म.प्र मेडिकल कॉउंसिल से निराश लौटे छात्र

भोपाल,

एडवांस मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने मंगलवार को म.प्र मेडिकल कॉउंसिल कार्यालय का घेराव किया, जहां रजिस्ट्रार व छात्रों के बीच तीखी नोकझोक हुई.

छात्रों ने कार्यालय में शासन व कॉलेज प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की, एक महीने से शासन द्वारा कोई कार्यवाही व प्रतिक्रिया न आने के विरोध में छात्रों ने मेडिकल कॉउंसिल का घेराव किया, व छात्रों ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने की मांग की.

छात्रों को रजिस्ट्रार ने समझने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे और अंत में रजिस्ट्रार ने छात्रों को लिखित में दिया कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं हैं, तब जाकर छात्र कार्यालय से निकले.

वही इस मामले में मेडिकल कॉउंसिल के रजिस्ट्रार का कहना है कि मेडिकल कॉउंसिल का काम डॉक्टरों का पंजीयन करना हैं, न कि कॉलेज या किसी संस्थान को मान्यता देना या उसकी मान्यता रद्द करना.बताते दे कि यह छात्र पिछले एक महीने से कॉलेज में शिक्षा क ी मूलभूत सुविधायें न होने के विरोध में धरने पर बैठे हैं.

एक महीने से धरने पर बैठे छात्र

छात्रों धरने में साथअभाविप के कार्यकत्र्ता नीलेश जोशी ने बताया कि हम छात्रों के साथ कलेक्टर से लेकर डीआईजी, मंत्री शरद जैन, डॉक्टर मेडिकल एसोसिएशन से भी मिलकर आ चुके है, लेकिन किसी ने कोई प्रतिक्रिया व कार्यवाही नहीं की. छात्र पिछले 6 महीने से परेशान हैं, व एक महीने से धरने पर बैठे हैं, लेकिन छात्रों की कोई सुध लेना वाला नहीं है. बल्कि कई बार छात्रों से प्रशासन ने अपराधियों जैसा व्यवहार किया.

हमारा काम पंजीयन करना न कि मान्यता देना

म.प्र मेडिकल कॉउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सुबोध मिश्रा ने बताया कि म.प्र कॉउंसिल का काम डॉक्टरों का पंजीयन करना हैं, कॉलेज क ो मान्यता देना व रद्द करने का काम मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया का है.यह म.प्र कॉउंसिल की स्थापना म.प्र एक्ट के अन्तर्गत हुई है, इसलिए किसी भी मेडिकल संस्थान का निरीक्षण करना, मान्यता देना इससे इसका कोई सम्बंध नहीं हैं. और जहां तक बात इस कॉलेज वाले मामले की है, इसके लिए शासन ने कॉलेज को नोटिस भेज दिया, और कॉलेज के जवाब के बाद उस पर शासन स्तर पर कार्यवाही होंगी.

छात्रों की प्रमुख मांगे

स्टूडेट फॉर के संयोजक शोभित पाठक ने बताया कि हमारी मांग है, शासन कॉलेज का उत्तरादायित्व ले या छात्रों को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट क रें. और भविष्य में कॉलेज की मान्यता देते समय उक्त व्यक्ति की जांच क रे, कि वो मान्यता देने योग्य हैं, या नहीं क्योंकि शासन यदि पहले इसकी जांच कर लेता तो इतने छात्रों का भविष्य खराब होने से बच जाता.

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