नई दिल्ली,  गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव के परिणाम का असर भले ही अंकगणित के हिसाब से भाजपा के सेहत पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन राजनीतिक तौर पर भाजपा को जबरदस्त झटका लगा है.

इस परिणाम से जहां कांग्रेसी हौसला बुलंद हुआ है वहीं भाजपाई रणनीतिकार आत्ममंथन को मजबूर हो गए हैं. जानकारों की मानें तो हिमाचल प्रदेश व गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले गुरदासपुर में भाजपा को भारी अंतर से मिली पराजय वर्तमान राजनीतिक हालात बयां करने के लिए काफी है.

जिस तरह से विकास के सरकारी दावों को भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेताओं की ओर से चुनौती मिल रही है और उसका प्रतिउत्तर जिस अंदाज में सरकार व संगठन की ओर से दी जा रही है ,उससे साफ है कि न सिर्फ भाजपा के अंदर बल्कि सरकारी तंत्र में भी सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही आर्थिक विकास के सवाल को अपने तर्क के सहारे बेहतर बताने के प्रयास में लगे हैं. लेकिन गुरदासपुर की जनता ने विकास के केंद्रीय दावे को नकार कर भविष्य के लिए बानगी दे दी है.

जानकार मान रहे हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र के उपर लगे कथित आरोप की स’चाई चाहे जो हो, लेकिन भाजपा के राजनीतिक भविष्य पर इसका प्रत्यक्ष असर दिखने लगा है. भाजपा के लिए यह हार भले ही एक सीट के तौर पर मिली है लेकिन कांग्रेस के लिए यह संजीवनी साबित हो सकती है.

प्रेक्षक मान रहे हैं कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस अंदाज में गुजरात की जमीन पर मोर्चा खोला है उसका प्रत्यक्ष असर ही है कि गुजरात में पंद्रह साल से हुए विकास को समझाने के लिए प्रधानमंत्री समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लगातार दौरा करना पड़ रहा है.

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