इन दिनों कनाडा के प्रधानमंत्री श्री जस्टिन पियरे ट्रूडो सपरिवार भारत की यात्रा पर आये हुए हैं. वे आगरा में ताजमहल और अहमदाबाद में गांधीजी के साबरमती आश्रम भीें गये. कनाडा में यह कहा जा रहा है कि भारत सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है.

उनके कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी नजर नहीं आ रहे.प्रधानमंत्रियों के सभी दौरे निर्धारित कार्यक्रमों के साथ चलते हैं. उसमें भारत के प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति की भूमिका भ्रमण स्थलों में ‘गाइड’ की होती है.

वैसे भी यह माना जा रहा है कि कनाडा के प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर इसलिये भी आये हैं कि दोनों देशों में जो असामान्य स्थिति आ गयी है उसे दूर किया जाए.

कनाडा के मंत्रिमंडल में एक ऐसे भारतीय मूल के व्यक्ति को रक्षा मंत्री बनाया गया जिसका भारत के खालिस्तानी मिलीटेन्ट से सम्पर्क रहा है और वे आज भी कनाडा में उसके आसपास जमे हुए हैं. कुछ समय पूर्व यह कनाडा मंत्री यहां आकर पंजाब भी गये थे. उस समय भी वहां के मुख्यमंत्री श्री अमरिन्दर सिंह उनसे नहीं मिले.

भारत में तो खालिस्तानी आतंक कभी का दबाकर खत्म किया जा चुका है, लेकिन कनाडा में उसके कुछ ‘अवशेष’ अभी शरण संरक्षण पा रहे हैं. कनाडा का रुख भी पाकिस्तान की ओर झुका है. उन्हें यह समझना ही होगा कि रिश्ते उसी समय सामान्य होते हैं जब सब परिस्थितियां भी सामान्य रहें.

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