एम्स में जुटे कई राज्यों के चिकित्सा छात्र

नवभारत न्यूज भोपाल,

भारत में कैंसर की बीमारी अपने पांव पसार रही है और लगातार कैंसर पीडि़त मरीजों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है.

इसी को लेकर यूनियन इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल संस्था जो कि एक अंतर्राष्टरीय संस्था है, का मानना है कि 2020 तक कैंसर पीडि़त मरीजों की संख्या 2 करोड़ होगी, जो कि चिन्ता का विषय है और इस विषय पर जागरूकता आवश्यक है.

राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में कैंसर के बढ़ते प्रभाव और इसकी रोकथाम के लिये एक 5 दिवसीय कार्यक्रम इंटरनेशनल विंटर स्कूल ओंकोलॉजी के नाम से आयोजित किया जा रहा है और इस कार्यक्रम का यह तीसरा साल है. यह कार्यक्रम 12 फरवरी से 16 फरवरी तक आयोजित होगा. इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से आये 40 एमबीबीएस छात्रों को लगभग इतने ही शिक्षक विभिन्न प्रकार के कैंसर के बारे में पढ़ायेंगे.

कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले छात्र एक प्रक्रिया के तहत इस कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं जहां ड्रा के तहत छात्रों का चुनाव होता है. साथ ही सभी छात्र अपने-अपने प्रोजेक्ट साथ लाते हैं और उन छात्रों को उनके प्रोजेक्ट एवं कार्यशैली के अनुसार एम्स की चार जजों की कमेटी द्वारा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है.

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एमबीबीएस कर रहे छात्रों को विभिन्न प्रकार के कैंसर को कैसे पहचाना जाये ताकि उसकी जांच एवं उसके उपचार के लिये मरीज को सही परामर्श दिया जा सके. अक्सर होता है कि एमबीबीएस डॉक्टर्स कैंसर की पहचान नहीं कर पाते एवं सही परामर्श नहीं दे पाते इसलिये भविष्य के एमबीबीएस डॉक्टर्स कैंसर की पहचान कर सकें.

इसी उद्देश्य के तहत यह कार्यक्रम आयोजित होता है. इस कार्यक्रम में एम्स में उपलब्ध विभिन्न उपकरण जिनसे कैंसर की पहचान होती है जैसे फ्लोसाइटोमीटर और एचपीएलसी जिससे ब्लड कैंसर की जांच होती है. इसी प्रकार पीसीआर और इम्यूनोहिस्टो कैमेस्ट्री जिससे सभी तरह के कैंसरों की जांच होती है, के विषय में देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आये छात्रों को पढ़ाया जाता है.

जेनेटिक लेवल पर हुई रिसर्च के बारे में बताया गया. साथ ही प्रोंस्टेट कैंसर में सार्कोसीन का इस्तेमाल करके जांच एवं उपचार करना बताया
गया.
शिखर निगम एमबीबीएस छात्र
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल

आज तीन लेक्चर हुये जिसमें इन्ट्रो-डक्शन, कैंसर कितने प्रकार का होता है और भारत में किस प्रकार का कैंसर ज्यादा होता है, के विषय में बताया गया.
गुंजन ललवानी एमबीबीएस छात्रा
एमजीएम कॉलेज इन्दौर

हमारे देश में कैंसर पीडि़तों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इसलिये इस कार्यक्रम का उद्देश्य भविष्य में आने वाले डॉक्टर्स को कैंसर संबंधित ज्ञान दिया जा सके.
डॉ. नील कमल कपूर

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