इंसान की हिंसक प्रवृत्ति के कारण खुल रहे हैं कत्ल खाने

भोपाल,

कोई भी धरम इंसान को हिंसा की अनुमति नही देता जिस धर्म की दुहाई देकर लोग मूक पशुओं की बलि चढा रहे हैं. उस धर्म के ग्रन्थों में भी हिंसा को दानवीय कृत्य करार दिया है यह बात आज मानस भवन मे आचार्य सुबल सागर महाराज ने विषेष धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा.

आज जिस प्रकार से मूक पशुओं की बलि दी जा रही है और शहर-शहर में कत्ल खाने खोले जा रहे है यह सब मानव के दानव बनने को प्रमाणित करते है.

आचार्यश्री ने कहा आज सरेआम कत्लखानों के साथ मॉस निर्यात हो रहा है यह भगवान महावीर और राम का हिन्दुस्तान हो ही नही सकता. हमारे देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता का अभियान चला रहें हैं. भारत को स्वच्छ करना है तो भारत से बूचड़ खाने बंद करने पडेगे जब तक अंदर से पीड़ा नही होगी. जीवों के प्रति दया भाव नही आऐगे तब तक सभी की चेतना जागृत नही होगी.

आचार्य श्री ने भगवान महावीर अहिंसा पर बोलते हुए कहा महावीर की अहिंसा को विश्व के सभी देश अपना ले तो परमाणु और ऐटम बम की आवश्यकता ही नही है. आज मनुष्य के अंदर की आकांक्षाएं और विकृति के कारण ही हिंसा का जन्म हुआ है.

धर्म से सदैव लोक कल्याण ही होता है: उमाशंंकर व्यास

मानस भवन में रामनवमी के पावन पर्व के अंतर्गत कार्यक्रम के अंतिम चरण में पद्मभूषण पूज्य पंडित रामकिंकर उपाध्याय के प्रिय सेवक एवं सुयोग्य शिष्य परमपूज्य पंडित उमाशंंकर व्यास ने रामराज्य की विशेेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य में सभी नागरिक धर्म का पालन करते थे.

इसलिये उस युग में जीवन की विषमताएं समाप्त हो गयी थी. उन्होंने द्वापर युग का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां भी समाज में देखी जाती है जब धर्म अधर्म का कवच बनकर सामने आता है.

ऐसी स्थितियों में भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य जैसे धर्माचारी भी दुर्योधन जैसे दुराचारी का साथ देने लगते है. इसलिये भगवान श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम दुर्योधन के वध के पूर्व इन महाबलशाली धर्मज्ञ कहे जाने वाले भीष्म और द्रोण को भी समाप्त किया. पं.व्यास ने महाभारत का दृष्टान्त देते हुए कहा कि विचार करिये कि यदि दुर्योधन को भीष्म पितामह ,दोणाचार्य और कर्ण का साथ न मिला होता तो वह महाभारत करने से पहले सोचता.

उन्होंने कहा कि उस युग मे बुराईयां समाज में मिल गयी थी. इसलिए भगवान कृष्ण ने सबसे पहले उन बुराइयों को समाप्त किया. इसीतरह रामराज्य की स्थापना के पूर्व भगवान श्रीराम ने रावणादि राक्षसों का संहार करके दुराचारियों का अंत किया. यह प्रसंग बताता है कि हम भी हमारे हदय में दुष्कर्म रूपी दुराचारों को समाप्त करें तभी रामराज्य की स्थापना हो सकती है.

काम पर विजय से मिलते हैं परमात्मा

मनुष्य के जीवन में कोई काम कठिन नहीं होता मेहनत और लगन से किसी भी काम पर विजय प्राप्त की जा सकती है. बिना मेहनत और लगन से हर छोटा से छोटा काम कठिन हो जाता है. जिससे सफलता कोसों दूर होती है. सतमार्ग पर चलने वाला व्यक्ति ईश्वर की आराधना से कठिन से कठिन से कार्यो में सफलता प्राप्त कर लेता है. जिससे परमात्मा की प्राप्ति शीघ्र ही होती है.

यह बात सतलापुर में सेन्ट पीटर्स स्कूल के समीप मैदान पर स्थित सात दिवसीय श्रीमद भावगत महापुराण के छटवें दिन रविवार को वृन्दावन धाम से पधारे कथावाचक पं. शैलेन्द ्रकृष्ण महाराज ने कहीं. साथ ही उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण गोपियों का उद्धार करने के लिए महारास लीला की, परन्तु आज मनुष्य उसमें गलत विचार उत्पन्न करता है. साथ ही भगवान श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया.

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