संविधान दिवस पर बोले मोदी

नई दिल्ली,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 68वें संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसकी शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हर चुनौतियों से निपटने का समाधान मौजूद है.

उन्होंने विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज सभी संस्थानों को जरूरत है कि वे देश को आगे बढ़ाने के लिए एक-दूसरे को मजबूती देने का काम करें. उन्होंने साथ ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ कराए जाने के मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाने की अपील की.

पीएम ने कहा कि अलग-अलग चुनाव कराने से हजारों करोड़ों का खर्च होता है और उससे देश पर आर्थिक भार बढ़ता है. मोदी ने कहा कि आज एक भी ऐसा मुद्दा नहीं है जिसपर संविधान में दिशानिर्देश मौजूद न हों. उन्होंने कहा कि हमारा संविधान जितना जीवंत है उतना ही संवेदनशील भी है.

हमारा संविधान जितना जवाबदेह है उतना भी सक्षम भी है. संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने कहा था कि सर्विधान वर्केबल और फ्लेक्सिबल है. शांति हो या युद्ध इसमें देश को एकजुट रखने की ताकत है.

संविधान गतिशील दस्तावेज: कोविंद 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि संविधान कोई जड़ वस्तु नहीं बल्कि यह एक गतिशील दस्तावे होता है और उसे देश की जनता के लिए सार्थक बनाये जाने की जरूरत है.

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान सभा को मालूम था कि संविधान में नए बदलाओं की जरूरत पड़ेगी और एक गतिशील दुनिया में देश की जनता की सेवा करने का यही उचित रास्ता है.

यही कारण है कि संविधान में समय- समय पर कई वर्षों में कई संशोधन भी हुए. उन्होंने कहा कि संविधान एक अमूर्त आदर्श नहीं है बल्कि उसे हर गली मोहल्ले और गाँव में आम आदमी की जरूरतों के अनुरूप सार्थक होना होगा, लोगों से जुडऩा होगा तथा अधिक अनुकूल होना होगा.

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