मध्यप्रदेश के 10 आदिवासी जिलों के 46 विकासखंडों के 6207 गांवों को राष्टï्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के प्रथम चरण में शामिल किया गया है. राज्य में आदिवासी समुदायों का बाहुल्य है. झाबुआ के भील और मंडला के गौंड अपनी विशिष्टï पहचान व इतिहास रखते हैं.

आदिवासी क्षेत्रों को काफी अर्से तक आधुनिक समस्या व समाज से जंगल के सुदूर क्षेत्रों मेें अलग रहना पड़ा. इससे वे शिक्षा से भी बहुत दूर रहे. तुलनात्मक तरीकों से भी समाज के अन्य वर्गों की संपन्नता से बेखबर ही रहे.
अब इस राष्टï्रीय मिशन सेे उन पर ध्यान केंद्रित किया गया है. पहले चरण में श्योपुर, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट जिलों में आदिवासी ग्रामीण समुदाय को गरीबी से ऊपर उन्नत किया जायेगा. उन्हें आमदनी बढ़ाने के लिये संस्थागत सहयोग से वित्त प्रदान किया जायेगा. उनमेें क्षमता व कौशल, हुनर को विकसित करके उन्हें नई दिशा देना है. इसमें इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है कि  इन सभी कार्यक्रमों में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी रहे. यह मिशन उनके बीच 8-10 साल तक सतत् बना रहेगा.

देश के 600 जिलों, 6 हजार विकासखंडों में यह समुचित कार्यक्रम चलेगा. आदिवासी समुदाय से गरीबी मिटाने की यह राष्टï्र स्तर की बहुत ही सुगठित योजना है. इसके लिये प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे आदिवासी परिवेश में काम कर सके.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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