम हिंसा भडक़ाने में सामने आए हैं, उपरोक्त सूची में शामिल ज्यादातर नामों के खिलाफ़ पुलिस कार्रवाई प्रारंभ कर चुकी है, हालांकि कई कर्मचारी संगठन इन्हें बचाने के लिए मैदान में आ गए हैं और तर्कों के जरिए इन्हें बेकसूर ठहरा रहे हैं.

आईएएस के रिश्तेदार शक के घेरे में: उपद्रव की चपेट में आए ठाटीपुर स्थित गल्ला कोठार बस्ती में रहने वाले एक सीनियर आईएएस के रिश्तेदार पर भी पुलिस की शक की सुई घूमी है. इंटेलिजेन्स उक्त व्यक्ति के घर से उपद्रवियों को लाठी-डंडे, बैनर-पोस्टर से लेकर पैसे बाँटे जाने की सूचनाओं की जांच कर रही है.

कई और अफसर पुलिस और खुफिया एजेन्सियों के रेडार पर हैं. आरक्षण के खिलाफ़ कुछ सवर्ण संगठ्नों द्वारा कथित तौर पर दस अप्रैल को भारत बंद बुलाने के बाद प्रशासन सपाक्स के कर्मचारी नेताओं की गतिविधियों पर भी बारीक नजर रख रहा है.

सामान्य व पिछड़ों के लिए मैदान में आईएएस

मनोज पुरोहित
शाजापुर, सामान्य व पिछड़े वर्ग के शासकीय अधिकारी-कर्मचारी अपनी पदोन्नति की मांग को लेकर सपाक्स के मंच से जुडक़र सरकार तक अपनी बात रख रहे हैं. वर्तमान में सपाक्स की बागडोर प्रदेश के सीनियर आईएएस अधिकारी राजीव शर्मा ने संभाल रखी है. तो वहीं सपाक्स समाज की कमान सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी के हाथों में है. सपाक्स को लेकर दोनों अधिकारियों ने नवभारत से चर्चा में बेबाकी से अपना पक्ष रखा.

सामान्य-पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए भी बनें हॉस्टल : शर्मा

शाजापुर के पूर्व कलेक्टर और मप्र शासन में अपर सचिव के पद पर पदस्थ आईएएस अधिकारी राजीव शर्मा ने कहा कि सपाक्स की लड़ाई किसी जाति से नहीं है. ना ही जातिगत व्यवस्था से सपाक्स का कोई लेना है. ना ही सपाक्स आरक्षण के खिलाफ है.

शर्मा का कहना है कि सपाक्स केवल इस बात का विरोध करता है कि पदोन्नति में सीनियर और जूनियर के हिसाब से क्रमोन्नति दी जाए.

श्री शर्मा ने कहा कि यदि एक कमजोर वर्ग को लाभ दिया जा रहा है, तो उससे कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन मजबूत वर्ग को भी भूखा नहीं मारा जा सकता है. सपाक्स अधिकारी कर्मचारी समानता के साथ काम करते हैं.

संविधान में सबको समान अधिकार हैं, तो फिर भेदभाव क्यो. शर्मा ने कहा कि जब एससी-एसटी वर्ग के बच्चों को अलग होस्टल की व्यवस्था है, तो फिर सामान्य वर्ग और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को अलग होस्टल बनवाने से किसने रोका है. गरीबी एक अभिशाप है, जो जाति, धर्म देखकर

लाभ दूसरे की कीमत पर नहीं होना चाहिए : त्रिवेदी

वहीं दूसरी ओर सपाक्स समाज के संरक्षक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं पूर्व सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि सपाक्स समाज का गठन इसलिए किया गया कि समाज में जागरूकता लाई जाए. राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए समय-समय पर एससी और एसटी के नियमों में बदलाव करते हैं, लेकिन 70 प्रतिशत सामान्य और पिछड़ा वर्ग के हितों को लेकर सभी राजनीतिक दल मौन रहते हैं.

प्रदेशभर में भर्ती अभियान चलाया जाता है, जो सभी समाज का होना चाहिए, लेकिन सामान्य जाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिए कभी भी सरकारी नौकरियों के लिए भर्तियां अभियान के तहत नहीं की जाती हैं. प्रदेश में 90 हजार पद सामान्य के खाली हैं, जिन्हें सरकार ने रोक रखा है. एक तरफ एससी-एसटी वर्ग के लिए विशेष भर्ती अभियान चलता है, लेकिन सामान्य, पिछड़ा वर्ग के लिए रोक. ये कैसी समानता है.

बेकसूरों पर न हो कार्रवाई

प्रदेश के मुख्य सचिव व डीजीपी से चर्चा कर हमने साफ़ कह दिया है कि उपद्रव करने वालों पर कार्रवाई में कोताही न बरतें लेकिन एक भी बेकसूर कर्मचारी को निशाना न बनाया जाए, देवेन्द्र राजौरिया जैसे कई कर्मचारी झूठे फँसाए जा रहे हैं. हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे.
-चौधरी मुकेश मौर्य, जिलाध्य्क्ष, अजाक्स, ग्वालियर

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