ओला, उबेर जैसी सेवाओं पर नियंत्रण और किराया निर्धारण के लिए बननी थी नीति

  • अभी तक प्रस्ताव नहीं भेज सका परिवहन विभाग

भोपाल,

ओला और उबेर जैसी केब सर्विसेस पर नियंत्रण और इनका किराया निर्धारण के लिए लाई जाने वाली नीति अधर में लटक गई है. राज्य सरकार ने करीब चार महीने पहले इन सेवाओं पर नियंत्रण के लिए नीति बनाने का फैसला लिया था.

परिवहन विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन विभाग अब तक नीति लागू नहीं कर पाया है. इस नीति में नियंत्रण और किराया निर्धारण के साथ साथ यात्री सुरक्षा की दृष्टि से भी प्रावधान किए जाने थे, इस दायरे में ऑटो एवं बाइक शेयरिंग जैसी सुविधाओं को भी लाने की बात सरकार ने कही थी.

परिवहन विभाग के सूत्रों का कहना है कि विभाग ने नीति का प्रारूप तैयार कर लिया, लेकिन कैबिनेट से मंजूरी के लिए अब तक प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका है. परिवहन विभाग का यह भी तर्क है कि नई नीति लाने से पहले देश के अन्य शहरों में लागू नीति का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके चलते विलंब हो रहा है.

प्रस्तावित नीति में किराए का निर्धारण करने के लिए कुछ सैद्वांतिक मापदंड तय किए गए हैं. इस नीति पर ओला, उबेर और इस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के सुझाव भी शामिल किए गए हैं.

पंजीयन कराना होगा अनिवार्य

प्रस्तावित नीति में ओला, उबेर और बाइक शेयरिंग जैसी सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को परिवहन विभाग में पंजीयन कराना होगा. वाहनों की संख्या के हिसाब से पंजीयन तीन अलग अलग श्रेणियों में होगा. इन सभी कंपनियों को शहरों में कंट्रोल रूम स्थापित करने होंगे और वाहनों में जीपीआरएस सिस्टम लगाने होंगे.

फिटनेस नहीं होने पर 50 रुपए प्रतिदिन जुर्माना

व्यवसायिक वाहनों पर फिटनेस नहीं होने पर 50 रुपए प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगाया जाएगा. इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट में लगाई गई एक याचिका पर सुनवाई कर 50 रुपए प्रतिदिन की दर से बसूलने का फैसला सुनाया है.

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