देश में कैश (नगदी) की कमी बराबर बनी हुई है और इस समस्या का यह निदान नहीं है कि एक राज्य या क्षेत्र में रोक कर दूसरे राज्यों में भेज दिया जाए. कुछ समय पूर्व ही उत्तर-पश्चिम व मध्य क्षेत्र के राज्यों में कैश की भारी कमी हो गई.

बैंकों के ए.टी.एम. ड्राई (खाली) हो गए और उन पर ‘नो कैश’ की कार्ड बोर्ड तख्तियां लटका दी गईं. सरकार व रिजर्व बैंक लोगों को यह और वह वजह ही नहीं बता पाए कि यह कैश की कमी क्यों हो रही है. लेकिन वजह साफ थी कि नोटबंदी में मोदी सरकार ने गलती नहीं बल्कि घपला किया है जो जान बूझकर किया गया.

इस समय पूर्वी और उत्तर-पूर्व के राज्यों अरुणाचल, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में इस मई महीने के पहले हफ्ते में ही ए.टी.एम. खाली हो गए. इन पहाड़ी राज्यों में भी लोगों को वैसी ही परेशानी हो रही है कि सभी ए.टी.एम. के चक्कर लगा रहे हैं और हर जगह ‘नो कैश’ के बोर्ड लगे हैं.

यहां बैंकों में भी जो रुपया रहता है वह भी इसी वजह से कम हो गया और लोग जो रुपया सामान्य तौर पर बैंकों में ही रखते और ड्रा या चेक से काम चलाते हैं- वे भी घरों में ही रुपया रख रहे हैं. बैंकों में यह हालत हो गई है कि उन्होंने ग्रामीण ब्रांचों से रुपया शहरी शाखाओं में ले आये हैं तो बैंकों की ग्रामीण शाखाओं में रुपया नहीं के बराबर हो गया.

कुछ लोग जिन्होंने ए.टी.एम. कार्ड नहीं लिये हैं वे ज्यादा से ज्यादा रुपया निकाल कर जरूरतमंद लोगों को ब्याज पर देने लगे हैं. इससे बैंकों की शाखाओं में भी रुपया कम होता जा रहा है और अंदेशा हो रहा है कि यदि जल्दी ही स्थिति नहीं सुधरी तो बैंकों की शाखाओं में भी ए.टी.एम. की तरह यह नोटिस लग जायेगा कि बैंक में रुपया नहीं है.

मोदी सरकार ने नोटबन्दी कर देश की वित्तीय, व्यापार, व्यक्तिगत व बाजारों की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर डाला. सत्ता में इन नारे-वादे के साथ आए कि विदेशों से काला धन ले आयेंगे और दूसरी ओर नोटबन्दी से देश में ही काला धन बनवा दिया.

नोटबंदी में 1000-500 के नोट बंद कर दिये और उनके स्थान पर नई डिजाइन के नये नोट छापे नहीं और देश में पहली बार 2000 रुपये का नोट जारी कर दिया. जब अर्थव्यवस्था में 1000 व 500 का नोट ही नहीं तो 2000 का नोट चल ही नहीं पाया. इसका अधिकांश भाग काला धन रखने वाले ले गये. इसमें बैंक के कुछ अधिकारी भी पकड़े गए जिन्होंने 2000 का नोट पीछे के रास्ते दे दिया और बैंकों के सामने लम्बी-लम्बी कतारें लग गई कि बैंकों में नये नोट नहीं आये.

इस समय 2000 के नोटों का 70 प्रतिशत भाग चलन से बाहर काला धन के रुप में तिजोरियों में बंद पड़ा है और मात्र 30 प्रतिशत ही चलन में है. बीच में 200 रुपये का नोट जारी किया. इसने बाजारों में एक झलक दिखाई और यह भी कहीं गायब हो गया है.

इस समय देश में करेन्सी नोटों की भारी कमी हो गई है. उद्योग-व्यापार और लोगों का घरेलू जीवन बहुत ज्यादा प्रभावित हो गया है. यह भी आरोप लग रहे हैं कि बड़े राज्यों और इसके तुरन्त बाद लोकसभा के आम चुनाव आ रहे हैं और दो हजार का नोट काले धन के रूप में चुनाव धन बना लिया गया.इस समय बाजार में 2000, 1000, 500 और 200 का नोट नहीं है और अर्थ व वित्तीय व्यवस्था का दम घुट रहा है.

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