कर्नाटक में सरकार बनाने के लिये भारतीय जनता पार्टी अपना बहुमत बनाने के लिए खरीद फरोख्त में लगी है और यहां उसकी राजनैतिक नैतिकता भी अनैतिकता में परिवर्तित होती नजर आ रही है.

कर्नाटक में कांग्रेस की सिद्धारमैय्या सरकार थी- जो चुनावों में पुन: बहुमत न पाकर सत्ता के बाहर हो गयी. कर्नाटक की 222 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिये न्यूनतम सदस्य संख्या 112 होनी चाहिये. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 104 स्थान मिले हैं. दो निर्दलीय जीते हैं इनमें से एक भाजपा को समर्थन दे रहा है. दूसरी ओर कांग्रेस को 78 स्थान मिले. देवेगौड़ा के जनता दल सेक्यूलर को 38 स्थान मिले और दो में से एक निर्दलीय विधायक इनके साथ हैं.

कांग्रेस ने जनता दल सेक्यूलर को सरकार बनाने में समर्थन देकर सदन में उसका बहुमत दोनों को दिलाकर 116 कर दिया और एक निर्दलीय के साथ यह 117 हो गया. भाजपा विधायक दल के नेता श्री येदियुरप्पा और जनता दल सेक्यूलर के नेता श्री कुमार स्वामी चुने गये. दोनों ने नेता की हैसियत से राज्यपाल श्री वजुभाई वाला से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है. भाजपा का यह तर्क है कि वह सदन की सबसे बड़ी पार्टी है इसलिये पहले उसे मौका दिया जाना चाहिये.

दूसरी ओर श्री कुमार स्वामी का दावा है कि कांग्रेस द्वारा समर्थन देने से विधानसभा में उन्हें बहुमत प्राप्त हो गया है. इसलिये उन्हें सरकार बनाने को बुलाया जाये. कुछ समय पूर्व गोवा व मणिपुर में विधानसभाओं के आम चुनाव हुए थे. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आई थी और भारतीय जनता पार्टी ने अन्य दलों से मिलकर उनकी सदस्य संख्या कांग्रेस से ज्यादा कर ली थी.

वहां भारतीय जनता पार्टी का यह तर्क माना गया कि उसने समझौते से सबसे बड़ी कांग्रेस पार्टी से ज्यादा सदस्य संख्या कर ली है और उसी आधार पर राज्यपालों ने उसे साझा सरकार बनाने दी जो अभी चल रही है.

लेकिन कर्नाटक में उससे पलट यह दावा कर रही है कि वह सबसे बड़ी पार्टी है यह माना जाए और पहले उसे सरकार बनाने का मौका दिया जाए. आम तौर पर यही होता आया है कि राज्यपाल वही करते हैं जो केन्द्र में सत्तारूढ़ दल की माफिक पड़ता हो.

कांग्रेस को भी अंदेशा है कि यहां भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार और राज्यपाल गोवा व मणिपुर से विपरीत श्री येदियुरप्पा की सरकार बनाने के लिए मौका परस्त राजनीति करेंगे. कांग्रेस ने घोषित भी कर दिया है कि यदि श्री कुमार स्वामी के दावे को नहीं माना गया और उन्हें सरकार नहीं बनाने दी तो वे उस मामले पर सुप्रीम कोर्ट जायेंगे.

श्री येदियुरप्पा अपना बहुत बनाने के लिए लिंगायत कार्ड खेल रहे हैं. वे जनता दल सेक्यूलर व कांग्रेस से लिंगायत विधायक अपने पक्ष में तोडऩा चाहते हैं. यह अपने आप में भारतीय जनता पार्टी की एक और अनैतिकता होगी कि उन लोगों से दलबदल कराया जायेगा जो एन्टी डिफेक्शन एक्ट में उसे सदस्यता से अयोग्य बनाती है.

लेकिन ऐसे मामलों में स्पीकर भी अलग-अलग नैतिकता और अनैतिकता करते हैं.कहीं फौरन ऐसे विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया जाता था कहीं नोटिस देकर उस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर कोई निर्णय ही नहीं करते हैं.