मध्यप्रदेश विधानसभा के इन दोनों कोलारस-मुंगावली उपचुनावों में प्रचार थम गया है. 24 फरवरी को मतदान होना है. इन्हें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस दोनों ही इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा के आम चुनाव की रिहलर्स के रूप में देख रहे है. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ने इसमें अपने को झौंक दिया है.

इन चुनावों में राजनैतिक और प्रशासनिक तौर पर काफी कुछ अवांछनीय भी हो गया. भाजपा सरकार की मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे ने अपने चुनाव भाषणों में वोटरों को इस तरह से धमकाया कि यदि ‘कमल’ को वोट नहीं दिया तो उन्हें मकान, गैस चूल्हा, क्षेत्र का विकास आदि कुछ नहीं दिया जायेगा.

इसका संज्ञान लेते हुए राज्य की निर्वाचन आयुक्त श्रीमती सलीना सिंह ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं कहना था और भारत के चुनाव आयोग ने भी उसे इस आचरण पर नोटिस थमा दिया.

प्रशासनिक स्तर पर वोटर लिस्टों में एक गड़बड़ी पायी गयी जिसे कांग्रेस ने सिद्ध कर दिया और शासन ने भी माना. अशोकनगर के कलेक्टर को बदल दिया. पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को यहां विशेष रूप से पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है. ऐसा लगता है कि इलेक्शन पिटीशन के आधार तैयार हो
चुके हैं.

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