एम्स प्रबंधन ने टेंट लगाने की भी नहीं दी अनुमति

नवभारत न्यूज भोपाल,

प्रदेश के इकलौते राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस कर रहे करीब 500 छात्र चिलचिलाती धूप और कहर ढा रही गर्मी के बीच एम्स प्रांगण में ऑडिटोरियम के सामने स्थाई निर्देशक की नियुक्ति की मांग को लेकर 2 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं. छात्रों ने बुधवार को डीन एकेडमिक डॉ. राजेश मलिक से मिलकर 3 दिनों के लिए हड़ताल स्थगित कर दी.

इस विषय पर डीन का कहना है कि हमने संयुक्त सचिव केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से स्थाई डायरेक्टर के संबंध में बात की है इस पर उन्होंने जल्द से जल्द स्थाई डायरेक्टर नियुक्त करने का भरोसा दिया है.

छात्रों ने अपनी हड़ताल को लेकर एम्स प्रबंधन से टेंट लगाने की अनुमति मांगी थी पर प्रबंधन द्वारा छात्रों को अनुमति नहीं दी गई फिर भी छात्रों ने चिलचिलाती धूप में अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी.

2 छात्रों ने भोपाल से दिल्ली तक शुरू किया पैदल मार्च: बुधवार को स्थाई डायरेक्टर की मांग को लेकर स्टूडेंट यूनियन एम्स भोपाल के पूर्व अध्यक्ष संत गुरु प्रसाद और चंदन कुमार आर्य एम्स भोपाल से स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली के लिए पैदल रवाना हुए यह दोनों छात्र करीब 1 महीने में दिल्ली पहुंचेंगे इस बीच एम्स के अन्य छात्रों ने इन दोनों छात्रों को अपना भरपूर सहयोग दिया

पिछले 3 साल से नहीं है स्थाई डायरेक्टर : 2013 में इलाज हेतु अधिकारिक रूप से एम्स की शुरुआत हुई थी उस वक्त डॉक्टर संदीप कुमार डायरेक्टर के पद पर पदस्थ थे उनका कार्यकाल मई 2015 तक रहा और तभी से एम्स भोपाल में कोई स्थाई डायरेक्टर नहीं रहा है एम्स रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नितिन नागरकर को भोपाल एम्स का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. वर्तमान में भी डॉक्टर नागरकर ही भोपाल एम्स के कार्यकारी डायरेक्टर के रूप में पदस्थ हैं.

5 साल बाद भी शिक्षकों की हो रही भर्ती: एम्स 2013 में शुरू हुआ था 5 साल हो चुके हैं परंतु अभी तक मेडिकल शिक्षकों की कमी है और अभी तक भर्ती प्रक्रिया चल ही रही है जिसके चलते मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और इलाज पर बुरा असर पड़ रहा है. छात्रों का कहना है कि अगर एम्स में कोई स्थाई डायरेक्टर होता तो यह समस्या नहीं आती. वहीं दूसरी तरफ एम्स में चल रही भर्ती प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है

गौरतलब हो कि प्रदेश की जनता को बेहतर इलाज एवं सर्वसुविधायुक्त अस्पताल मिल सके इस मकसद से शहर में राष्ट्रीय स्तर का अस्पताल एम्स स्थापित किया गया था परंतु आज

एम्स एक नाम मात्र रह गया है इलाज के लिए मरीजों को घंटों लाइनों में

लगकर इंतजार करना पड़ता है फिर भी इलाज सही से मिल नहीं पाता. वजह स्टाफ की कमी बताई जाती है. विगत कुछ दिनों पहले संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने अपनी नियमितीकरण एवं अन्य मांगों को लेकर धरना दिया था.

दूसरी तरफ छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं मरीजों को इलाज कराने में परेशानियां हो रही हैं. समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा. एम्स प्रबंधन इस विषय पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो प्रबंधन समय-समय पर आयोजित होने वाले अपने आयोजनों पर समय और पैसा दोनों ही खर्च कर रहा है. इन आयोजनों का काफी प्रचार-प्रसार भी किया जाता है

यह है समस्या

छात्रों ने बताया कि ऐसी कई छोटी बड़ी समस्याएं हैं जहां पर कोई स्थाई डायरेक्टर ना होने के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है और बार बार प्रबंधन द्वारा टालमटोली की जाती है.पिछले 3 सालों से यहां पर स्थाई डायरेक्टर नहीं है एम्स रायपुर के डायरेक्टर यहां का कार्यभार देखते हैं जो कि महीने में दो या तीन बार 1 या 2 दिन के लिए ही यहां का दौरा करते हैं और डायरेक्टर के पास समय के अभाव के कारण छात्रों की समस्याएं ज्यों की त्यों रह जाती हैं इसलिए हमने अपनी सारी छोटी-बड़ी मांगों को एक ही मांग में समाहित कर अपना विरोध इस अनिश्चितकालीन हड़ताल कर जताया है.

हमारी डीन से बात हुई है. उन्होंने हम से 3 दिन का समय मांगा है और हमारे साथियों द्वारा पैदल मार्च भी किया जा रहा है जिसके चलते हमने अपनी हड़ताल को 3 दिन के लिए स्थगित कर दिया है, खत्म नहीं किया है. हमारी एक ही मांग है- स्थाई डायरेक्टर. हमने अपनी सारी मांगों को इसी एक मांग में समाहित कर दिया है.
-पार्थ देशमुख, मीडिया प्रमुख,
स्टूडेंट यूनियन, एम्स भोपाल

छात्रों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है. जहां तक टेंट लगाने की अनुमति का सवाल है, यह अनुमति डिप्टी डायरेक्टर द्वारा दी जाती है. अनुमति क्यों नहीं दी गई इसके विषय में मुझे नहीं पता पर हम ने छात्रों से कहा था कि वह ऑडिटोरियम का इस्तेमाल कर सकते हैं और उन्होंने किया भी.
-डॉ. राजेश मलिक,
डीन, एकेडमिक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल

आज से मैं और मेरे साथी चंदन आर्य स्थाई डायरेक्टर की मांग को लेकर दिल्ली के लिए पैदल मार्च कर रहे हैं इस पैदल मार्च को हमारे साथियों ने भरपूर सहयोग दिया है.
-संत गुरु प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष,
स्टूडेंट यूनियन, एम्स भोपाल

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