मध्यप्रदेश में 15 मार्च से इंदौर, उज्जैन व भोपाल संभाग में सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू हो गयी और अब तक 5873 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. दूसरे संभागों में द्वितीय चरण में 26 मार्च से खरीदी प्रारंभ होगी.

सरकार हर साल यह दावेदारी करती है कि इस साल खरीदी, ढुलाई व गोदामों की पर्याप्त व्यवस्था भी कर ली गयी है लेकिन हर साल खरीदी प्रारंभ होते ही ये सभी समस्याएं सामने आ जाती हैं. मध्यप्रदेश देश में प्याज खरीदने, सडऩे व फेंकने में भी अग्रणी राज्य बन चुका है, लेकिन भंडारण के अभाव में मध्यप्रदेश में हजारों टन अनाज भी काफी बर्बाद होता है. अब मंडियों में किसानों के समर्थन मूल्य मिलता नहीं है.

राजधानी भोपाल संभाग में ही बैरसिया क्षेत्र में समर्थन मूल केंद्रों पर किसान तो गेहूं लादकर पहुंच गये पर खरीदी इसलिये नहीं हुई कि वहां सरकारी अमला ही नहीं पहुंचा.

इंदौर-उज्जैन संभाग में किसानों को गेहूं खरीदी में समर्थन मूल्य से कम दाम दिये जा रहे हैं. यहां किसान भडक़ गये और नीलामी रोक दी गयी. किसान कम भाव पर बेचने को तैयार नहीं थे. एस.डी.एम. के हस्तक्षेप के बाद काम शुरू हुआ.

मंदसौर, नीमच में लहसुन व अन्य फसलों के भाव भी समर्थन मूल्य से कम होने से किसानों ने गांधी मूर्ति के पास लहसुन के ढेर लगा दिये. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री अरुण यादव ने कहा है कि शासकीय व्यवस्था न होने से व्यापारी ओने पौने दामों पर खरीदी कर रहे हैं. इस समय राज्य भर में गेहूं का किसान बहुत परेशान हो रहा है.