काश्मीर घाटी में पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की ओर से फौजों द्वारा लगातार गोलाबारी चल रही है.नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी ही नियंत्रण से बाहर है. भारत की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी की जांच पड़ताल व कार्यवाहियों से घाटी में पाकिस्तान से आ रहा फंड का आने से रुकने से भाड़े के पत्थरबाज भी घर बैठ गये.

घाटी के गिलानी परिवार कोपाकिस्तान से फंड आता था और ये लोग रोजगार के रूप में लोगों को भारतीय फौजों व पुलिस पर पत्थर फेंकने के लिये नौकरी पर रखते थे. अभी हाल ही में एकाएक घाटी में पत्थरबाजी फिर से होनेलगी है.

इससे यह अंदाजा हो रहा है कि किन्हीं लोगों के पास पाकिस्तान से किसी तरह फिर से फंड भेजा जाने लगा है. ऐसे ही लगभग 200-300 पत्थरबाजों ने फौज को निशाना बनाकर उन पर पत्थर फेंके और एक सैनिक अधिकारी के अपहरण का प्रयास किया.

इस स्थिति में फौज ने गोली चलायी जिसमें दो पत्थरबाज मारे गये. इसमें एक अजीब बात यह की गयी है कि इन गोली चालन के लिए फौज के लोगों पर पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज की गयी है. जबकि बल प्रयोग फौज व पुलिस का कर्तव्य माना जाता है और यह अपराध की परिभाषा में नहीं आता और इस पर एफ.आई.आर. हो ही नहीं सकती.

काश्मीर में पीडीपी और भारतीय जनता पार्टी की साझा सरकार है और इस विषय पर उनमें टकराव हो गया है. भाजपा ने कहा है कि यह एफ.आई.आर. गलत है और इसे वापस लिया जाना चाहिये. वहीं मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पीडीपी चाहती है कि एफ.आई.आर. के तहत जांच की जाए. यदि यह टकराव बढ़ा तो वहां सरकार संकट में आ जायेगी.

इसी समय अफगानिस्तान में तालिबानियों द्वारा राजधानी काबुल में दो बड़े हमले हो गये हैं.अफगानिस्तान सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प ने यह कहा कि अब अफगान समस्या का हल वार्ताओं से नहीं बल्कि पूरे फौजी हमले से ही किया जा सकता है. 11 दिन पहले काबुल के कान्टीनेन्टल होटल में हुए आतंकी हमले का खुलासा हो गया है. यह साजिश पाकिस्तान में रची गयी थी.

एक आतंकी के पिता ने बताया कि आतंकियों को ट्रेेनिंग पाकिस्तान में आई.एस.आई. ने दी थी. आतंकियों के पास से पाकिस्तान फौजों के हथियार व उपकरण मिले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अब तालिबानियों को फौजी कार्यवाही से खत्म किया जा सकता है. श्री ट्रम्प ने अमेरीकियों से कहा है कि जब तक इस्लामी स्टेट खत्म नहीं हो जाता अमेरिका उसके विरुद्ध अरब राष्ट्रों में अपना फौजी अभियान जारी रखेगा.

इसी समय चीन ने डोकलाम के बारे में कहा है कि वह उसका इलाका है. इस क्षेत्र में 72 दिन भारत व चीन की सैनिक टुकडिय़ां एक दूसरे के सामने जमी रहीं और बाद में चीन वहां से हट गया था. चीन अभी भी उस क्षेत्र के आसपास उसके क्षेत्र में ही स्थिति बनाये हुए है.

वाशिंगटन में अमेरिका के सी.आई.ए. के डायरेक्टर श्री माइक पाम्पओ ने कहा है कि अगले कुछ महीनों में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच युद्ध की स्थिति भडक़ सकती है. इस समय अफगानिस्तान, काश्मीर घाटी, डोकलाम और अमेरिका उत्तर कोरिया में विस्फोटक स्थिति निर्मित हो गयी है. यदि समय रहते राजनैतिक समाधान न निकला तो युद्ध की स्थिति आ जायेगी.